Dhanbad News : झरिया नगर निगम कार्यालय से 13 हजार जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों का डेटा गायब, लोगों में आक्रोश
Dhanbad News : 2019 से पहले के रिकॉर्ड लापता होने से हजारों लोग परेशान, प्रमाणपत्र के लिए वर्षों से काट रहे दफ्तरों के चक्कर
Dhanbad News : धनबाद नगर निगम के झरिया क्षेत्रीय कार्यालय से करीब 13 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का डेटा गायब होने का मामला सामने आया है। पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने से लोगों को स्कूल नामांकन, आधार अपडेट, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं में भारी परेशानी हो रही है। नगर निगम प्रशासन ने जांच कमिटी गठित करने की बात कही है।
झारखंड के धनबाद जिले से प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्था की एक बेहद गंभीर तस्वीर सामने आई है। धनबाद नगर निगम के झरिया क्षेत्रीय कार्यालय से लगभग 13 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का डेटा रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 से पहले के हजारों रिकॉर्ड अब कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं। इस खुलासे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और लोग वर्षों से अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी वे पुराने जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र निकलवाने कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर वापस भेज दिया जाता है। कई लोग महीनों नहीं बल्कि वर्षों से नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
स्कूल एडमिशन से लेकर सरकारी योजनाओं तक असर
पुराने रिकॉर्ड गायब होने का असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। जन्म प्रमाणपत्र बच्चों के स्कूल नामांकन, आधार कार्ड अपडेट, पासपोर्ट आवेदन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी दस्तावेज होता है। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र पेंशन, बीमा क्लेम और संपत्ति संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण कई परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई अभिभावकों का आरोप है कि बच्चों का स्कूल एडमिशन अटक गया है क्योंकि जन्म प्रमाणपत्र में सुधार नहीं हो पा रहा। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि आधार और राशन कार्ड अपडेट कराने में भी दिक्कत आ रही है।
2019 में दर्ज हुई थी प्राथमिकी, लेकिन कार्रवाई नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले को लेकर वर्ष 2019 में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। लोगों का आरोप है कि मामला वर्षों से फाइलों में दबा हुआ है और प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देता रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर सरकारी रिकॉर्ड कैसे गायब हो सकते हैं। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर प्रशासनिक विफलता का मामला है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ऑनलाइन अपडेट और सुधार कार्य भी ठप
नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने के कारण जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों में सुधार और ऑनलाइन अपडेट की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। कई लोग नाम, जन्मतिथि और अन्य त्रुटियों को ठीक कराने के लिए आवेदन दे चुके हैं, लेकिन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की वजह से उनका काम अटका हुआ है।
डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवा व्यवस्था के दौर में इस तरह हजारों रिकॉर्ड का गायब होना प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते डेटा को सुरक्षित डिजिटल सिस्टम में अपडेट किया गया होता, तो आज इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती।
नगर आयुक्त ने जांच कमिटी गठित करने की कही बात
मामले के सामने आने के बाद धनबाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है। नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कमिटी गठित करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि रिकॉर्ड कैसे और किन परिस्थितियों में गायब हुए।
वहीं धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने भी इस मामले को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि लोगों को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लोगों को जांच से उम्मीद
लगातार परेशान हो रहे लोगों को अब प्रशासनिक जांच से उम्मीद जगी है। नागरिकों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो न सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई होगी बल्कि हजारों लोगों को उनका जरूरी डेटा और प्रमाणपत्र दोबारा मिल सकेगा।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सभी रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटलीकरण जरूरी है।
झरिया नगर निगम कार्यालय से 13 हजार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों का डेटा गायब होना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की परेशानियों और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। अब देखना होगा कि जांच कमिटी इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और आम लोगों को राहत कब तक मिल पाती है।