IIT ISM Dhanbad : IIT ISM प्रबंधन के खिलाफ सुरक्षा गार्डों का भिक्षाटन, पैदल मार्च कर जताया विरोध
IIT ISM Dhanbad : सुरक्षा प्रहरी कर्मचारी संघ के नेतृत्व में पूर्व सुरक्षा गार्डों ने निकाला भिक्षाटन सह पैदल मार्च, वेतन, बोनस और PF में कथित विसंगतियों की जांच की मांग
IIT ISM Dhanbad : धनबाद स्थित IIT-ISM प्रबंधन के खिलाफ सुरक्षा प्रहरी कर्मचारी संघ के बैनर तले करीब 110 पूर्व सुरक्षा कर्मियों ने अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने भिक्षाटन सह पैदल मार्च निकालकर सेवा से हटाए जाने के साथ-साथ वेतन, PF, बोनस और कथित कट मनी को लेकर गंभीर आरोप लगाए। संघ का कहना है कि कई कर्मियों ने 20 से 25 वर्षों तक संस्थान में कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई और कोरोना काल में भी सेवाएं दीं। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समाधान की मांग की है।
धनबाद में स्थित IIT-ISM प्रबंधन के खिलाफ पूर्व सुरक्षा कर्मियों का विरोध प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। सुरक्षा प्रहरी कर्मचारी संघ के बैनर तले करीब 110 पूर्व सुरक्षा कर्मियों ने मंगलवार को भिक्षाटन सह पैदल मार्च निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक संस्थान में सेवा देने के बावजूद उन्हें अब काम से बाहर कर दिया गया है।
प्रदर्शन का नेतृत्व सुरक्षा प्रहरी कर्मचारी संघ के महामंत्री प्रभात कुमार सिंह ने किया। पूर्व सुरक्षा कर्मियों ने अपने गले में स्कैनर टांगकर भिक्षाटन किया और पैदल मार्च के माध्यम से अपनी मांगों और समस्याओं को सामने रखा। प्रदर्शनकारियों ने IIT-ISM प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कथित तौर पर वेतन, PF, बोनस और वेतन से होने वाली कटौती से जुड़े मामलों को उठाया।
प्रदर्शन में शामिल पूर्व सुरक्षा कर्मियों का दावा है कि वे पिछले 20 से 25 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर IIT-ISM में सुरक्षा गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। कर्मचारियों के मुताबिक इतने लंबे समय तक संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था में योगदान देने के बावजूद उन्हें अब सेवा से बाहर कर दिया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक संस्थान से जुड़े रहने के कारण उनका रोजगार ही उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार था। ऐसे में अचानक काम से बाहर किए जाने से उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
संघ का दावा है कि इन कर्मचारियों ने सामान्य परिस्थितियों के साथ-साथ मुश्किल दौर में भी संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था संभाली। विशेष रूप से कोरोना महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में लोगों के लिए घर से बाहर निकलना भी चुनौतीपूर्ण था, उस समय भी सुरक्षा कर्मियों ने अपनी ड्यूटी जारी रखी।
सुरक्षा प्रहरी कर्मचारी संघ और प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना काल के दौरान भी उन्होंने IIT-ISM परिसर में दिन-रात अपनी ड्यूटी निभाई। उनका दावा है कि उस कठिन दौर में संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने में सुरक्षा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पूर्व सुरक्षा गार्डों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटने के बजाय विपरीत परिस्थितियों में भी काम किया। इसके बावजूद अब उन्हें सेवा से हटा दिया गया है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि इतने वर्षों तक उनकी सेवाओं का संस्थान की सुरक्षा व्यवस्था में इस्तेमाल किया गया, तो अब उन्हें रोजगार से बाहर करने के बाद उनकी समस्याओं पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने IIT-ISM प्रबंधन से जुड़े सुरक्षा व्यवस्था के भुगतान और कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का आरोप है कि कर्मचारियों के वेतन, बोनस और PF में कथित तौर पर विसंगतियां रही हैं। इसके अलावा कर्मचारियों ने वेतन से कथित कटौती यानी कट मनी का भी मुद्दा उठाया है।
हालांकि, इन आरोपों पर संस्थान प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोपों को उनके दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। यदि प्रबंधन इस मामले में अपना पक्ष रखता है तो उसे भी रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाना उचित होगा।
संघ का कहना है कि कर्मचारियों ने अपनी मेहनत की कमाई से होने वाली कथित कटौती का विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इसी तरह की मांगों और विरोध के बाद कई कर्मचारियों को सेवा से बाहर कर दिया गया।
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि पूर्व सुरक्षा कर्मियों ने अपने गले में स्कैनर टांगकर भिक्षाटन किया। इसके माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध को प्रतीकात्मक रूप से सामने रखने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय तक संस्थान की सुरक्षा में अपनी सेवाएं देते रहे, लेकिन आज रोजगार के संकट से जूझ रहे हैं। भिक्षाटन के माध्यम से उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और प्रबंधन के प्रति नाराजगी को सार्वजनिक तौर पर जाहिर किया।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने यह भी कहा कि भिक्षाटन से जो राशि एकत्र होगी, उसे IIT-ISM प्रबंधन को भेजा जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने इसे व्यंग्यात्मक तरीके से अपनी बात रखने का माध्यम बताया। उनका कहना था कि मेहनतकश और आर्थिक संकट से जूझ रहे कर्मचारियों द्वारा जुटाई गई राशि प्रबंधन को भेजी जाएगी, ताकि उनके शब्दों में, “गरीब कर्मचारियों के पैसे से प्रबंधन का पेट भरा जा सके।”
पूर्व सुरक्षा कर्मियों की सबसे बड़ी शिकायत सेवा से हटाए जाने को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक संस्थान में अपनी जिम्मेदारी निभाई और अब अचानक रोजगार समाप्त होने से उनके सामने परिवार चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
संघ ने मांग की है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाए और उनके आरोपों की निष्पक्ष जांच हो। खासकर PF, वेतन, बोनस और कथित कटौती से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई है।
110 पूर्व सुरक्षा कर्मियों के प्रदर्शन के बाद अब पूरे मामले में IIT-ISM प्रबंधन के पक्ष का इंतजार है। कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और यदि वे सही पाए जाते हैं तो संबंधित भुगतान एवं श्रम व्यवस्था की जांच की जरूरत हो सकती है।
वहीं, संस्थान की ओर से इस मामले में यदि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या दस्तावेज सामने आता है, तो उससे पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल पूर्व सुरक्षा कर्मियों ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से रोजगार, वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सवालों को सामने रखा है।
यह मामला सिर्फ 110 कर्मचारियों की नौकरी का नहीं, बल्कि लंबे समय तक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों के अधिकारों, भुगतान की पारदर्शिता और सेवा शर्तों से जुड़े व्यापक सवाल भी खड़े करता है। अब देखना होगा कि कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच इस विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।