Dhanbad News : धनबाद में छात्र युवा संसद: शिक्षा, रोजगार और पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा
Dhanbad News : आइसा के छात्र युवा संसद में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, भर्ती परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं और रोजगार संकट को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान
Dhanbad News : धनबाद के न्यू टाउन में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ओर से आयोजित छात्र युवा संसद में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, सरकारी शिक्षा व्यवस्था, फीस वृद्धि, रोजगार और खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य समेत कई नेता और बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
धनबाद के न्यू टाउन में सोमवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की ओर से छात्र युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्रों और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, जेएनयू की पीएचडी छात्रा और आइसा नेता दानिश अली सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए।
छात्र युवा संसद में मौजूदा छात्र आंदोलन की स्थिति, उसकी आगे की रणनीति और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़ी समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को केवल परीक्षा या भर्ती तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, सरकारी संस्थानों की स्थिति और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे हैं।
कार्यक्रम में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण है।
आइसा नेताओं का कहना था कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का असर केवल एक परीक्षा या एक बैच के छात्रों तक सीमित नहीं रहता। इससे वर्षों तक तैयारी कर रहे युवाओं के समय, मेहनत और भविष्य पर असर पड़ता है। संगठन ने ऐसे मामलों की निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच की मांग दोहराई।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को किसी एक दल या सरकार के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। जहां भी छात्रों के हित प्रभावित होंगे, वहां आंदोलन किया जाएगा।
छात्र युवा संसद को संबोधित करते हुए माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कार्यक्रम से उठे नारे “स्कूल ठीक करो, शिक्षा को सुधारो” को छात्र आंदोलन का महत्वपूर्ण संदेश बताया।
दीपांकर भट्टाचार्य ने सरकारी स्कूलों की स्थिति, शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों और युवाओं के सामने मौजूद रोजगार संकट को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार का सवाल देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है और इन मुद्दों को लेकर छात्रों और युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाया जाएगा।
उन्होंने सरकारी स्कूलों के बंद होने और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसे मजबूत करना जरूरी है।
जेएनयू की पीएचडी छात्रा और आइसा नेता दानिश अली ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी छात्र आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि इस्तीफा शिक्षा क्षेत्र में सुधार की लड़ाई का केवल एक कदम है।
दानिश अली के मुताबिक देश के अलग-अलग राज्यों और शैक्षणिक परिसरों में छात्र आज भी कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति, कॉलेजों में फंड और सीटों में कमी, फीस वृद्धि और रोजगार के सीमित अवसर जैसे मुद्दे छात्रों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि आइसा और आरवाईए की ओर से अलग-अलग राज्यों, शहरों और कैंपसों में जाकर छात्रों की समस्याओं को समझने और उन्हें आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि गरीब और पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों पर शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते खर्च और रोजगार की कमी का ज्यादा असर पड़ रहा है।
दानिश अली ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों से यह संदेश मिला है कि छात्र और युवा जब संगठित होकर अपनी मांगों को उठाते हैं तो सरकार को उनकी बात सुननी पड़ती है। उन्होंने आंदोलन को देशभर में और मजबूत करने की बात कही।
पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामलों को लेकर सीबीआई जांच की मांग का भी जिक्र हुआ। दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि छात्रों की मांग किसी एक जांच एजेंसी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरे मामले की भरोसेमंद और निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि सरकारी नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बड़ी संख्या में युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं। किसी भी कथित अनियमितता की स्थिति में छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
छात्र युवा संसद में शिक्षा और रोजगार के अलावा झारखंड के खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। दीपांकर भट्टाचार्य ने एमएमडीआर एक्ट का विरोध करते हुए इसे झारखंड के हितों के लिए नुकसानदेह बताया।
उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज संसाधनों और उनसे जुड़े अधिकारों को लेकर आंदोलन किया जाएगा। राज्य को खनिजों पर कर लगाने का अधिकार दिलाने की लड़ाई जारी रखने की बात भी उन्होंने कही।
यह मुद्दा झारखंड की अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार से जुड़ा हुआ है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राज्य के संसाधनों से मिलने वाले लाभ में स्थानीय लोगों और राज्य के हितों को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कार्यक्रम में बढ़ती महंगाई और चीनी की कीमतों का मुद्दा भी उठाया गया। दीपांकर भट्टाचार्य ने गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग से जुड़े संकट का जिक्र करते हुए आम लोगों पर बढ़ते महंगाई के बोझ को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की समस्याएं केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं हैं। महंगाई, मजदूरी और परिवारों की आर्थिक स्थिति भी युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है। इसलिए इन मुद्दों को भी आंदोलन के दायरे में शामिल किया जाएगा।
धनबाद की छात्र युवा संसद में आइसा ने संकेत दिया कि पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ उठी आवाज को अब शिक्षा, रोजगार, महंगाई और युवाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों से जोड़ा जाएगा।
संगठन की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों और शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों को जोड़ने तथा आंदोलन को मजबूत करने की बात कही गई। आने वाले दिनों में कैंपस और छात्र संगठनों के स्तर पर गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
धनबाद का यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ जब देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र और युवा परीक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं। ऐसे में छात्र युवा संसद के जरिए आइसा ने शिक्षा और रोजगार के सवाल को व्यापक आंदोलन से जोड़ने का संदेश दिया है।
हालांकि, कार्यक्रम में नेताओं की ओर से सरकार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोप संगठन के राजनीतिक दृष्टिकोण और वक्ताओं के बयानों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर संबंधित सरकारों या विभागों का पक्ष इस कार्यक्रम में सामने नहीं आया। स्वतंत्र और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।