Dhanbad News: धनबाद में उत्पाद विभाग की निगरानी पर सवाल! RPF ने ट्रेन से पकड़ी 130 लीटर बंगाल की शराब और बीयर
Dhanbad News : धनबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन संख्या 13051 के जनरल कोच से आरपीएफ की स्पेशल टास्क टीम ने छह बैग और दो थैलों में रखी शराब और बीयर की बड़ी खेप बरामद की। बोतलों और बीयर केन पर लिखा मिला ‘FOR SALE IN WB ONLY’।
Dhanbad News: धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने ट्रेन संख्या 13051 से करीब 130 लीटर शराब और बीयर बरामद की है। शराब की बोतलों और बीयर केन पर पश्चिम बंगाल में बिक्री के लिए होने का उल्लेख है। मामले के बाद धनबाद में अवैध शराब की तस्करी और उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
Dhanbad News : धनबाद में अवैध शराब की तस्करी और इसे रोकने के लिए जिम्मेदार उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस विभाग की प्रमुख जिम्मेदारी अवैध शराब की बिक्री, परिवहन और तस्करी पर नजर रखने की है, उसी के अधिकार क्षेत्र में धनबाद रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ट्रेन से करीब 130 लीटर शराब और बीयर बरामद की है।
मामला केवल शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं है। बरामद की गई शराब और बीयर की पैकिंग पर साफ तौर पर ‘FOR SALE IN WB ONLY’ यानी पश्चिम बंगाल में बिक्री के लिए लिखा हुआ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि पश्चिम बंगाल में बिक्री के लिए बनी इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर किस तरह ट्रेन के जरिए सीमा पार कर धनबाद रेलवे स्टेशन तक पहुंच गई।
इस मामले ने धनबाद में शराब तस्करी के नेटवर्क, रेलवे मार्ग के इस्तेमाल और उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, धनबाद रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ की स्पेशल टास्क टीम गश्त और निगरानी कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म संख्या-3 पर पहुंची ट्रेन संख्या 13051 के पीछे वाले जनरल कोच की जांच की गई।
जांच के दौरान आरपीएफ जवानों की नजर कोच में संदिग्ध अवस्था में पड़े छह बैग और दो थैलों पर पड़ी। सामान की स्थिति को देखते हुए टीम को संदेह हुआ कि इनमें कोई संदिग्ध वस्तु हो सकती है।
आरपीएफ जवानों ने पहले ट्रेन के जनरल कोच में मौजूद यात्रियों से पूछताछ की। जवानों ने यह जानने की कोशिश की कि बैग और थैले किसके हैं। हालांकि, कोच में मौजूद किसी भी यात्री ने इन सामानों पर अपना मालिकाना हक नहीं जताया।
किसी व्यक्ति के सामने नहीं आने के बाद आरपीएफ की टीम ने संदिग्ध सामान की जांच शुरू की। जांच के दौरान बैग और थैलों के अंदर बड़ी मात्रा में केन बीयर और अंग्रेजी शराब बरामद हुई।
ट्रेन के जनरल कोच से बरामद सामान की संख्या देखकर आरपीएफ टीम भी सतर्क हो गई। बताया गया कि ट्रेन का स्टेशन पर ठहराव सीमित था। ऐसे में आरपीएफ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी संदिग्ध बैग और थैलों को ट्रेन से उतारकर प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
इसके बाद गवाहों की मौजूदगी में सभी बैग और थैलों की जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद सामने आया कि सामान के अंदर बड़ी मात्रा में शराब और बीयर रखी हुई थी।
कुल मिलाकर करीब 130 लीटर शराब और बीयर बरामद की गई। बरामद शराब की अनुमानित कीमत करीब 38 हजार 160 रुपये बताई जा रही है।
आरपीएफ की इस कार्रवाई ने अवैध शराब की तस्करी के लिए ट्रेनों और जनरल कोच के इस्तेमाल की आशंका को भी मजबूत किया है। सामान्य यात्रियों से भरे रहने वाले जनरल कोच में बैग और थैले रखकर तस्कर अपने सामान को छिपाने की कोशिश करते हैं और कई बार सामान को लावारिस छोड़कर आगे की कार्रवाई से बचने का प्रयास करते हैं।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू बरामद शराब की पैकिंग है। शराब की बोतलों और बीयर केन पर साफ तौर पर ‘FOR SALE IN WB ONLY’ लिखा हुआ मिला है। यानी यह शराब पश्चिम बंगाल में बिक्री के लिए निर्धारित बताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि पश्चिम बंगाल के लिए बनी शराब धनबाद तक कैसे पहुंच गई?
क्या शराब की यह खेप पश्चिम बंगाल से ट्रेन में चढ़ाई गई थी? यदि ऐसा है तो इसे धनबाद पहुंचाने के लिए कौन सा रूट अपनाया गया? ट्रेन में शराब रखने वाले लोग कौन थे? क्या सामान को बीच के किसी स्टेशन पर किसी व्यक्ति द्वारा उठाया जाना था?
इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल जिस तरह से बैग और थैलों पर किसी ने दावा नहीं किया, उससे यह भी संभावना जताई जा रही है कि तस्कर आरपीएफ की गतिविधियों को देखकर सामान को लावारिस छोड़कर निकल गए हों।
इस घटना के बाद सबसे ज्यादा सवाल धनबाद उत्पाद विभाग की निगरानी और कार्रवाई को लेकर उठ रहे हैं। अवैध शराब की बिक्री और तस्करी रोकने की जिम्मेदारी उत्पाद विभाग की है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में शराब धनबाद तक पहुंच गई और उसकी बरामदगी आरपीएफ ने की।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर आरपीएफ की निगरानी में ट्रेन के जनरल कोच से करीब 130 लीटर शराब बरामद हो सकती है, तो फिर अवैध शराब की तस्करी पर नजर रखने वाले उत्पाद विभाग को इसकी कोई भनक क्यों नहीं लगी?
क्या धनबाद में रेलवे के रास्ते होने वाली शराब तस्करी को लेकर पहले से कोई खुफिया सूचना थी? क्या उत्पाद विभाग रेलवे मार्गों और संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी कर रहा है? या फिर अवैध शराब की खेप के शहर तक पहुंचने के बाद ही कार्रवाई की व्यवस्था सक्रिय होती है?
यह मामला केवल एक शराब बरामदगी का नहीं है, बल्कि अवैध शराब के पूरे नेटवर्क और विभिन्न एजेंसियों के बीच निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता से भी जुड़ा हुआ है।
ट्रेनों के जरिए अवैध सामान की तस्करी कोई नई चुनौती नहीं है। जनरल और अनारक्षित कोचों में भारी भीड़ होने के कारण कई बार संदिग्ध सामान की पहचान करना मुश्किल हो जाता है। इसी का फायदा उठाकर तस्कर शराब सहित अन्य अवैध वस्तुओं की आवाजाही का प्रयास करते हैं।
हालांकि इस मामले में आरपीएफ की स्पेशल टास्क टीम की सतर्कता से शराब की बड़ी खेप पकड़ी गई। अगर यह कार्रवाई नहीं होती तो संभव है कि शराब की यह खेप धनबाद रेलवे स्टेशन से बाहर पहुंच जाती और उसके बाद स्थानीय स्तर पर अवैध रूप से बिक्री या वितरण किया जाता।
इस बरामदगी के बाद अब रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के जरिए होने वाली संभावित शराब तस्करी पर और अधिक सख्त निगरानी की जरूरत महसूस की जा रही है।
आरपीएफ ने बरामद शराब और बीयर को जब्त कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लिखित शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
बताया जा रहा है कि जब्त शराब को आगे की कार्रवाई के लिए धनबाद उत्पाद विभाग को सौंपा जाएगा। इसके बाद उत्पाद विभाग मामले की कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक जांच आगे बढ़ा सकता है।
जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि शराब की खेप कहां से आई थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे। ट्रेन के संभावित रूट, स्टेशनों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर तस्करों तक पहुंचने का प्रयास किया जा सकता है।
इस मामले के बाद धनबाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवैध शराब के खिलाफ वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है?
एक ओर आरपीएफ ने रेलवे स्टेशन पर सतर्कता दिखाते हुए शराब की बड़ी खेप पकड़ ली। दूसरी ओर सवाल यह बना हुआ है कि जिस शराब को बरामद करने के बाद उत्पाद विभाग के हवाले किया जाना है, उस अवैध खेप को धनबाद पहुंचने से पहले ही रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसी इसे पकड़ने में क्यों सफल नहीं हो सकी?
पश्चिम बंगाल से धनबाद तक शराब की खेप का पहुंच जाना निगरानी व्यवस्था में संभावित कमजोरियों की ओर इशारा करता है। यदि तस्कर इस तरह रेलवे मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना तंत्र और नियमित जांच अभियान की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
फिलहाल आरपीएफ की कार्रवाई के बाद शराब की खेप को जब्त कर लिया गया है, लेकिन घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट होगा कि करीब 130 लीटर शराब और बीयर किसने ट्रेन में रखी, इसे किसके पास पहुंचाया जाना था और इसके पीछे कितना बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।
धनबाद में अवैध शराब की तस्करी को लेकर यह कार्रवाई एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान खींचती है कि केवल बरामदगी के बाद कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि तस्करी के स्रोत, रास्ते और नेटवर्क तक पहुंचकर उस पूरी व्यवस्था को ध्वस्त किया जाए।
फिलहाल बड़ा सवाल बरकरार है—जब अवैध शराब की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी उत्पाद विभाग की है और बरामद शराब को कार्रवाई के लिए उसी विभाग को सौंपा जाना है, तो फिर धनबाद तक पहुंच चुकी इस बड़ी खेप को पकड़ने की जिम्मेदारी आखिर किसने निभाई और उत्पाद विभाग की निगरानी व्यवस्था इससे पहले कहां थी?