Dhanbad News : बचपन को पंख दें, बाल विवाह को रोकें: निरसा के डीएवी स्कूल में जागरूकता अभियान, बच्चों ने चित्रों और विचारों से दिया सशक्त संदेश
Dhanbad News : जिला विधिक सेवा प्राधिकार धनबाद के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिता के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को उजागर किया, विजेताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
Dhanbad News : बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ समाज को जागरूक करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), धनबाद के तत्वावधान में डीएवी पब्लिक स्कूल, निरसा में एक प्रभावशाली जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश था— “बचपन को पंख दें, बाल विवाह को रोकें”। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने पेंटिंग और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने विचारों और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों को सामने रखा।
कार्यक्रम में बच्चों, शिक्षकों और विधिक सेवा प्राधिकार के प्रतिनिधियों ने यह संकल्प लिया कि वे न केवल स्वयं बाल विवाह के प्रति जागरूक रहेंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज में भी इसके खिलाफ आवाज़ बुलंद करेंगे।
बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन: अजय कुमार भट्ट
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एलएडीसीएस (LADCS) के डेप्युटी चीफ अजय कुमार भट्ट ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वतंत्र विकास और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार पर सीधा आघात करता है।
उन्होंने कहा कि जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिलना चाहिए, उसी उम्र में विवाह का दायित्व सौंप देना उनके भविष्य के साथ अन्याय है।
“बच्चों के हाथों में किताबें और सपनों की उड़ान होनी चाहिए, विवाह का बोझ नहीं।”
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो वे चुप न रहें, बल्कि अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी सूचना दें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार का उद्देश्य
अजय कुमार भट्ट ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार धनबाद का उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके अंतर्गत लोगों को निःशुल्क विधिक सहायता, कानूनी परामर्श और विभिन्न सामाजिक विषयों पर विधिक जागरूकता प्रदान की जाती है।
उन्होंने कहा कि कानून तभी प्रभावी होगा जब समाज स्वयं जागरूक होगा। इसलिए बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
उनके अनुसार बाल विवाह रोकना केवल प्रशासन या न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक नागरिक जागरूक होकर आगे आए, तो इस कुरीति को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
शिक्षा ही बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर
विद्यालय की प्राचार्य डॉ. झूमा माहाता ने अपने संबोधन में कहा कि बाल विवाह बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के मार्ग में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सशक्त बनाती है।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षित बच्चा न केवल अपना भविष्य बदल सकता है, बल्कि पूरे परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
“बच्चों का बचपन सुरक्षित होगा, तभी समाज और देश का भविष्य सुरक्षित होगा।”
प्राचार्य ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास होने वाली सामाजिक कुरीतियों के प्रति संवेदनशील बनें और जागरूक नागरिक की भूमिका निभाएं।
पेंटिंग और वाद-विवाद में बच्चों ने दिखाई रचनात्मक सोच
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक हिस्सा विद्यार्थियों के बीच आयोजित पेंटिंग एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता रही। प्रतियोगिता में बच्चों ने बाल विवाह के दुष्परिणाम, बालिका शिक्षा, समान अधिकार और सुरक्षित बचपन जैसे विषयों पर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
रंगों और शब्दों के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि हर बच्चे को खेलने, पढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का अधिकार है। कई चित्रों में बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बाल विवाह से होने वाले मानसिक एवं शारीरिक नुकसान को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने तर्कपूर्ण ढंग से यह बताया कि बाल विवाह गरीबी, अशिक्षा और लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है तथा समाज के समग्र विकास में बाधा बनता है।
विजेता विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
प्रथम स्थान
- विनायक मल्लिक
- देव भण्डारी
- पल्लवी प्रिया
- परी तिवारी
द्वितीय स्थान
- दिव्या सोनकर
- रोशनी कुमारी
- बार्नीक माझी
तृतीय स्थान
- खुशी कुमारी साव
- अंकुश दास
- राय कर्मकार
- देव कर
चतुर्थ स्थान
- अमित कुमार
सम्मान समारोह के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। शिक्षकों ने भी सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए उन्हें सामाजिक मुद्दों पर अपनी सकारात्मक सोच बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।
पैरालीगल वॉलंटियर्स की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में पैरालीगल वॉलंटियर पंकज कुमार वर्मा और फूल चंद महतो सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पैरालीगल वॉलंटियर्स ने विद्यार्थियों को बाल विवाह निषेध कानून, बाल अधिकार, शिक्षा का अधिकार तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार के अन्याय या शोषण की स्थिति में जिला विधिक सेवा प्राधिकार जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए सदैव उपलब्ध है।
क्यों जरूरी है बाल विवाह रोकना?
भारत में बाल विवाह पर कानूनी प्रतिबंध होने के बावजूद कई क्षेत्रों में यह समस्या अब भी मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार बाल विवाह के कारण—
- बच्चों की शिक्षा बीच में छूट जाती है।
- किशोरियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
- मातृ एवं शिशु मृत्यु दर का खतरा बढ़ता है।
- आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाएं कम हो जाती हैं।
- लैंगिक समानता और सामाजिक विकास प्रभावित होता है।
ऐसे में विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम बच्चों और अभिभावकों दोनों को सही दिशा देने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
सामूहिक संकल्प से बदलेगा समाज
निरसा के डीएवी स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक प्रेरक पहल साबित हुआ। बच्चों ने अपने चित्रों, तर्कों और संदेशों के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि उनका बचपन सपनों, शिक्षा और अवसरों के लिए है, न कि विवाह जैसी जिम्मेदारियों के लिए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार और विद्यालय प्रशासन ने अंत में सभी विद्यार्थियों को यह संकल्प दिलाया—
“न बाल विवाह करेंगे, न होने देंगे और न ही उसके प्रति मौन रहेंगे।”
यह संदेश केवल विद्यार्थियों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है कि हर बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित और सम्मानजनक बचपन मिलना चाहिए।