Dhanbad News : 5 साल काम के बाद नौकरी से निकाला, अब हक के लिए धरने पर मजदूर; भाकपा माले ने दहीबाड़ी कोल वाशरी के खिलाफ खोला मोर्चा
Dhanbad News : जिस मजदूर ने अपनी जिंदगी के अनमोल साल खून-पसीना बहाकर किसी कंपनी को दिए, अगर उसी मजदूर को वर्षों की सेवा के बाद बिना उचित कारण नौकरी से बाहर कर दिया जाए, तो उसके सामने सिर्फ बेरोजगारी का संकट नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी सवाल खड़ा हो जाता है।
Dhanbad News : ऐसा ही मामला निरसा के दहीबाड़ी कोल वाशरी से सामने आया है। यहां उमेश चौहान नामक मजदूर का दावा है कि उन्होंने वर्ष 2015 से 2019 तक वाशरी में ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम किया, लेकिन इसके बाद उन्हें बिना उचित कारण नौकरी से हटा दिया गया।
उमेश चौहान का आरोप है कि उनके पास आरके कंस्ट्रक्शन से संबंधित बैंक खाता, पहचान पत्र समेत काम से जुड़े कई दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि नौकरी के दौरान उनसे कथित तौर पर पैसों की मांग की गई, जिसे पूरा नहीं कर पाने के बाद उन्हें काम से बाहर कर दिया गया।
उमेश का आरोप है कि वर्षों का अनुभव होने के बावजूद आज भी बाहरी मजदूरों को काम पर रखा जा रहा है। नौकरी वापस पाने और अपने अधिकार के लिए उन्होंने कई वर्षों तक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए। अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई, लेकिन उनके अनुसार हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।
नौकरी छूटने के बाद आर्थिक तंगी ने परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। उमेश का कहना है कि आर्थिक संकट के बीच उनकी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हो गईं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई। अब उनके सामने पत्नी का इलाज कराने और परिवार का पेट पालने के बीच बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
व्यवस्था से न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए उमेश चौहान अब धरने पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण धरने का यह तीसरा दिन है। अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।
इधर, भाकपा माले और मजदूर संगठन के नेताओं ने भी दहीबाड़ी कोल वाशरी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेताओं का आरोप है कि वाशरी में मजदूरों का लगातार शोषण हो रहा है। उनका दावा है कि जहां करीब 250 मजदूरों की आवश्यकता है, वहां लगभग 130 मजदूरों से ही काम लिया जा रहा है।
माले नेताओं के मुताबिक, वाशरी में बड़े पैमाने पर पेटी कॉन्ट्रैक्टर के माध्यम से काम कराया जा रहा है, जिसके कारण मजदूरों को पीएफ, ईएसआई समेत कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
नेताओं ने वाशरी की पर्यावरणीय स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इसे इको-फ्रेंडली वाशरी के रूप में बताया गया था, लेकिन अब यहां से उड़ने वाली धूल के कारण आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा बंद पड़ी मशीनों की मरम्मत के नाम पर भी प्रबंधन पर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।
भाकपा माले नेताओं ने दहीबाड़ी कोल वाशरी के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर वाशरी के कामकाज और मजदूरों से जुड़े मामलों की उचित जांच हुई, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक मजदूर की नौकरी का नहीं, बल्कि मजदूरों के अधिकार, रोजगार की सुरक्षा और उनके परिवार के भविष्य से जुड़ा सवाल बन गया है। एक तरफ उमेश चौहान न्याय और रोजगार की मांग को लेकर धरने पर हैं, तो दूसरी ओर भाकपा माले ने भी उनके समर्थन में प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
अब देखना होगा कि प्रबंधन और संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या उमेश चौहान को उनका रोजगार वापस मिल पाता है या उनका आंदोलन आगे चलकर भूख हड़ताल का रूप लेता है। उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होंगे।