Dhanbad News: UGC कानून के विरोध में स्वर्ण समाज का विरोध मार्च, ‘UGC रोल बैक’ की उठी मांग
Dhanbad News : जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक सैकड़ों लोगों ने निकाला पैदल मार्च, केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
Dhanbad News : धनबाद में UGC इक्विटी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज के लोगों ने जिला परिषद मैदान से रणधीर वर्मा चौक तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने ‘UGC रोल बैक’ की मांग करते हुए कानून पर पुनर्विचार की अपील की।
Dhanbad News : UGC इक्विटी कानून के विरोध में धनबाद में स्वर्ण समाज के लोगों ने जोरदार विरोध मार्च निकाला। जिला परिषद मैदान से शुरू हुआ यह पैदल मार्च शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रणधीर वर्मा चौक तक पहुंचा। मार्च में सैकड़ों की संख्या में स्वर्ण समाज के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘UGC रोल बैक’ लिखे तख्ते और बैनर थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और UGC कानून को वापस लेने की मांग उठाई गई।
इस विरोध मार्च का नेतृत्व राजपूत विचार मंच के अध्यक्ष अरुण सिंह ने किया। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि केंद्र सरकार की ओर से लाया गया UGC इक्विटी कानून समाज में जातिगत विभाजन और आपसी मनमुटाव को बढ़ावा दे सकता है। इसी आशंका को लेकर स्वर्ण समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
धनबाद के जिला परिषद मैदान में स्वर्ण समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। इसके बाद विरोध मार्च शुरू किया गया। प्रदर्शनकारी हाथों में विभिन्न संदेश लिखे तख्ते लेकर आगे बढ़े। कई तख्तियों पर स्पष्ट रूप से ‘UGC रोल बैक’ लिखा हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस कानून को वापस लेने और इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
मार्च के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने ‘मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी’ समेत कई नारे लगाए। विरोध मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि उनकी मांग किसी वर्ग के अधिकारों के खिलाफ नहीं है, बल्कि वे ऐसे किसी भी कानून का विरोध कर रहे हैं, जो उनके अनुसार समाज में जाति के आधार पर भेदभाव और विभाजन की स्थिति पैदा कर सकता है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने केंद्र सरकार से UGC इक्विटी कानून को ‘रोल बैक’ करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कानून बनाते समय समाज के सभी वर्गों की भावनाओं और चिंताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति या कानून का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द और एकता को मजबूत करना होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे देश में शिक्षा और समाज के सभी वर्गों के विकास के पक्षधर हैं, लेकिन UGC कानून को लेकर उनके मन में कई आशंकाएं हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि कानून के विभिन्न प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जाए और सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाए।
विरोध मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से धनबाद में पैदल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजपूत विचार मंच के अध्यक्ष अरुण सिंह ने कहा कि स्वर्ण समाज आरक्षण का विरोध नहीं करता है। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से इसकी जरूरत है। उनके अनुसार, आरक्षण का आधार जाति के बजाय आर्थिक स्थिति को भी प्राथमिकता देते हुए जरूरतमंद लोगों तक लाभ पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
अरुण सिंह ने कहा कि समाज के लोगों को जातिगत पहचान से ऊपर उठकर एक भारतीय के रूप में देश के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की मजबूती और प्रगति तभी संभव है, जब सभी नागरिक एकजुट होकर विकास के लिए काम करें।
उन्होंने UGC कानून को लेकर भी सरकार से पुनर्विचार करने की मांग की। उनका कहना था कि किसी भी कानून को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए। समाज में आपसी भाईचारा और सद्भाव बना रहना सबसे जरूरी है।
विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों ने आशंका जताई कि UGC इक्विटी कानून से समाज में जातिगत आधार पर विभाजन और मनमुटाव बढ़ सकता है। उनका कहना था कि देश की सामाजिक एकता को मजबूत करने के बजाय ऐसी किसी भी व्यवस्था से बचना चाहिए, जिससे लोगों के बीच दूरी बढ़ने की आशंका हो।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यहां सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से ऐसा कानून और व्यवस्था बनाने की मांग की, जिससे सभी नागरिकों को समान अवसर मिल सकें और समाज में किसी भी प्रकार की नई खाई पैदा न हो।
मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि वे किसी समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध केवल UGC कानून को लेकर है और वे चाहते हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुने।
विरोध मार्च में शामिल निहारिका सिंह ने भी UGC कानून को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि कानून के प्रावधानों को लेकर सरकार को दोबारा विचार करना चाहिए। उनका कहना था कि समाज के अलग-अलग वर्गों की बात सुनने के बाद ही किसी महत्वपूर्ण निर्णय पर आगे बढ़ना उचित होगा।
निहारिका सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है। इसी अधिकार के तहत धनबाद में स्वर्ण समाज के लोगों ने विरोध मार्च निकालकर अपनी मांग रखी है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि UGC कानून को लेकर उठ रही आपत्तियों और सवालों पर ध्यान दिया जाए तथा जरूरत पड़ने पर कानून की समीक्षा की जाए।
जिला परिषद मैदान से शुरू हुआ विरोध मार्च अंततः रणधीर वर्मा चौक तक पहुंचा। पूरे मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी अनुशासन के साथ पैदल चलते रहे और हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांग को सार्वजनिक करते रहे। रणधीर वर्मा चौक पहुंचने के बाद भी UGC कानून को वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की गई।
विरोध मार्च के कारण शहर के कई इलाकों में राजनीतिक और सामाजिक माहौल गर्म नजर आया। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि UGC इक्विटी कानून को लेकर स्वर्ण समाज के बीच गंभीर चिंता और असहमति मौजूद है।
धनबाद में निकाले गए इस विरोध मार्च के माध्यम से स्वर्ण समाज के लोगों ने केंद्र सरकार तक स्पष्ट संदेश पहुंचाने की कोशिश की कि UGC कानून पर पुनर्विचार किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने ‘UGC रोल बैक’ की मांग करते हुए कहा कि कानून को लेकर व्यापक चर्चा और संवाद की जरूरत है।
राजपूत विचार मंच के नेतृत्व में निकाले गए इस विरोध मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि उनका उद्देश्य समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखना है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उनकी बात सुनी जाए और UGC कानून के उन पहलुओं की समीक्षा की जाए, जिनको लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच आपत्ति और चिंता व्यक्त की जा रही है।
धनबाद में स्वर्ण समाज के इस विरोध मार्च ने UGC कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रदर्शनकारियों की ‘UGC रोल बैक’ की मांग पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।