Dhanbad News : झरिया मास्टर प्लान की हकीकत परखने धनबाद पहुंचे पीएम के सलाहकार तरुण कपूर
Dhanbad News : झरिया मास्टर प्लान की हकीकत परखने धनबाद पहुंचे पीएम के सलाहकार तरुण कपूर, बेलगड़िया में विस्थापितों से किया सीधा संवाद
Dhanbad News : प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने धनबाद में झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वास कार्यों और बेलगड़िया की जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया। विस्थापित परिवारों से सीधा संवाद कर उन्होंने मुआवजा, आवास, बिजली-पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्याएं सुनीं।
Dhanbad News : धनबाद जिले में झरिया मास्टर प्लान के तहत चल रहे पुनर्वास कार्यों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर मंगलवार को धनबाद पहुंचे। उनके दौरे का मुख्य उद्देश्य झरिया के अग्नि प्रभावित और असुरक्षित क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की प्रगति तथा बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी में उपलब्ध सुविधाओं की जमीनी हकीकत को समझना था। इस दौरान उन्होंने करमाटांड़ और बेलगड़िया फेस-5 स्थित पुनर्वास स्थल का निरीक्षण किया तथा वहां रहने वाले विस्थापित परिवारों और रैयतों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
तरुण कपूर के दौरे को झरिया मास्टर प्लान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि झरिया के कई इलाकों में लंबे समय से भूमिगत आग, जमीन धंसने और असुरक्षित वातावरण की समस्या बनी हुई है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए पुनर्वास योजना पर काम किया जा रहा है। हालांकि, विस्थापितों का कहना है कि केवल मकान उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नए पुनर्वास स्थल पर बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं का बेहतर प्रबंध होना भी जरूरी है।
बेलगड़िया पहुंचने पर अधिकारियों ने किया स्वागत
बेलगड़िया पहुंचने पर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर का स्वागत धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन, एसएसपी प्रभात कुमार और बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल समेत अन्य अधिकारियों ने किया। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों के साथ पुनर्वास स्थल का भ्रमण किया और कॉलोनी की सड़क, आवास, बुनियादी ढांचे तथा अन्य सुविधाओं का जायजा लिया।
दौरे के दौरान अधिकारियों ने झरिया मास्टर प्लान के तहत चल रहे पुनर्वास कार्यों की जानकारी भी दी। तरुण कपूर ने विभिन्न पहलुओं को समझने के साथ यह जानने की कोशिश की कि पुनर्वास के बाद विस्थापित परिवारों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और आने वाले समय में पुनर्वास की प्रक्रिया को किस प्रकार अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
विस्थापित परिवारों से सीधे सुनी समस्याएं
बेलगड़िया में आयोजित जनसंवाद के दौरान बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों और रैयतों ने प्रधानमंत्री के सलाहकार के सामने अपनी समस्याएं रखीं। लोगों ने जमीन के बदले उचित मुआवजा, बेहतर और सुरक्षित आवास, जर्जर मकानों की मरम्मत, निर्बाध बिजली और पेयजल आपूर्ति जैसी मांगें उठाईं।
इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, बेहतर स्कूल, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। लोगों का कहना था कि पुनर्वास के बाद उनकी जिंदगी केवल रहने के नए स्थान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें आजीविका के बेहतर अवसर भी मिलने चाहिए।
जनसंवाद के दौरान रैयतों ने तरुण कपूर को मांग पत्र भी सौंपा। मांग पत्र में जमीन अधिग्रहण से संबंधित उचित मुआवजा, पुनर्वास कॉलोनी की सुविधाओं में सुधार, आवास की मरम्मत और रोजगार की व्यवस्था जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल थे।
“बेलगड़िया ऐसी कॉलोनी बने, जहां लोग खुद रहना चाहें”
मीडिया से बातचीत के दौरान तरुण कपूर ने कहा कि उनके धनबाद दौरे का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि पुनर्वासित परिवार वास्तव में किन सुविधाओं की जरूरत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह देखना जरूरी है कि जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया गया है, वहां की कॉलोनी उनकी जरूरतों के अनुरूप है या नहीं।
उन्होंने कहा कि बेलगड़िया को एक ऐसी बेहतर और सुविधाजनक कॉलोनी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जहां लोग खुद रहना पसंद करें। उनका कहना था कि पुनर्वास की सफलता तभी मानी जाएगी, जब लोगों को नए स्थान पर सुरक्षा के साथ बेहतर जीवन की सुविधा मिले।
तरुण कपूर ने कहा कि झरिया मास्टर प्लान के तहत पुनर्वास की प्रक्रिया को केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रखा जा सकता। एक सफल पुनर्वास कॉलोनी के लिए सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं का एक साथ विकास जरूरी है।
अग्नि प्रभावित इलाकों में अब भी रह रहे हैं बड़ी संख्या में लोग
प्रधानमंत्री के सलाहकार ने माना कि झरिया के अग्नि प्रभावित और असुरक्षित क्षेत्रों में अब भी बड़ी संख्या में लोग निवास कर रहे हैं। भूमिगत आग और भू-धंसान की समस्या वाले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता है। साथ ही, नए पुनर्वास स्थल पर लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि विस्थापित परिवारों को सुरक्षित आवास के साथ रोजगार और बेहतर सामाजिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, तो पुनर्वास प्रक्रिया अधिक प्रभावी और स्वीकार्य होगी।
झरिया के अग्नि प्रभावित क्षेत्रों की समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। कई इलाकों में जमीन धंसने का खतरा है और कुछ क्षेत्रों में भूमिगत आग के कारण लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। ऐसे में झरिया मास्टर प्लान के तहत सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।
सड़क, आवास, स्कूल और अस्पताल की व्यवस्था बेहतर करने पर जोर
तरुण कपूर ने पुनर्वास कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क और आवास की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं भी पर्याप्त होनी चाहिए। पुनर्वासित परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर न रहना पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाओं का विकास आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्वास का अर्थ केवल एक जगह से दूसरी जगह लोगों को भेज देना नहीं है। पुनर्वास का वास्तविक उद्देश्य विस्थापित परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देना होना चाहिए। इसके लिए आजीविका, शिक्षा और स्वास्थ्य को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना होगा।
रोजगार के लिए केवल टेक्सटाइल पर निर्भर नहीं रहेगा प्रशासनिक प्रयास
विस्थापित परिवारों के सामने रोजगार एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया। इस मुद्दे पर तरुण कपूर ने कहा कि टेक्सटाइल क्षेत्र में प्रशिक्षण और रोजगार की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। युवाओं और अन्य लोगों को कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रोजगार के लिए केवल टेक्सटाइल क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। स्थानीय जरूरत, क्षेत्र की क्षमता और रोजगार की संभावनाओं के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी अवसर तलाशे जाएंगे।
उन्होंने कहा कि पुनर्वासित परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना आवश्यक है। यदि लोगों को नए स्थान पर आवास तो मिल जाए, लेकिन रोजगार के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़े, तो पुनर्वास का उद्देश्य अधूरा रह सकता है। इसलिए पुनर्वास योजना में आजीविका और कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आरएसपी कॉलेज के स्थायीकरण का मुद्दा भी उठा
जनसंवाद के दौरान आरएसपी कॉलेज के स्थायीकरण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। स्थानीय लोगों ने शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की मांग की। विस्थापित परिवारों का कहना था कि नए पुनर्वास क्षेत्रों में बच्चों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण और स्थायी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।
इसके अलावा लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की मांग भी रखी। उनका कहना था कि बड़ी आबादी को देखते हुए पुनर्वास कॉलोनी में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत है।
जमीनी हकीकत से तय होगी आगे की दिशा
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर का धनबाद दौरा झरिया मास्टर प्लान की जमीनी स्थिति को समझने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। अधिकारियों के साथ बैठक और निरीक्षण के अलावा विस्थापितों से सीधा संवाद इस बात का संकेत है कि पुनर्वास योजना को लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।
झरिया के असुरक्षित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के साथ बेलगड़िया जैसी पुनर्वास कॉलोनियों में सुविधाओं को मजबूत करना अब बड़ी चुनौती है। विस्थापितों ने मुआवजा, आवास, बिजली-पानी और रोजगार जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रधानमंत्री के सलाहकार के इस दौरे के बाद झरिया मास्टर प्लान और बेलगड़िया पुनर्वास कॉलोनी की समस्याओं के समाधान के लिए किस स्तर पर आगे की कार्रवाई होती है। फिलहाल इतना तय है कि झरिया के अग्नि प्रभावित इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास केवल मकान उपलब्ध कराने का विषय नहीं है, बल्कि बेहतर जीवन, मजबूत बुनियादी सुविधाओं और स्थायी रोजगार से जुड़ा बड़ा सवाल है।