Dhanbad News : झरिया में पानी के लिए हाहाकार: एक महीने से पेयजल संकट, भूख हड़ताल पर बैठे लोग, सड़क जाम की चेतावनी
Dhanbad News : झरिया में पिछले एक महीने से जारी पेयजल संकट के विरोध में लोगों ने झमाडा कार्यालय के सामने भूख हड़ताल की। प्रदर्शनकारियों ने जलापूर्ति बहाल करने, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था करने और स्थायी समाधान की मांग की। चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सड़क जाम कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
Dhanbad News : झारखंड के धनबाद जिले के झरिया कोयलांचल में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। बारिश के मौसम में जहां अधिकांश क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बनी हुई है, वहीं झरिया और आसपास के लाखों लोग पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। पिछले करीब एक महीने से नियमित जलापूर्ति बाधित रहने के कारण लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों को पीने का पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है, जबकि कई परिवार बारिश के पानी को इकट्ठा कर घरेलू उपयोग के लिए मजबूर हैं।
इस गंभीर संकट के विरोध में गुरुवार को पानी-बिजली उपभोक्ता मंच के बैनर तले झरिया स्थित झमाडा (झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकरण) कार्यालय के सामने एक दिवसीय भूख हड़ताल आयोजित की गई। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि झरिया और आसपास के लगभग छह से सात लाख लोग इस जल संकट से प्रभावित हैं। दामोदर नदी से झमाडा के माध्यम से होने वाली पेयजल आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है। इसके पीछे मुख्य कारण पाइपलाइन का बार-बार फटना, मोटर खराब होना और बिजली आपूर्ति में व्यवधान बताया जा रहा है। लगातार तकनीकी खराबियों के कारण नियमित जलापूर्ति संभव नहीं हो पा रही है और इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
भूख हड़ताल में शामिल लोगों ने बताया कि कई मोहल्लों में कई दिनों से पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची है। पानी की कमी के कारण लोगों को रोजमर्रा के काम करने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक दिक्कत महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। कई परिवारों में खाना बनाने तक की समस्या खड़ी हो गई है क्योंकि पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति बेहतर है, वे निजी टैंकरों या बाजार से पानी खरीद रहे हैं। वहीं गरीब और मध्यम वर्ग के लोग बारिश के पानी को संग्रहित कर किसी तरह अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। हालांकि पीने के लिए बारिश का पानी सुरक्षित नहीं माना जाता, लेकिन मजबूरी में लोग इसी का सहारा लेने को विवश हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में झमाडा प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली बेहद लापरवाह रही है। उनका कहना है कि बार-बार शिकायत करने और अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। कई बार जलापूर्ति बहाल होने की घोषणा की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर वही स्थिति बन गई।
भूख हड़ताल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की कि पेयजल संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि हर बार पाइपलाइन टूटने या मोटर खराब होने जैसी समस्याओं के कारण लाखों लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में बार-बार जलापूर्ति बाधित न हो।
आंदोलन में शामिल लोगों ने यह भी मांग की कि जब तक नियमित जलापूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित इलाकों में टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि संकट के समय प्रशासन की ओर से पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही जलापूर्ति सामान्य नहीं हुई और प्रशासन ने उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सड़क जाम कर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि झरिया जैसे घनी आबादी वाले औद्योगिक क्षेत्र में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा का लंबे समय तक प्रभावित रहना गंभीर चिंता का विषय है। लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती आबादी और पुराने हो चुके जलापूर्ति ढांचे के कारण यह समस्या हर साल सामने आती है, लेकिन अब तक कोई स्थायी योजना लागू नहीं हो सकी है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि बार-बार पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और तकनीकी खराबियों से बचने के लिए जलापूर्ति प्रणाली का आधुनिकीकरण आवश्यक है। यदि समय रहते पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत किया जाए, मोटरों का नियमित रखरखाव हो और बिजली आपूर्ति निर्बाध रहे, तो इस तरह की समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
फिलहाल झरिया के लाखों लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही नियमित जलापूर्ति बहाल होगी और उन्हें इस लंबे पेयजल संकट से राहत मिलेगी। वहीं भूख हड़ताल के जरिए लोगों ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं।