World Tribal Day पर धनबाद में जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव, 15 भूमिहीन परिवारों को वन पट्टा
World Tribal Day पर धनबाद में जिला स्तरीय महोत्सव: 500 आदिवासी छात्रों को मिली साइकिल, 15 परिवारों को वन पट्टा, प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
World Tribal Day के अवसर पर धनबाद के न्यू टाउन हॉल में आयोजित जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव में 500 आदिवासी छात्र-छात्राओं को साइकिल, 15 भूमिहीन परिवारों को वन पट्टा वितरित किया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया, वहीं निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने प्रशासन की कार्यशैली और लंबित सामाजिक पेंशन के मुद्दे को लेकर सवाल भी उठाए।
World Tribal Day के अवसर पर रविवार को धनबाद के न्यू टाउन हॉल में जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखंडों और ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए। पूरे आयोजन के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा, लोक कला और सामाजिक विरासत की झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और पारंपरिक नृत्य ने कार्यक्रम को आकर्षक बना दिया।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण आदिवासी समाज के कल्याण से जुड़ी योजनाओं का लाभार्थियों तक पहुंचाना रहा। जिला प्रशासन की ओर से 15 भूमिहीन आदिवासी परिवारों के बीच वन पट्टा का वितरण किया गया। इससे इन परिवारों को वन अधिकारों के तहत कानूनी मान्यता मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही 500 आदिवासी छात्र-छात्राओं को साइकिल वितरित की गई, ताकि दूरदराज के गांवों से स्कूल आने-जाने में उन्हें सुविधा मिल सके और शिक्षा के रास्ते में दूरी बाधा न बने।
कार्यक्रम में शिक्षा, खेल, कला और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित भी किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर उनकी उपलब्धियों की सराहना की गई। आयोजकों का कहना था कि ऐसे सम्मान से बच्चों का मनोबल बढ़ता है और अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिलती है।
न्यू टाउन हॉल में आयोजित इस जिला स्तरीय समारोह में धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन, धनबाद विधायक राज सिन्हा, टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो, जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह, मेयर संजीव सिंह और निरसा विधायक अरूप चटर्जी सहित कई जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ढोल, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर प्रस्तुत नृत्य ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति और प्रकृति से जुड़े जीवन दर्शन को भी दर्शाया।
धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पूरे देश की धरोहर है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी युवाओं को शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना समय की आवश्यकता है।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक रंग भी देखने को मिला। निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने मंच से जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ओर प्रशासन आदिवासी विकास की बातें कर रहा है, जबकि दूसरी ओर उनके अनुसार मांझी हड़ाम और बूढ़ा बाबा सामाजिक पेंशन की फाइलें पिछले आठ महीने से उपायुक्त के हस्ताक्षर के इंतजार में लंबित हैं। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने और पात्र लाभुकों को जल्द पेंशन उपलब्ध कराने की मांग की। विधायक के इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा भी होती रही।
धनबाद विधायक राज सिन्हा ने भी अपने संबोधन में आदिवासी समाज के विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार और प्रशासन से आग्रह किया कि आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाओं को धरातल पर पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जाए ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर लाभ मिल सके।
साइकिल प्राप्त करने वाली छात्राओं ने भी अपनी खुशी व्यक्त की। छात्रा स्नेहा कुमारी ने कहा कि साइकिल मिलने से अब स्कूल आने-जाने में काफी सुविधा होगी। उन्होंने बताया कि दूरदराज के गांवों से प्रतिदिन पैदल स्कूल पहुंचना कठिन होता था, लेकिन अब पढ़ाई जारी रखने में आसानी होगी। कई अन्य विद्यार्थियों ने भी जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस पहल से शिक्षा के प्रति उनका उत्साह और बढ़ेगा।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से आदिवासी समाज के विकास, शिक्षा और सामाजिक अधिकारों को भी प्रमुखता से सामने लाया गया। वन पट्टा वितरण, साइकिल वितरण और मेधावी छात्रों के सम्मान जैसे कार्यक्रमों ने समाज के विकास का सकारात्मक संदेश दिया। वहीं, मंच से उठे सामाजिक पेंशन और प्रशासनिक कार्यशैली से जुड़े सवालों ने यह भी संकेत दिया कि विकास योजनाओं के साथ-साथ लंबित समस्याओं के समाधान पर भी गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
कुल मिलाकर धनबाद में आयोजित जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव ने एक ओर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सम्मान दिया, तो दूसरी ओर शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। सांस्कृतिक उत्सव, कल्याणकारी योजनाओं का वितरण और जनप्रतिनिधियों के विचारों ने इस आयोजन को सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया।