Dhanbad News : टुंडी के माधो जोड़ा में गूंजी मांदर की थाप, पारंपरिक अंदाज में मना विश्व आदिवासी दिवस
Dhanbad News : धनबाद के टुंडी प्रखंड के माधो जोड़ा गांव में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में विधायक मथुरा प्रसाद महतो और डीडीसी सन्नी राज ने हिस्सा लेकर ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया। इस दौरान हाथियों के आतंक, शिक्षकों की कमी और ग्रामीण विकास जैसे अहम मुद्दे भी उठाए गए।
Dhanbad News : धनबाद जिले के टुंडी प्रखंड स्थित सुदूरवर्ती माधो जोड़ा गांव में रविवार को विश्व आदिवासी दिवस पूरे उत्साह, परंपरा और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। मनियाडीह थाना क्षेत्र के जीतपुर पंचायत अंतर्गत पहाड़ी तलहटी में बसे इस गांव में आयोजित कार्यक्रम ने आदिवासी संस्कृति की समृद्ध विरासत के साथ-साथ ग्रामीण विकास की नई उम्मीद भी जगाई। कार्यक्रम में टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो और धनबाद के उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सन्नी राज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। मांदर की थाप, पारंपरिक नृत्य और लोकगीतों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक परिधानों में अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। महिलाओं को साड़ी और पुरुषों को धोती भेंट कर सम्मानित किया गया। पूरे आयोजन में आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और पारंपरिक जीवन शैली की सुंदर झलक देखने को मिली।
अपने संबोधन में टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि झारखंड आदिवासी बहुल राज्य है और राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने ग्रामीणों से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का प्रयास है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे।
विधायक ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति और परंपरा को वर्षों से जीवित रखा है। यह विरासत पूरे झारखंड की पहचान है और इसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस को समाज की अस्मिता, संस्कृति और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में मौजूद धनबाद के उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन सुदूरवर्ती गांवों तक विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी वर्षों पुरानी समस्याएं खुलकर रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों ने कहा कि शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनके भविष्य पर असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने विद्यालय में जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।
कार्यक्रम में सबसे प्रमुख मुद्दा जंगली हाथियों के आतंक का भी रहा। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से हाथियों का झुंड गांव और आसपास के क्षेत्रों में लगातार पहुंच रहा है। इससे फसलों के साथ-साथ कई मकान भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। हाथियों के डर से ग्रामीणों को रातभर जागकर पहरा देना पड़ता है और हमेशा भय का माहौल बना रहता है। कई परिवारों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है।
ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए डीडीसी सन्नी राज ने संबंधित अधिकारियों को स्थिति की जानकारी लेने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान हाथियों के कारण क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी रिपोर्ट तैयार कर नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही वन विभाग और जिला प्रशासन के समन्वय से हाथियों के आतंक को कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जीतपुर पंचायत के मुखिया इंद्रलाल बास्की ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लोग लंबे समय से कई मूलभूत समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और वन्यजीवों से सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी से गांव की समस्याओं का समाधान जल्द निकलेगा।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। पात्र लाभुकों को योजनाओं से जोड़ने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने और ग्रामीण विकास से संबंधित कई पहल की जानकारी साझा की गई। इससे ग्रामीणों में सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ी और लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याएं और सुझाव भी रखे।
विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन ने केवल सांस्कृतिक परंपराओं को ही नहीं, बल्कि विकास और जनभागीदारी को भी नई दिशा देने का प्रयास किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान लोक संस्कृति, सामुदायिक एकता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का अनूठा संगम देखने को मिला।
माधो जोड़ा जैसे सुदूरवर्ती गांव में आयोजित इस कार्यक्रम ने ग्रामीणों के भीतर नई उम्मीद जगाई है। लोगों को विश्वास है कि जिन समस्याओं को उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखा है, उनका समाधान अब प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। विशेष रूप से हाथियों के आतंक से राहत, विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर ग्रामीणों की अपेक्षाएं बढ़ी हैं।
विश्व आदिवासी दिवस के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और स्थानीय समुदाय एक मंच पर आकर संवाद करते हैं, तो विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव की संभावना और अधिक मजबूत हो जाती है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर टिकी है कि कार्यक्रम के दौरान किए गए आश्वासन और घोषणाएं कितनी जल्दी धरातल पर उतरती हैं।