Dhanbad News : चिरकुंडा में साइबर अपराध से बचाव पर जागरूकता सेमिनार, छात्रों को दी गई ऑनलाइन सुरक्षा की अहम सीख
Dhanbad News : निरसा के अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर में पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने कक्षा 8वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को साइबर ठगी, OTP फ्रॉड, CEIR पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन की जानकारी दी
Dhanbad News : धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल अंतर्गत चिरकुंडा में साइबर अपराध से बचाव को लेकर जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों और साइबर विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी से बचने, मजबूत पासवर्ड बनाने, मास्क्ड आधार के उपयोग, CEIR पोर्टल और 1930 साइबर हेल्पलाइन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल स्थित अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर, नीचे बाजार चिरकुंडा में मंगलवार को साइबर अपराध से बचाव को लेकर एक व्यापक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। चिरकुंडा पुलिस की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में कक्षा आठवीं से 12वीं तक के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर डिजिटल सुरक्षा और साइबर ठगी से बचने के महत्वपूर्ण उपाय सीखे।
आज के दौर में जहां शिक्षा, बैंकिंग, खरीदारी और सामाजिक संवाद तेजी से ऑनलाइन हो रहे हैं, वहीं साइबर अपराध भी नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसी चुनौती को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विद्यार्थियों को समय रहते जागरूक करने का अभियान शुरू किया है, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और अपने परिवार को भी साइबर अपराध से बचा सकें।
सेमिनार का शुभारंभ एसडीपीओ निरसा लीलेश्वर महतो, चिरकुंडा थाना प्रभारी आशुतोष कुमार, नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी, पार्षद मो. कलाम, स्कूल सचिव निलय गढ़यान तथा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि डिजिटल युग में सुरक्षित रहने की जानकारी भी मिलनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित एसडीपीओ लीलेश्वर महतो ने कहा कि साइबर अपराध लगातार अपने तरीके बदल रहा है। पहले केवल शहरों के लोग इसका शिकार होते थे, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और स्कूली बच्चे भी साइबर ठगों के निशाने पर हैं।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट का उपयोग करते समय सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि लोग समय रहते साइबर ठगी के तरीकों को समझ लें तो अधिकांश अपराधों को रोका जा सकता है।
“जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे मजबूत रक्षा कवच हैं। बच्चों को अभी से डिजिटल सुरक्षा की सही जानकारी देना आवश्यक है।” — लीलेश्वर महतो, एसडीपीओ निरसा
चिरकुंडा थाना प्रभारी आशुतोष कुमार ने छात्रों को साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हो जाए तो बिना देर किए 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी समझाई। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही अधिक संभावना रहती है कि ठगी गई राशि को रोका या वापस कराया जा सके।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान लिंक, इनाम, लॉटरी या नौकरी के झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी अपने अभिभावकों या पुलिस को दें।
सेमिनार में साइबर एक्सपर्ट एवं पुलिस निरीक्षक अर्जुन सिंह ने बेहद सरल भाषा में विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा के व्यावहारिक उपाय बताए। उन्होंने कहा कि अधिकांश साइबर अपराध लोगों की छोटी-छोटी लापरवाही का फायदा उठाकर किए जाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की सलाह दी:
- किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, बैंक पासवर्ड या CVV साझा न करें।
- नया सिम लेते समय केवल अधिकृत केंद्र का ही उपयोग करें।
- दस्तावेजों की फोटो कॉपी कराते समय पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रखें।
- होटल या अन्य स्थानों पर पहचान पत्र देने की आवश्यकता हो तो संभव हो तो मास्क्ड आधार का उपयोग करें।
- ई-मेल और सोशल मीडिया के लिए मजबूत एवं अलग-अलग पासवर्ड रखें।
- मॉल, दुकानों या अन्य स्थानों पर अनावश्यक रूप से अपना मोबाइल नंबर साझा करने से बचें।
- ऑनलाइन भुगतान करते समय वेबसाइट और ऐप की प्रामाणिकता अवश्य जांचें।
अर्जुन सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों को डर, लालच या जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं। ऐसे में किसी भी कॉल या संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल की भी जानकारी दी गई। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि यदि किसी का मोबाइल फोन चोरी हो जाए या गुम हो जाए तो केवल पुलिस में शिकायत करना ही पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि CEIR पोर्टल पर मोबाइल का IMEI नंबर दर्ज कर उसे ब्लॉक कराया जा सकता है, जिससे चोरी हुए मोबाइल का दुरुपयोग रोका जा सके। यह सुविधा आम नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी है और साइबर सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
सेमिनार का सबसे रोचक हिस्सा प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें छात्र-छात्राओं ने साइबर अपराध से जुड़े अनेक व्यावहारिक सवाल पूछे।
विद्यार्थियों ने जानना चाहा कि—
- अगर गलती से OTP साझा हो जाए तो क्या करें?
- फर्जी बैंक कॉल की पहचान कैसे करें?
- सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने पर क्या प्रक्रिया अपनाएं?
- ऑनलाइन गेमिंग और फर्जी ऐप से कैसे बचें?
साइबर विशेषज्ञ अर्जुन सिंह ने प्रत्येक प्रश्न का विस्तार से उत्तर देते हुए वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि सतर्कता और समय पर शिकायत दोनों ही साइबर सुरक्षा के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज बच्चे कम उम्र में ही स्मार्टफोन और इंटरनेट का उपयोग करने लगे हैं। ऐसे में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को डिजिटल अनुशासन और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की आदत सिखाएं।
विद्यालय प्रबंधन ने भी भविष्य में साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर नियमित सेमिनार आयोजित करने की बात कही, ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।
इस जागरूकता कार्यक्रम में एसआई रॉबिन्सन मुंडरी, मुकेश कुमार, एसके तियू, एएसआई एस. तिवारी, एएसआई बंदना कुमारी, परिमल दत्ता सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, पुलिसकर्मी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता को अपने परिवार और समाज तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।