Sudivya Kumar Sonu passes away : 10 साल के बेटे ने दी पिता को मुखाग्नि, भावुक हुए लोग; CM हेमंत सोरेन बने सहारा
Sudivya Kumar Sonu passes away : झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद गिरिडीह में अंतिम संस्कार के दौरान भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया। महज 10 साल के बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन परिवार के साथ खड़े नजर आए।
Sudivya Kumar Sonu passes away : गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अंतिम संस्कार के दौरान बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। महज 10 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन परिवार के साथ खड़े रहे और बच्चे के लिए अभिभावक की भूमिका में नजर आए। पिता को खोने का दर्द और बेटे द्वारा दी गई अंतिम विदाई ने मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं।
गिरिडीह से सामने आई एक तस्वीर और अंतिम संस्कार का दृश्य हर किसी को भावुक कर देने वाला है। झारखंड सरकार में मंत्री रहे सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अंतिम विदाई के दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब उनके महज 10 साल के बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। मासूम उम्र में पिता को खोने का दर्द और उसी पिता को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
जिस उम्र में किसी बच्चे को अपने पिता का हाथ थामकर चलना सीखना चाहिए, जिस उम्र में पिता अपने बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए उसका मार्गदर्शन करता है, उसी उम्र में इस बच्चे को अपने पिता की चिता को अग्नि देनी पड़ी। यह दृश्य न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों के लिए भी बेहद भावुक पल बन गया।

पिता और बेटे का रिश्ता दुनिया के सबसे मजबूत रिश्तों में से एक माना जाता है। एक पिता अपने बच्चे के लिए सुरक्षा, मार्गदर्शन और भरोसे का प्रतीक होता है। लेकिन सुदिव्य कुमार सोनू के बेटे के सामने जिंदगी ने ऐसा कठिन मोड़ ला दिया, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की होगी। पिता की उंगली पकड़कर आगे बढ़ने की उम्र में उसे पिता को हमेशा के लिए विदा करना पड़ा।
सुदिव्य कुमार सोनू के अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी परिवार के साथ मौजूद रहे। इस मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री को परिवार के सदस्यों के साथ खड़े देखा गया। खासकर मासूम बेटे के लिए यह पल बेहद कठिन था। ऐसे समय में मुख्यमंत्री का परिवार के साथ खड़ा होना वहां मौजूद लोगों के लिए भी भावुक दृश्य रहा।
एक ओर परिवार अपने प्रिय सदस्य को खोने के गम में डूबा था, तो दूसरी ओर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान बच्चे को अपने पिता को अंतिम विदाई देनी थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी ने इस दुख की घड़ी में परिवार को भावनात्मक संबल दिया।
10 साल के बच्चे के लिए पिता की मृत्यु को पूरी तरह समझ पाना शायद आसान नहीं होता। लेकिन अंतिम संस्कार की उस घड़ी में उसे अपने पिता को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी निभानी पड़ी। कांपते हाथों से मुखाग्नि देने का यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के दिल को छू गया।
यह सिर्फ एक अंतिम संस्कार का दृश्य नहीं था, बल्कि जिंदगी की एक ऐसी सच्चाई थी, जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। पिता की चिता के सामने खड़ा बच्चा शायद यह नहीं समझ पा रहा होगा कि अब उसके जीवन में सबसे बड़ा सहारा उसके साथ नहीं है। लेकिन उस पल उसने वह जिम्मेदारी निभाई, जो किसी भी बच्चे के लिए बेहद कठिन होती है।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर के बाद गिरिडीह में शोक की लहर देखने को मिली। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में भी शोक का माहौल है। अंतिम संस्कार में परिवार, शुभचिंतक और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा उस मार्मिक पल की रही, जब उनके 10 वर्षीय बेटे ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के इस दृश्य ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि एक छोटे बच्चे को कितनी जल्दी जिंदगी की सबसे कठिन वास्तविकता का सामना करना पड़ा।
बच्चे के जीवन में पिता की भूमिका सिर्फ एक अभिभावक तक सीमित नहीं होती। पिता अक्सर बच्चे के लिए दोस्त, मार्गदर्शक और मजबूत सहारे की तरह होता है। ऐसे में इतनी कम उम्र में पिता का चले जाना किसी भी बच्चे के लिए बहुत बड़ा आघात है।
सुदिव्य कुमार सोनू के अंतिम संस्कार का यह दृश्य लंबे समय तक लोगों के जेहन में बना रहेगा। एक तरफ राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे एक व्यक्ति की अंतिम विदाई थी, तो दूसरी तरफ उनके छोटे बेटे के जीवन का ऐसा पल था, जिसे वह शायद कभी भूल नहीं पाएगा।
जिस पिता की उंगली पकड़कर उसे जिंदगी की राह पर चलना था, उसी पिता को उसने अंतिम विदाई दी। जिस उम्र में पिता बच्चे का सहारा बनता है, उसी उम्र में इस मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया।
दुख की इस घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का परिवार के साथ खड़ा होना भी चर्चा में रहा। एक जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री के रूप में परिवार के साथ उनकी मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि मुश्किल समय में परिवार अकेला नहीं है।
अंतिम संस्कार की वह तस्वीर एक गहरे भावनात्मक संदेश के साथ सामने आई—जिंदगी में कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में बयान करना संभव नहीं होता। 10 साल के बेटे द्वारा पिता को दी गई अंतिम विदाई भी ऐसा ही एक पल था।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से उनके परिवार ने अपना एक महत्वपूर्ण सदस्य खो दिया। वहीं उनके छोटे बेटे ने इतनी कम उम्र में जीवन का सबसे बड़ा दुख झेला। पिता की यादें उसके साथ हमेशा रहेंगी और शायद समय के साथ यह दर्द कुछ कम हो, लेकिन पिता की कमी की जगह कभी पूरी नहीं हो पाएगी।