Dhanbad News : धनबाद के जलान अस्पताल में मरीज की मौत के बाद हंगामा, परिजनों ने लगाया इलाज में लापरवाही और शव रोकने का आरोप
Dhanbad News : गिरिडीह निवासी सड़क दुर्घटना में घायल मरीज की इलाज के दौरान मौत, बकाया बिल के कारण शव नहीं देने का आरोप; अस्पताल ने आरोपों को किया खारिज, पुलिस जांच में जुटी।
Dhanbad News : धनबाद के बरटांड़ स्थित जलान अस्पताल में मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही और बकाया बिल के कारण शव रोकने का आरोप लगाया। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों से इनकार किया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
झारखंड के धनबाद जिले में शुक्रवार को एक निजी अस्पताल में मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा देखने को मिला। धनबाद थाना क्षेत्र के बरटांड़ स्थित जलान अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत हो जाने के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने इलाज में लापरवाही बरती और बकाया बिल जमा नहीं करने तक शव देने से इनकार कर दिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान गिरिडीह निवासी मिथलेश पासवान के रूप में हुई है। बताया गया कि 20 जून को वह सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए धनबाद के बरटांड़ स्थित जलान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में कई दिनों तक उनका इलाज चला, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
चार लाख रुपये खर्च होने के बाद भी शव नहीं देने का आरोप
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि इलाज के दौरान अब तक करीब चार लाख रुपये अस्पताल में जमा किए जा चुके थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने लगभग 50 हजार रुपये बकाया होने की बात कहकर शव सौंपने से इनकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर होने के बावजूद उन्होंने इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन अंत में उन्हें अस्पताल की ओर से असंवेदनशील व्यवहार का सामना करना पड़ा।
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने बकाया राशि तत्काल जमा करने में असमर्थता जताई तो अस्पताल प्रबंधन ने शव रोक लिया। इस बात से नाराज होकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने का भी लगाया आरोप
हंगामा कर रहे परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि मिथलेश पासवान को किसी प्रकार की हृदय संबंधी बीमारी नहीं थी, फिर भी अस्पताल ने गलत रिपोर्ट के आधार पर उनका उपचार किया। परिजनों का दावा है कि यदि सही तरीके से इलाज किया जाता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
परिवार के सदस्यों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निजी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद चिंताजनक है और ऐसे मामलों पर प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर जलान अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सी. राजन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि मरीज को सड़क दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगी थी और इलाज के दौरान संक्रमण लगातार बढ़ता गया। चिकित्सकों की टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका।
डॉ. राजन ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल की ओर से इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। उनके अनुसार मरीज की स्थिति पहले से ही अत्यंत गंभीर थी और सभी चिकित्सीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया था।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलने के बाद धनबाद थाना पुलिस तत्काल अस्पताल पहुंची। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जाएगी। अस्पताल प्रबंधन और परिजनों दोनों के बयान दर्ज किए जाएंगे। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अक्सर इलाज के खर्च, बिल भुगतान और मरीजों के अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों को उपचार के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कई बार गंभीर मरीजों के इलाज में अत्यधिक खर्च आता है और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं। ऐसे मामलों में दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस सभी तथ्यों को एकत्र कर रही है और अस्पताल के दस्तावेजों के साथ इलाज से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सीय दस्तावेजों के आधार पर मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा, जबकि अस्पताल प्रबंधन अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।