Dhanbad Pulse Polio Campaign 2026: धनबाद में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत, 4.24 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक
Dhanbad Pulse Polio Campaign 2026 : 1900 पोलियो बूथों पर पहले दिन बच्चों को पिलाई गई दवा, 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर छूटे बच्चों को देंगी पोलियो की दो बूंद।
Dhanbad Pulse Polio Campaign 2026 : धनबाद में तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत हो गई है। जिले के 4.24 लाख से अधिक पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। 1900 पोलियो बूथों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर भी बच्चों को दवा पिलाएंगी।
धनबाद जिले में बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से रविवार को तीन दिवसीय पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत की गई। अभियान का शुभारंभ सदर अस्पताल परिसर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सन्नी राज ने फीता काटकर अभियान का उद्घाटन किया और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान की शुरुआत की।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा, उपाधीक्षक डॉ. संजीव कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी, चिकित्सक, एएनएम, सहिया और स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने पांच वर्ष से कम उम्र के प्रत्येक बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाएं ताकि भविष्य में पोलियो जैसी बीमारी दोबारा सिर न उठा सके।
4.24 लाख बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का लक्ष्य
स्वास्थ्य विभाग ने इस बार धनबाद जिले में करीब 4 लाख 24 हजार से अधिक पांच वर्ष तक के बच्चों को पोलियो की खुराक देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए जिले भर में व्यापक तैयारी की गई है। शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह जाए।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभियान के पहले दिन जिले में बनाए गए पोलियो बूथों पर बच्चों को दवा पिलाई गई। इसके बाद दूसरे और तीसरे दिन स्वास्थ्य कर्मियों की विशेष टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों को पोलियो की खुराक देंगी जो किसी कारणवश बूथ तक नहीं पहुंच सके।
1900 पोलियो बूथों पर दी गई पोलियो की खुराक
अभियान को सफल बनाने के लिए पूरे जिले में लगभग 1900 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं। इन बूथों पर प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है। प्रत्येक बूथ पर बच्चों को सुरक्षित तरीके से पोलियो की दो बूंद पिलाने की व्यवस्था की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान के लिए बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविका, सहिया, एएनएम और स्वयंसेवकों को भी जिम्मेदारी सौंपी है। इन सभी को पहले से प्रशिक्षण दिया गया ताकि अभियान पूरी तरह व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
29 और 30 जून को घर-घर पहुंचेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम
पल्स पोलियो अभियान के दूसरे और तीसरे दिन यानी 29 और 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें जिले के प्रत्येक गांव, मोहल्ले और बस्ती में घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाएंगी।
अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक लेने से न छूटे। स्वास्थ्य विभाग ने सभी टीमों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे परिवारों तक भी पहुंचें जहां पहले दिन बच्चे बूथ पर नहीं आ सके।
भारत पोलियो मुक्त, लेकिन सतर्कता जरूरी
अभियान के उद्घाटन अवसर पर डीडीसी सन्नी राज ने कहा कि भारत को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है। यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस उपलब्धि को बनाए रखना सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी बच्चे को समय पर पोलियो की दवा नहीं मिलती है तो भविष्य में संक्रमण का खतरा बना रह सकता है। इसलिए प्रत्येक अभिभावक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पांच वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को हर बार पल्स पोलियो अभियान के दौरान पोलियो की दो बूंद अवश्य मिले।
स्वास्थ्य विभाग ने की अभिभावकों से अपील
सिविल सर्जन डॉ. आलोक विश्वकर्मा ने कहा कि पोलियो एक ऐसी बीमारी है जिससे बचाव केवल नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो अभियान में भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने कहा कि पोलियो की दवा पूरी तरह सुरक्षित है और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी कारण से उनका बच्चा पहले दिन पोलियो बूथ तक नहीं पहुंच पाया है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम जब घर आए, तब बच्चे को अवश्य पोलियो की दवा पिलाएं।
स्वास्थ्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग के हजारों कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। आशा कार्यकर्ता, सहिया, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
गांवों और शहरी बस्तियों में घर-घर जाकर परिवारों को पोलियो की आवश्यकता के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही लोगों की शंकाओं का समाधान भी किया जा रहा है ताकि अभियान शत-प्रतिशत सफल हो सके।
पोलियो से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
चिकित्सकों के अनुसार पोलियो एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो बच्चों को स्थायी रूप से दिव्यांग बना सकती है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय-समय पर पोलियो की खुराक देकर इससे पूरी तरह बचाव किया जा सकता है।
इसी उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार हर वर्ष पल्स पोलियो अभियान संचालित करती हैं, ताकि देश में पोलियो का कोई नया मामला सामने न आए और भारत हमेशा पोलियो मुक्त बना रहे।
जनभागीदारी से सफल होगा अभियान
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि केवल सरकारी प्रयासों से ही नहीं बल्कि आम जनता के सहयोग से भी इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। अभिभावकों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की गई है कि वे लोगों को जागरूक करें और प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की दवा पहुंचाने में सहयोग करें।
धनबाद प्रशासन ने भी भरोसा जताया है कि जिले के सभी परिवार इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे और 4.24 लाख से अधिक बच्चों को पोलियो की खुराक देकर जिले को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में योगदान देंगे।