Jhiliya Bridge Diversion Road Collapsed: झिलिया पुल की डायवर्शन सड़क धंसी, 5 घंटे ठप रहा यातायात, ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
Jhiliya Bridge Diversion Road Collapsed : धनबाद के निरसा स्थित एग्यारकुंड प्रखंड में बारिश के बाद झिलिया पुल की अस्थायी डायवर्शन सड़क धंसने से यातायात पूरी तरह बाधित रहा। ग्रामीणों ने निर्माण एजेंसी और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
Jhiliya Bridge Diversion Road Collapsed : धनबाद के निरसा में निर्माणाधीन झिलिया पुल की डायवर्शन सड़क बारिश के कारण धंस गई, जिससे करीब पांच घंटे तक यातायात ठप रहा। ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुल निर्माण जल्द पूरा करने की मांग उठाई।
धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के निरसा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत एग्यारकुंड प्रखंड में स्थित मैथन रोड पर निर्माणाधीन झिलिया पुल की अस्थायी डायवर्शन सड़क बुधवार सुबह अचानक धंस जाने से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। रातभर हुई बारिश के कारण झिलिया नदी पर बनाई गई अस्थायी सड़क कमजोर होकर बैठ गई, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। घटना के बाद करीब पांच घंटे तक इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा।
यह सड़क निरसा, मैथन और आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। सड़क धंसने के कारण ऑटो, टोटो, टेम्पो, बस, ट्रक और निजी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, मरीजों और रोजाना इस मार्ग से सफर करने वाले लोगों को उठानी पड़ी।
बारिश बनी सड़क धंसने की वजह
स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार देर रात क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई थी। लगातार बारिश के कारण झिलिया नदी का जलस्तर बढ़ गया और डायवर्शन सड़क की मिट्टी बहने लगी। सुबह जब लोग अपने दैनिक कार्यों के लिए निकले तो देखा कि सड़क का बड़ा हिस्सा धंस चुका है। इसके बाद प्रशासन को सूचना दी गई और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सड़क की स्थिति पहले से ही कमजोर थी, लेकिन समय रहते इसकी मजबूती पर ध्यान नहीं दिया गया। बारिश के बाद हालात और बिगड़ गए, जिसके चलते यह घटना सामने आई।
पांच घंटे तक पूरी तरह ठप रहा यातायात
डायवर्शन सड़क धंसने के कारण सुबह से दोपहर तक करीब पांच घंटे तक इस मार्ग पर यातायात बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई यात्रियों को बीच रास्ते से पैदल होकर अपने गंतव्य तक जाना पड़ा।
स्कूल बसें और छोटे वाहन भी रास्ते में फंस गए। कई अभिभावकों को बच्चों को स्कूल पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं, व्यवसायियों और नौकरीपेशा लोगों को भी समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में परेशानी हुई।
ग्रामीणों ने किया सड़क जाम, प्रशासन के खिलाफ जताया विरोध
घटना से नाराज ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने करीब दो घंटे तक सड़क जाम कर प्रशासन और निर्माण एजेंसी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुल निर्माण कार्य काफी धीमी गति से चल रहा है और कई बार शिकायत करने के बावजूद निर्माण एजेंसी ने काम में तेजी नहीं दिखाई।
ग्रामीणों का कहना था कि बरसात शुरू होने से पहले पुल निर्माण पूरा करने की मांग लगातार उठाई जा रही थी, लेकिन संबंधित विभाग और एजेंसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसका नतीजा आज आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
जेसीबी से हुई मरम्मत, अस्थायी रूप से बहाल हुआ आवागमन
सड़क धंसने की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीन और अन्य संसाधनों की मदद से डायवर्शन सड़क की मरम्मत का कार्य शुरू किया गया। कई घंटे की मशक्कत के बाद सड़क को अस्थायी रूप से ठीक कर वाहनों की आवाजाही बहाल की गई।
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल अस्थायी समाधान है। यदि लगातार बारिश होती रही तो सड़क फिर धंस सकती है और लोगों को दोबारा इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप
भाकपा (माले) नेता नागेंद्र कुमार ने इस पूरे मामले में निर्माण एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुल निर्माण कार्य में शुरुआत से ही लापरवाही बरती जा रही है। कई बार अधिकारियों से मानसून से पहले निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की गई थी, लेकिन इस पर कोई गंभीर पहल नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पुल तैयार हो गया होता तो लोगों को डायवर्शन सड़क पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। प्रशासन और निर्माण एजेंसी की उदासीनता के कारण आम जनता को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग (PWD) और निर्माण एजेंसी से जल्द से जल्द पुल निर्माण कार्य पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्थायी डायवर्शन सड़क की जगह सुरक्षित और मजबूत वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जाए ताकि मानसून के दौरान लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान इसी तरह की समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर हो रहा है।
मानसून में बढ़ सकता है हादसों का खतरा
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पुल निर्माण पूरा नहीं हुआ और मजबूत डायवर्शन सड़क नहीं बनाई गई तो मानसून के दौरान बड़ा हादसा हो सकता है। भारी वाहनों के गुजरने और लगातार बारिश के कारण सड़क फिर धंसने की आशंका बनी रहेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग हजारों लोगों की दैनिक आवाजाही का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में प्रशासन को इसे प्राथमिकता देते हुए जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि भविष्य में लोगों को इस तरह की परेशानी और संभावित दुर्घटनाओं से बचाया जा सके।
प्रशासन से लोगों की प्रमुख मांगें
- झिलिया पुल का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
- मजबूत और सुरक्षित डायवर्शन सड़क का निर्माण कराया जाए।
- बारिश के मौसम में नियमित निगरानी और मरम्मत की व्यवस्था हो।
- निर्माण कार्य में लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई की जाए।
- भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्थायी योजना बनाई जाए।