Chapapur Outsourcing Project में दर्दनाक हादसा: डोजर की चपेट में आने से कर्मी की मौत, मुआवजे की मांग पर कोयला उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग ठप
ईसीएल के मुगमा क्षेत्र स्थित Chapapur Outsourcing Project में ड्यूटी से घर लौट रहे कर्मी दिलदार शेख की डोजर की चपेट में आने से मौत, परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजा व आश्रित को नौकरी की मांग को लेकर किया प्रदर्शन।
ईसीएल मुगमा क्षेत्र के Chapapur Outsourcing Project में डोजर की चपेट में आने से कर्मी दिलदार शेख की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने कोयला उत्पादन व ट्रांसपोर्टिंग कार्य बंद कर मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया।
धनबाद जिले के निरसा थाना क्षेत्र अंतर्गत ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के मुगमा क्षेत्र स्थित चापापुर आउटसोर्सिंग परियोजना में बुधवार सुबह एक दर्दनाक औद्योगिक हादसा हो गया। परियोजना में कार्यरत एक कर्मी की डोजर की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कोयला उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग कार्य पूरी तरह बंद करा दिया। इसके साथ ही मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और आश्रित को स्थायी रोजगार देने की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया गया।
ड्यूटी समाप्त कर घर लौट रहे थे दिलदार शेख
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान दिलदार शेख के रूप में हुई है, जो चापापुर आउटसोर्सिंग परियोजना में कार्यरत थे। बताया जा रहा है कि बुधवार सुबह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद वह बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान परियोजना क्षेत्र में चल रहे भारी वाहन संचालन के बीच एक डोजर अचानक अनियंत्रित हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डोजर ने पहले उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मारी और फिर वाहन उनके ऊपर चढ़ गया। हादसा इतना भयावह था कि दिलदार शेख की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना में उनकी बाइक भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
घटना के बाद परियोजना क्षेत्र में मचा हड़कंप
हादसे की सूचना मिलते ही परियोजना क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अन्य कर्मियों ने तुरंत घटना की जानकारी कंपनी प्रबंधन और पुलिस को दी। कुछ ही देर में मृतक के परिजन और आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंच गए।
अपने परिवार के सदस्य को खोने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वहीं स्थानीय लोगों ने घटना को कंपनी की लापरवाही बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि परियोजना क्षेत्र में भारी मशीनों का संचालन सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं किया जाता, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं।
मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन
घटना से नाराज लोगों ने कंपनी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने चापापुर आउटसोर्सिंग परियोजना में चल रहे कोयला उत्पादन और ट्रांसपोर्टिंग कार्य को पूरी तरह बंद करा दिया। इससे परियोजना का संचालन प्रभावित हो गया और कई वाहन मौके पर ही खड़े रह गए।
धरने पर बैठे लोगों ने मांग की कि मृतक के परिवार को पर्याप्त आर्थिक मुआवजा दिया जाए तथा परिवार के एक आश्रित सदस्य को कंपनी में स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए कंपनी प्रबंधन ने अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की। सूचना मिलने के बाद निरसा थाना पुलिस सहित अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण बातचीत कर माहौल सामान्य बनाने की कोशिश की। प्रशासन ने भी परिजनों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर कंपनी प्रबंधन के साथ बातचीत कर उचित समाधान निकाला जाएगा।
मुआवजा और नियोजन को लेकर जारी है वार्ता
घटना के बाद कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच मुआवजा एवं आश्रित को रोजगार देने के मुद्दे पर बातचीत शुरू हुई। देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच वार्ता जारी रही।
फिलहाल किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि कंपनी प्रबंधन की ओर से यह कहा गया कि मामले का समाधान नियमों और प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा तथा परिजनों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दुर्घटना के बाद एक बार फिर कोयला परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। भारी मशीनों के संचालन वाले क्षेत्रों में कर्मचारियों और अन्य लोगों की आवाजाही को लेकर स्पष्ट सुरक्षा व्यवस्था होना आवश्यक माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में वाहन संचालन के लिए निर्धारित मार्ग, गति सीमा, चेतावनी संकेत, प्रशिक्षित ऑपरेटर और नियमित सुरक्षा निरीक्षण बेहद जरूरी होते हैं। यदि इन मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तो इस प्रकार की दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
परियोजना का काम प्रभावित
प्रदर्शन के कारण चापापुर आउटसोर्सिंग परियोजना में कोयला उत्पादन और परिवहन का कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गया। कई ट्रकों की आवाजाही रुक गई, जिससे उत्पादन प्रक्रिया भी बाधित हुई। कंपनी प्रबंधन लगातार स्थानीय लोगों और परिजनों से बातचीत कर जल्द से जल्द समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है ताकि परियोजना का संचालन दोबारा सामान्य हो सके।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि डोजर कैसे अनियंत्रित हुआ। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाए।
फिलहाल पूरे मामले पर स्थानीय प्रशासन, पुलिस और कंपनी प्रबंधन की नजर बनी हुई है। परिजनों और कंपनी के बीच चल रही वार्ता के परिणाम के बाद ही आंदोलन समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है।