Jharkhand Liquor Scam: शराब घोटाला जांच तेज, रामेश्वर उरांव और बेटे रोहित उरांव को ED का समन
Jharkhand Liquor Scam : नई आबकारी नीति 2022, वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की होगी जांच, रांची स्थित ED कार्यालय में होगी पूछताछ
Jharkhand Liquor Scam : झारखंड शराब घोटाला मामले में ED ने कांग्रेस विधायक एवं पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को समन जारी किया है। नई आबकारी नीति 2022, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच तेज हो गई है।
Jharkhand Liquor Scam : झारखंड के चर्चित कथित शराब घोटाला मामले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस विधायक एवं राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। दोनों को रांची स्थित ED के जोनल कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
ED इस मामले में नई आबकारी नीति 2022 के तहत हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं, शराब कारोबार से जुड़े लेनदेन और विभिन्न कंपनियों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि झारखंड में शराब आपूर्ति और मैनपावर उपलब्ध कराने के ठेकों में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता हुई।
नई आबकारी नीति 2022 जांच के दायरे में
प्रवर्तन निदेशालय की जांच का केंद्र वर्ष 2022 में लागू की गई नई आबकारी नीति है। आरोप है कि इस नीति के तहत छत्तीसगढ़ की कुछ कंपनियों को झारखंड में शराब आपूर्ति और मैनपावर उपलब्ध कराने का कार्य दिलाने में प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही।
जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इन कंपनियों को ठेका दिलाने की प्रक्रिया में कहीं नियमों की अनदेखी तो नहीं हुई और क्या इसके बदले किसी प्रकार का आर्थिक लाभ लिया गया। ED वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है।
रामेश्वर उरांव और रोहित उरांव से होगी पूछताछ
ED द्वारा जारी समन के तहत पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव से अलग-अलग बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी उनके बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों और कथित कारोबारी संबंधों से जुड़े तथ्यों की जांच कर सकती है।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान ED उन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का भी मिलान करेगी जो पहले की गई कार्रवाई के दौरान एजेंसी के हाथ लगे थे।
2023 की छापेमारी फिर चर्चा में
इस मामले में अगस्त 2023 में भी ED ने बड़ी कार्रवाई की थी। उस समय रोहित उरांव से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से लगभग 30 लाख रुपये नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।
उस समय भी एजेंसी ने कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए थे। अब उन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। ED यह जानने की कोशिश कर रही है कि बरामद राशि और अन्य दस्तावेजों का कथित शराब कारोबार से कोई संबंध है या नहीं।
वित्तीय लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों की होगी गहन जांच
प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी ट्रेल को समझने का प्रयास कर रहा है। जांच के दौरान विभिन्न बैंक खातों में हुए लेनदेन, संदिग्ध ट्रांजैक्शन, डिजिटल भुगतान, मोबाइल डेटा, ईमेल, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित तौर पर शराब कारोबार से जुड़े आर्थिक लाभ किन-किन व्यक्तियों या संस्थाओं तक पहुंचे और क्या धन शोधन (Money Laundering) के कोई तत्व सामने आते हैं।
ACB पहले ही कर चुकी है कार्रवाई
इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) भी पहले से जांच कर रही है। ACB ने कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, निर्धारित समय सीमा के भीतर आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं किए जाने के कारण सभी आरोपियों को अदालत से डिफॉल्ट जमानत मिल गई। डिफॉल्ट जमानत का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी आरोपों से मुक्त हो गए हैं, बल्कि यह कानूनी प्रक्रिया के तहत समय पर चार्जशीट दाखिल न होने की स्थिति में मिलने वाला अधिकार है। मामले की जांच अब भी जारी है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर उरांव को ED का समन मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं कांग्रेस की ओर से भी समय-समय पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिक्रिया सामने आती रही है।
फिलहाल ED की कार्रवाई को जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है और एजेंसी पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
क्या है ED की जांच का उद्देश्य?
प्रवर्तन निदेशालय का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि नई आबकारी नीति के क्रियान्वयन के दौरान कहीं अवैध आर्थिक लाभ, धन शोधन या नियमों के उल्लंघन की स्थिति तो उत्पन्न नहीं हुई। यदि जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो एजेंसी संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
वहीं, जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया समाप्त होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाता। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
जांच अभी जारी
झारखंड के कथित शराब घोटाले की जांच फिलहाल निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। ED द्वारा पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को समन जारी किए जाने से यह स्पष्ट है कि एजेंसी वित्तीय लेनदेन, डिजिटल साक्ष्यों और नई आबकारी नीति से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच के आधार पर इस मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं।