Jalan factory accident : घायल कर्मी अकरम खान की मौत, मुआवजा और नौकरी की मांग पर परिजनों ने किया गेट जाम
Jalan factory accident : धनबाद के भूली स्थित जालान फैक्ट्री में मशीन दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान कर्मी की मौत, परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। वार्ता के बाद 8 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को नौकरी और अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता पर बनी सहमति।
Jalan factory accident : धनबाद के भूली स्थित जालान फैक्ट्री में मशीन हादसे में घायल कर्मी अकरम खान की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर फैक्ट्री गेट जाम कर प्रदर्शन किया। वार्ता के बाद 8 लाख रुपये मुआवजा और नौकरी देने पर सहमति बनी।
धनबाद जिले के भूली क्षेत्र स्थित जालान फैक्ट्री में हुए मशीन हादसे ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। करीब एक सप्ताह पहले फैक्ट्री में काम करने के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए 50 वर्षीय कर्मी अकरम खान की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी मौत की सूचना मिलते ही परिवार और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्री के मुख्य गेट पर जमा हो गए और मुआवजा तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए भूली-खरकबाद मुख्य सड़क पर भी यातायात प्रभावित रहा। सूचना मिलने के बाद भूली ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच बातचीत कराने की पहल की, जिसके बाद मामला धीरे-धीरे शांत हुआ।
29 जून को हुआ था दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, 29 जून को अकरम खान फैक्ट्री में अपनी नियमित ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान अचानक मशीन की बेल्ट की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के तुरंत बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था।
कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। जैसे ही उनके निधन की खबर परिवार और मोहल्ले के लोगों तक पहुंची, पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया।
परिजनों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि यह हादसा फैक्ट्री प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है। उनका कहना है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जाता, जिसके कारण इस तरह की दुर्घटनाएं होती हैं।
परिजनों के अनुसार अकरम खान पिछले लगभग 20 वर्षों से फैक्ट्री में कार्यरत थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन का बड़ा हिस्सा इसी फैक्ट्री में काम करते हुए बिताया। परिवार का कहना है कि अकरम खान ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और उनकी मौत के बाद पूरे परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
परिवार का यह भी कहना है कि यदि फैक्ट्री में सुरक्षा उपकरणों और मशीनों की नियमित जांच होती, तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।
मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर हुआ प्रदर्शन
अकरम खान की मौत के बाद परिजन और स्थानीय लोग फैक्ट्री के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी उपलब्ध कराई जाए, ताकि परिवार का जीवनयापन संभव हो सके।
प्रदर्शन के कारण फैक्ट्री के मुख्य गेट पर आवाजाही प्रभावित हुई। कुछ देर के लिए भूली-खरकबाद मुख्य सड़क पर भी यातायात बाधित रहा। इससे आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया। साथ ही किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई।
वार्ता के बाद बनी सहमति
बढ़ते तनाव को देखते हुए भूली ओपी परिसर में फैक्ट्री प्रबंधन, पुलिस प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और मृतक के परिजनों के बीच विस्तृत वार्ता हुई।
काफी देर तक चली बातचीत के बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने मृतक के परिवार को 8 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति जताई। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और अंतिम संस्कार के लिए 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी निर्णय लिया गया।
समझौता होने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया और फैक्ट्री के बाहर की स्थिति सामान्य हो गई। पुलिस प्रशासन ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि कई फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जाता। मशीनों के रखरखाव, कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण और आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने में अक्सर लापरवाही देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट, मशीनों की समय-समय पर जांच और कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है। यदि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए तो इस प्रकार की घटनाओं में काफी कमी लाई जा सकती है।
परिवार के सामने रोजी-रोटी का संकट
अकरम खान की मौत के बाद उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के सदस्यों का कहना है कि घर की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। अब परिवार के सामने बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता उत्पन्न हो गई है।
हालांकि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा नौकरी और आर्थिक सहायता देने की सहमति से परिवार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जगी है, लेकिन अपने परिवार के मुखिया को खोने का दर्द किसी भी आर्थिक सहायता से कम नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की भूमिका रही अहम
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। यदि समय पर वार्ता नहीं होती तो मामला और अधिक गंभीर हो सकता था। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में भी कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
जालान फैक्ट्री में हुई यह दुखद घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। किसी भी औद्योगिक संस्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होती है। यदि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए तो ऐसी दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल मुआवजा और नौकरी पर बनी सहमति के बाद मामला शांत हो गया है, लेकिन यह घटना उद्योगों में श्रमिक सुरक्षा को लेकर व्यापक सुधार की आवश्यकता की ओर स्पष्ट संकेत देती है।