Dhanbad News : भक्ति और सत्संग से आत्मा का कल्याण, उज्ज्वल शांडिल्य ने दिए संस्कार और भक्ति के संदेश
Dhanbad News : जागृत मंदिर चिरागोड़ा के तृतीय वार्षिकोत्सव में आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, बच्चों को संस्कार और सत्संग से जोड़ने का दिया संदेश।
Dhanbad News : झारखंड के धनबाद स्थित जागृत मंदिर, चिरागोड़ा में आयोजित तृतीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रहे भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से पूरी तरह भरा रहा और भगवान के भजनों की मधुर स्वर लहरियों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमते नजर आए। कथा के दौरान भागवताचार्य उज्ज्वल शांडिल्य ने श्रीमद्भागवत के कई मार्मिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए मानव जीवन में भक्ति, सत्संग और संस्कारों के महत्व को विस्तार से बताया।
उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य का वास्तविक कल्याण केवल भौतिक सुख-सुविधाओं से नहीं बल्कि भगवान की भक्ति और सत्संग से संभव है। यदि व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बनाना चाहता है तो उसे संतों का सान्निध्य, भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।

बच्चों को केवल शिक्षा नहीं, संस्कार भी दें
अपने प्रेरणादायक संबोधन में भागवताचार्य उज्ज्वल शांडिल्य ने विशेष रूप से बच्चों के भविष्य और उनके चरित्र निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए महंगे विद्यालयों में भेजते हैं, लेकिन उन्हें सत्संग से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा,
“यदि आप अपने बच्चों को महान बनाना चाहते हैं तो उन्हें केवल महंगे विद्यालय मत भेजिए, उन्हें सत्संग में भी भेजिए। केवल मोबाइल मत दीजिए, माला भी दीजिए। केवल धन कमाना मत सिखाइए, भगवान का नाम लेना भी सिखाइए।”
उन्होंने बताया कि सत्संग से संस्कार मिलते हैं, संस्कारों से श्रद्धा उत्पन्न होती है, श्रद्धा से भक्ति का जन्म होता है और भक्ति से भगवान की प्राप्ति होती है। जिस व्यक्ति को भगवान का सान्निध्य मिल जाता है, उसे संसार में किसी अन्य वस्तु की आवश्यकता नहीं रहती।
भगवान प्रेम और भक्ति देखते हैं, जाति और धन नहीं
भागवताचार्य ने कहा कि भगवान कभी भी किसी मनुष्य की जाति, कुल, धन या पद नहीं देखते। उनके लिए केवल प्रेम, समर्पण, सेवा और सच्ची भक्ति ही सर्वोपरि होती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति संतों की सेवा करता है, भागवत कथा सुनता है और भगवान का नाम स्मरण करता है, उसका जीवन भी दासी-पुत्र नारद की तरह दिव्य बन सकता है। भगवान की कृपा से साधारण जीवन भी असाधारण बन जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि सभी लोग अपने जीवन में सत्संग को अपनाएं, संतों का सम्मान करें, नियमित रूप से भगवान का नाम जपें और भक्ति के मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल एवं सार्थक बनाएं।
सत्संग बदल सकता है जीवन की दिशा
उज्ज्वल शांडिल्य ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भागवत स्पष्ट रूप से बताती है कि सत्संग की एक-एक घड़ी मनुष्य का भाग्य बदल सकती है। संतों का सान्निध्य व्यक्ति के भीतर छिपे सद्गुणों को जागृत करता है और जीवन को नई दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि संतों की कृपा से मनुष्य के भीतर की नकारात्मकता समाप्त होती है और भगवान श्रीहरि के प्रति प्रेम जागृत होता है। जब मनुष्य का मन ईश्वर की ओर लग जाता है तो सांसारिक मोह-माया स्वतः समाप्त होने लगती है।
उन्होंने माता-पिता से आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों को धन और संपत्ति से पहले अच्छे संस्कार दें, क्योंकि धन एक दिन समाप्त हो सकता है लेकिन भक्ति और संस्कार जीवनभर मनुष्य का मार्गदर्शन करते हैं।

वाराणसी से आए 21 वैदिक विद्वान कर रहे हैं भागवत पारायण
भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान वाराणसी से आए 21 सदस्यीय वैदिक विद्वान ब्राह्मणों की टीम आचार्य सुबोध पांडेय के नेतृत्व में श्रीमद्भागवत महापुराण का पारायण कर रही है।
इस वैदिक अनुष्ठान में आचार्य सुनील पांडेय, गुनानंद झा, जितेंद्र पांडेय, आचार्य सूरज पांडेय, पंकज पांडेय, सुमन पांडेय, सतीश नारायण पांडेय, राजन पांडेय, नीतीश पांडेय, नितिन पांडेय, अखिलेश पांडेय, चंद्रकांत पांडेय, रोहन पांडेय, रोहित पांडेय, रवि पांडेय तथा दीपक पांडेय सहित अन्य विद्वान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भागवत महापुराण का पाठ कर रहे हैं।
पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है और श्रद्धालु पूरे मनोयोग से कथा एवं पारायण का श्रवण कर रहे हैं।
प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से रात 7 बजे तक हो रही कथा
मंदिर समिति के उपाध्यक्ष अजय कुमार भट्ट ने बताया कि भागवत कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से रात्रि 7 बजे तक किया जा रहा है। कथा समाप्त होने के बाद मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का भी आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के नाम का संकीर्तन करते हैं।
उन्होंने बताया कि कथा के आगामी दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर समिति द्वारा सभी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि सभी भक्त शांतिपूर्ण एवं श्रद्धापूर्वक कथा का लाभ प्राप्त कर सकें।
आध्यात्मिक वातावरण से गूंज उठा जागृत मंदिर
भागवत कथा के दूसरे दिन जागृत मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। भजन, कीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चार और कथा प्रवचन ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं ने कथा के माध्यम से धर्म, संस्कार और भक्ति के महत्व को आत्मसात किया तथा भगवान श्रीहरि के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
भागवताचार्य उज्ज्वल शांडिल्य का संदेश श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक उपदेश नहीं बल्कि वर्तमान समाज के लिए एक प्रेरणा भी रहा, जिसमें उन्होंने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक संस्कार देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।