Dhanbad News : तीसरी बार बहा झिलिया डायवर्सन, निरीक्षण करने पहुंचे कार्यपालक अभियंता; एक माह में पुल चालू करने का आश्वासन
Dhanbad News : धनबाद के मैथन रोड स्थित झिलिया पुल निर्माण के दौरान भारी बारिश में तीसरी बार डायवर्सन बह गया। निरीक्षण के लिए पहुंचे कार्यपालक अभियंता मिथलेश कुमार का स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने घेराव किया। विभाग ने एक माह में पुल चालू करने और जल्द वैकल्पिक डायवर्सन तैयार करने का आश्वासन दिया।
Dhanbad News : धनबाद के मैथन रोड स्थित झिलिया पुल निर्माण एक बार फिर विवादों में आ गया है। लगातार हो रही बारिश के बीच पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन तीसरी बार बह गया, जिससे हजारों लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। सड़क संपर्क टूटने के कारण आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घटना की सूचना मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता मिथलेश कुमार विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे और निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों का घेराव कर निर्माण कार्य में लापरवाही और खराब गुणवत्ता का आरोप लगाया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण के दौरान बनाया गया डायवर्सन पहली या दूसरी बार नहीं बल्कि तीसरी बार बारिश में बह गया है। इससे स्पष्ट होता है कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि यदि शुरुआत से ही मजबूत और टिकाऊ डायवर्सन बनाया गया होता तो बार-बार ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ग्रामीणों ने कहा कि हर बार विभाग केवल आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
निरीक्षण के दौरान जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी ने विभाग और निर्माण एजेंसी पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बार-बार डायवर्सन का बह जाना विभागीय लापरवाही और घटिया निर्माण का परिणाम है। उन्होंने मांग की कि केवल अस्थायी समाधान नहीं बल्कि स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को दोबारा ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पुल निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता की भी नियमित निगरानी होनी चाहिए।
भाकपा माले नेता नागेंद्र कुमार ने भी निर्माण कार्य की धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि झिलिया पुल क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है और इसके बंद रहने से दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उन्होंने कहा कि पुल निर्माण में लगातार देरी और डायवर्सन के बार-बार बहने से लोगों का विभाग पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा में पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो स्थानीय जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा।
भाजपा नेता देवनारायण पाठक ने भी विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जनता लंबे समय से परेशानी झेल रही है, लेकिन निर्माण एजेंसी और विभाग की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पुल निर्माण कार्य युद्धस्तर पर कराया जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
डायवर्सन बह जाने से केवल यातायात ही प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि पेयजल व्यवस्था भी संकट में आ गई। पुल निर्माण के दौरान जिस पिलर पर जलापूर्ति पाइपलाइन को सहारा दिया गया था, वह भी तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गया। इसके कारण कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति बाधित हो गई। सूचना मिलने पर पीएचईडी की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत का कार्य शुरू कराया। विभाग का कहना है कि जल्द से जल्द जलापूर्ति सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क संपर्क टूटने के कारण एंबुलेंस सेवाओं पर भी असर पड़ा है। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, जबकि स्कूली बच्चों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। कई छोटे व्यवसायियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है क्योंकि सामान की ढुलाई बाधित हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बार बारिश के मौसम में यही स्थिति बन जाती है, लेकिन इसके बावजूद विभाग कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल पाया है।
निरीक्षण के दौरान कार्यपालक अभियंता मिथलेश कुमार ने निर्माण एजेंसी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले दिन तक नया वैकल्पिक डायवर्सन तैयार कर यातायात बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि लोगों को राहत मिल सके।
मिथलेश कुमार ने यह भी कहा कि यदि मौसम सामान्य रहा तो लगभग एक महीने के भीतर पुल निर्माण का कार्य पूरा कर उसे जनता के लिए खोलने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही निर्माण एजेंसी को तेजी से काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि विभाग के इस आश्वासन के बावजूद स्थानीय लोगों में नाराजगी कम होती नहीं दिख रही है। उनका कहना है कि पहले भी कई बार समय सीमा तय की गई, लेकिन कार्य निर्धारित अवधि में पूरा नहीं हो सका। लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि एक महीने के भीतर पुल निर्माण पूरा नहीं हुआ और मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई तो स्थानीय लोगों के साथ व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की होगी।
झिलिया पुल निर्माण अब केवल एक विकास परियोजना नहीं बल्कि हजारों लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। ऐसे में विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य पूरा कर लोगों का विश्वास दोबारा हासिल करने की है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग अपने वादे के अनुसार निर्धारित समय में पुल का निर्माण पूरा कर पाता है या फिर लोगों को एक बार फिर लंबे इंतजार और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।