Dhanbad News : राष्ट्रपति भवन से आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. धीरज कुमार को मिला विशेष न्योता, ‘एट होम’ रिसेप्शन में होंगे शामिल
Dhanbad News : खनन तकनीक, क्रिटिकल मिनरल और स्टार्टअप इनोवेशन में उल्लेखनीय योगदान का मिला सम्मान…………
Dhanbad News : 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में करेंगे शिरकत………………..
Dhanbad News : धनबाद और पूरे झारखंड के लिए यह बेहद गर्व और सम्मान का क्षण है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के खनन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं TEXMiN के निदेशक प्रो. धीरज कुमार को भारत के माननीय राष्ट्रपति की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘एट होम’ रिसेप्शन में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। देशभर के चुनिंदा वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों में उनका चयन किया गया है। यह उपलब्धि न केवल आईआईटी (आईएसएम) धनबाद बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय बन गई है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाला ‘एट होम’ रिसेप्शन देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, सैन्य अधिकारियों, नीति निर्माताओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों की उपस्थिति के लिए जाना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित समारोह में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के प्रो. धीरज कुमार का चयन उनके लंबे समय से किए जा रहे वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार कार्यों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है।
यह समारोह 15 अगस्त 2026 की शाम नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों के चुनिंदा वैज्ञानिक और शिक्षाविद शामिल होंगे। प्रो. धीरज कुमार को यह निमंत्रण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा किए गए नामांकन के आधार पर प्राप्त हुआ है। अखिल भारतीय स्तर पर हुई चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए चुना गया है।
प्रो. धीरज कुमार को यह सम्मान खनन तकनीक (Mining Technology), क्रिटिकल मिनरल (Critical Minerals), रेयर अर्थ मिनरल्स, डिजिटल माइनिंग और स्टार्टअप इनोवेशन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए मिला है। वर्तमान समय में भारत आत्मनिर्भरता और आधुनिक औद्योगिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में खनन क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास और नई शोध परियोजनाओं का विशेष महत्व है। प्रो. धीरज कुमार का शोध कार्य इसी दिशा में देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
वर्तमान में प्रो. धीरज कुमार आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में खनन इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर, CoRE-MiN के प्रमुख और TEXMiN के निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। उनकी टीम आधुनिक तकनीकों के माध्यम से खनन क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, डिजिटल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर लगातार कार्य कर रही है।
प्रो. धीरज कुमार ने बताया कि उनकी टीम विशेष रूप से क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, डिजिटल माइनिंग टेक्नोलॉजी और माइनिंग सेक्टर में स्टार्टअप इनोवेशन इकोसिस्टम विकसित करने पर काम कर रही है। उनका मानना है कि इन क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार से भारत वर्ष 2047 तक विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि आईआईटी (आईएसएम) धनबाद अपने 100वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और ऐसे ऐतिहासिक समय में राष्ट्रपति भवन से मिला यह आमंत्रण पूरे संस्थान के लिए अत्यंत सम्मानजनक उपलब्धि है। उन्होंने इसे केवल अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि संस्थान के सभी शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और झारखंड की वैज्ञानिक क्षमता की सामूहिक सफलता बताया।
प्रो. धीरज कुमार ने यह भी कहा कि यह निमंत्रण आईआईटी (आईएसएम) की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा। उनके अनुसार, पहली बार आईआईटी (आईएसएम) धनबाद तथा झारखंड के किसी वैज्ञानिक को राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में आमंत्रित किया गया है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद लंबे समय से देश में खनन, भू-विज्ञान, इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान रहा है। पिछले कुछ वर्षों में संस्थान ने अनुसंधान, नवाचार, उद्योग सहयोग और स्टार्टअप विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। प्रो. धीरज कुमार के नेतृत्व में TEXMiN ने माइनिंग टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई दिशा देने का कार्य किया है, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।
राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी आमंत्रित वैज्ञानिकों की सूची में देश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों के प्रमुख वैज्ञानिकों को स्थान मिला है। इनमें बीआरआईसी-सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (BRIC-CDFD), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (NABI) सहित कई अग्रणी संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं। इन्हीं विशिष्ट वैज्ञानिकों के बीच प्रो. धीरज कुमार का नाम शामिल होना उनके वैज्ञानिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी मान्यता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स और डिजिटल माइनिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उत्पादन, सेमीकंडक्टर, अक्षय ऊर्जा और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए आवश्यक खनिजों की खोज, सुरक्षित खनन और बेहतर प्रबंधन में वैज्ञानिक अनुसंधान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में प्रो. धीरज कुमार और उनकी टीम का शोध कार्य देश की औद्योगिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धनबाद सहित पूरे झारखंड में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है। शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वैज्ञानिक समुदाय ने इसे राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान झारखंड के युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की नई प्रेरणा देगा।
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के लिए यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं बल्कि संस्थान की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का भी प्रमाण है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित समारोह में प्रो. धीरज कुमार की उपस्थिति न केवल संस्थान बल्कि पूरे झारखंड के वैज्ञानिक और शैक्षणिक विकास की नई पहचान के रूप में देखी जा रही है। यह उपलब्धि आने वाले समय में राज्य के विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र को नई ऊर्जा और नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।