Dhanbad News : धनबाद आवासीय विद्यालय विवाद: बच्चों से मारपीट और बाथरूम साफ कराने के आरोप, परिजनों का हंगामा
Dhanbad News : बापूनगर स्थित आवासीय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में अभिभावकों ने उठाए गंभीर सवाल, शिक्षक ने कमियां स्वीकारते हुए आरोपों का दिया जवाब
Dhanbad News : धनबाद के बापूनगर स्थित आवासीय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बच्चों से मारपीट, गाली-गलौज और बाथरूम साफ कराने के आरोपों को लेकर परिजनों ने हंगामा किया। शिक्षक ने कुछ कमियां स्वीकार कीं, जबकि शिक्षा विभाग से जांच की मांग उठी।
धनबाद के आईआईटी (आइएसएम) थाना क्षेत्र अंतर्गत बापूनगर स्थित आवासीय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शनिवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय परिसर पहुंच गए और बच्चों के साथ कथित मारपीट, दुर्व्यवहार तथा बाथरूम साफ कराने के आरोपों को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए बच्चों की सुरक्षा और उनके रहने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
मामले की जानकारी फैलते ही विद्यालय परिसर में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की ओर से लगातार मिल रही शिकायतों के बाद वे विद्यालय पहुंचे और वहां की वास्तविक स्थिति जानने की कोशिश की। उनका आरोप है कि विद्यालय प्रशासन बच्चों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
बच्चों से मारपीट और गाली-गलौज का आरोप
परिजनों का आरोप है कि विद्यालय में रह रहे छात्र-छात्राओं के साथ नियमित रूप से मारपीट की जाती है। उनका कहना है कि अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ कठोर व्यवहार किया जाता है और कई बार शिक्षकों या कर्मचारियों द्वारा गाली-गलौज भी की जाती है।
अभिभावकों के अनुसार इस तरह का व्यवहार बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना है कि आवासीय विद्यालय में बच्चों को सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण मिलना चाहिए, लेकिन यहां उन्हें भय और दबाव के माहौल में रहना पड़ रहा है।
बाथरूम साफ कराने का भी लगाया आरोप
विरोध कर रहे परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय में बड़े बच्चों से शौचालय की सफाई कराई जाती है। उनका कहना है कि यह कार्य विद्यार्थियों से कराना अनुचित है और इससे बच्चों के आत्मसम्मान पर भी असर पड़ता है।
परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि विद्यालय में सफाईकर्मियों की व्यवस्था है तो फिर छात्रों से इस प्रकार का कार्य क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
एक कमरे में 16 से 18 बच्चों को रखने का आरोप
अभिभावकों ने विद्यालय की आवासीय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक कमरे में 16 से 18 बच्चों को रखा जाता है और उसी कमरे का उपयोग पढ़ाई के लिए भी किया जाता है।
उनके अनुसार इतनी अधिक संख्या में बच्चों के रहने से न केवल असुविधा होती है बल्कि पढ़ाई का माहौल भी प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि सीमित जगह में अधिक बच्चों को रखने से स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।
परिजनों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे आरोप
अभिभावकों का दावा है कि विद्यालय में बच्चों के साथ मारपीट और अनुचित व्यवहार की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। उनका आरोप है कि पूर्व में भी ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित लोगों को दी गई थी, लेकिन किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने मांग की कि इस बार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
जानकारी के अनुसार इस आवासीय विद्यालय में 120 से अधिक छात्र-छात्राएं रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
हंगामे के दौरान अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
परिजनों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी मांग की कि विद्यालय की आवासीय व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता और अनुशासन व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
विद्यालय के शिक्षक ने रखा अपना पक्ष
मामले पर विद्यालय के शिक्षक सीताराम कुमार ने कहा कि विद्यालय में कुछ कमियां जरूर हैं, लेकिन बच्चों के साथ किसी प्रकार का अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाता।
उन्होंने बताया कि अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से शरारती बच्चों को कभी-कभी दंड दिया जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बड़े बच्चों से कभी-कभार शौचालय की सफाई कराई जाती है।
शिक्षक के अनुसार विद्यालय में सप्ताह में दो बार सफाईकर्मी भी आते हैं और नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था रहती है। उनका कहना है कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और किसी भी प्रकार के गंभीर आरोपों की वास्तविकता की जांच की जा सकती है।
शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका पर नजर
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो विद्यालय प्रशासन को भी अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मानजनक वातावरण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि अभिभावकों का विश्वास बना रहे और बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
फिलहाल इस मामले में परिजनों के आरोप और विद्यालय प्रबंधन के जवाब के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक जांच का इंतजार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।