Dhanbad News : धनबाद में साइबर ठगी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़, 4 आरोपी गिरफ्तार, एक विधि विरुद्ध बालक निरुद्ध
Dhanbad News : फर्जी SIM से UCO बैंक ग्राहकों को बनाते थे निशाना, KYC अपडेट और खाता बंद होने का झांसा देकर OTP हासिल कर उड़ाते थे रकम
Dhanbad News : धनबाद पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया गया है। गिरोह फर्जी SIM के जरिए UCO बैंक ग्राहकों को KYC अपडेट और बैंक खाता बंद होने का झांसा देकर OTP हासिल करता था और बैंक खातों से रकम निकालकर वॉलेट में ट्रांसफर करता था।
धनबाद जिले में साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। चिरकुंडा थाना क्षेत्र से जारी किए गए संदिग्ध SIM कार्ड की जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक विधि विरुद्ध बालक को भी निरुद्ध किया गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी SIM और मोबाइल तकनीक का इस्तेमाल कर बैंक ग्राहकों को साइबर ठगी का शिकार बनाते थे।
गिरोह खास तौर पर UCO बैंक के ग्राहकों को निशाना बनाता था। ठग बैंक ग्राहक को फोन कर KYC अपडेट कराने, बैंक खाता बंद होने या बैंकिंग सेवा बाधित होने का डर दिखाते थे। इसके बाद ग्राहक से उसके मोबाइल पर आने वाला OTP हासिल कर लिया जाता था। OTP मिलने के बाद आरोपियों द्वारा बैंक खाते से रकम निकालकर वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी। बाद में गिरोह के सदस्य ठगी की रकम को आपस में बांट लेते थे।
सोमवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में धनबाद के ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दूरसंचार विभाग की ओर से पुलिस को उपलब्ध कराई गई सूचना में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
जांच के दौरान पता चला कि 1 जनवरी 2026 से 29 मई 2026 के बीच चिरकुंडा थाना क्षेत्र स्थित मुकेश स्टोर POS दुकान से कुल 64 संदिग्ध SIM कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से 27 SIM कार्ड ऐसे पाए गए, जिनके खिलाफ National Cyber Crime Reporting Portal यानी NCRP पर साइबर ठगी से संबंधित शिकायत दर्ज थी।
इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध SIM के साइबर अपराध में इस्तेमाल होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की।
वरीय पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर निरसा SDPO लिलेश्वर महतो के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने सबसे पहले चिरकुंडा में ICICI बैंक के पास स्थित मुकेश स्टोर पर छापेमारी की। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही दुकान बंद मिली।
पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की और दुकान के संचालक मुकेश राय के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद संदिग्ध SIM कार्ड जारी होने के नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई गई।
जांच में पुलिस को चिरकुंडा के लायकडीह इलाके के रहने वाले आयुष सिंह के बारे में जानकारी मिली। आरोप है कि आयुष अपने पहचान पत्र और ID का इस्तेमाल कर कई SIM कार्ड खरीदता था। इसके बाद वह इन SIM कार्डों को अधिक कीमत पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह को बेच देता था।
पुलिस की पूछताछ में आयुष सिंह ने साइबर ठगी में शामिल कई लोगों के नाम बताए। इसके बाद पुलिस ने निरसा थाना क्षेत्र के मुगमा में छापेमारी कर प्रेम रविदास, बिनोद रविदास, गुलाब रविदास और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार प्रेम रविदास को इस साइबर ठगी गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार धनबाद के अलावा अन्य जिलों या राज्यों से भी जुड़े हैं या नहीं।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने साइबर ठगी के तरीके के बारे में भी जानकारी दी है। आरोपी मोबाइल फोन के माध्यम से UCO mPassbook और UCO Secure ऐप का इस्तेमाल करते थे।
ठग पहले बैंक ग्राहकों को फोन करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें KYC अपडेट कराने या बैंक खाता बंद होने की बात बताकर डराया जाता था। इसके बाद ग्राहक से मोबाइल पर प्राप्त OTP बताने के लिए कहा जाता था।
जैसे ही ग्राहक OTP साझा करता था, आरोपी उसके बैंक खाते से जुड़ी प्रक्रिया पूरी कर रकम को साइबर माध्यम से वॉलेट में ट्रांसफर कर देते थे। इसके बाद वॉलेट से रकम निकालकर गिरोह के सदस्य आपस में उसका बंटवारा कर लेते थे।
यह तरीका साइबर अपराधियों द्वारा लोगों के भरोसे और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का फायदा उठाने का एक उदाहरण सामने आया है।
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने अपने नौ अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी दी है। ये सभी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी और तकनीकी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों ने अब तक कितने SIM कार्ड साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए और इस नेटवर्क के जरिए कितने बैंक ग्राहकों को निशाना बनाया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, अलग-अलग कंपनियों के SIM कार्ड और UCO बैंक ग्राहकों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा बरामद किया है। बरामद डेटा में ग्राहकों के मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर से जुड़ी जानकारी भी शामिल बताई गई है।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन और SIM कार्ड की तकनीकी जांच कर रही है। इससे साइबर ठगी के अन्य मामलों और फरार आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले में चिरकुंडा थाना कांड संख्या 159/2026, दिनांक 10 अगस्त 2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में BNS, IT Act और Telecom Act की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रेम रविदास, बिनोद रविदास, गुलाब रविदास और आयुष सिंह शामिल हैं। वहीं मोहन रविदास को विधि विरुद्ध बालक के रूप में निरुद्ध किया गया है।
धनबाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य गिरोह के फरार सदस्यों को गिरफ्तार करना, साइबर ठगी के पुराने मामलों से इनके संबंधों का पता लगाना और ठगी की कुल रकम का आकलन करना है।
इस तरह के साइबर अपराध से बचने के लिए बैंक ग्राहक किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। KYC अपडेट या बैंक खाता बंद होने की धमकी मिलने पर घबराने के बजाय संबंधित बैंक की आधिकारिक शाखा या आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
धनबाद पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती फरार नौ आरोपियों तक पहुंचना है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की साइबर ठगी की गई। जांच पूरी होने के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।