Jharkhand Maidan Durga Puja 2026: खूंटी पूजन के साथ भव्य तैयारियां शुरू, इंडोनेशियाई आदिवासी महल थीम पर बनेगा इको-फ्रेंडली पंडाल
Jharkhand Maidan Durga Puja 2026 : 27वें दुर्गा पूजा महोत्सव के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ खूंटी पूजन, 30 लाख की लागत से तैयार होगा आकर्षक पूजा परिसर
Jharkhand Maidan Durga Puja 2026 : धनबाद के झारखंड मैदान में 27वें दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां खूंटी पूजन के साथ शुरू हो गई हैं। इस वर्ष इंडोनेशियाई आदिवासी महल थीम पर इको-फ्रेंडली पंडाल बनाया जाएगा, जिस पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च होंगे।
धनबाद: धनबाद के ऐतिहासिक झारखंड मैदान में इस वर्ष आयोजित होने वाला 27वां दुर्गा पूजा महोत्सव अपनी अनूठी थीम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रहा है। गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ खूंटी पूजन संपन्न हुआ, जिसके साथ ही पूजा पंडाल निर्माण का कार्य औपचारिक रूप से शुरू हो गया।
इस वर्ष श्री श्री सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा पूजा समिति ने पूजा पंडाल को इंडोनेशियाई आदिवासी महल की थीम पर बनाने का निर्णय लिया है। लगभग 28 से 30 लाख रुपये की लागत से तैयार होने वाला यह पंडाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली होगा और प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित किया जाएगा।
झारखंड मैदान स्थित पूजा स्थल पर गुरुवार सुबह समिति के पदाधिकारियों, श्रद्धालुओं और पुरोहितों की उपस्थिति में खूंटी पूजन आयोजित किया गया। वैदिक मंत्रों के बीच भूमि पूजन और खूंटी स्थापना के साथ पूजा परिसर के निर्माण का शुभारंभ हुआ।
पूजन के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल से आए अनुभवी कारीगरों ने पंडाल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया। हर वर्ष की तरह इस बार भी बंगाल के शिल्पकार अपनी पारंपरिक कला और आधुनिक डिजाइन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेंगे।
पूजा समिति के महासचिव राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2002 से लगातार आयोजित हो रही यह पूजा इस वर्ष अपने 27वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। हर साल नई थीम पर पंडाल निर्माण समिति की पहचान रही है और इस बार श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “इंडोनेशिया का आदिवासी महल” रखी गई है। पंडाल की वास्तुकला में इंडोनेशिया की पारंपरिक जनजातीय संस्कृति, लकड़ी एवं बांस आधारित महलों की संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य को उकेरा जाएगा।
समिति का मानना है कि यह थीम न केवल दर्शकों को आकर्षित करेगी बल्कि सांस्कृतिक विविधता और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देगी।
इस बार पूजा समिति ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पंडाल निर्माण में प्लास्टिक और रासायनिक सामग्री का न्यूनतम उपयोग करने का निर्णय लिया है।
पंडाल के निर्माण में मुख्य रूप से इन प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग होगा:
- बांस
- चटाई
- लकड़ी
- प्राकृतिक रेशा
- पारंपरिक हस्तशिल्प सामग्री
इन सामग्रियों से तैयार होने वाला पंडाल आकर्षक होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी होगा। समिति का उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि धार्मिक उत्सवों को भी प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर मनाया जा सकता है।
पूरे दुर्गा पूजा महोत्सव पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इस राशि में पंडाल निर्माण, मां दुर्गा की प्रतिमा, विद्युत सज्जा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाएं शामिल हैं।
समिति के अनुसार, पूजा परिसर को इस प्रकार विकसित किया जाएगा कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रवेश और निकास मार्ग, बैरिकेडिंग, पेयजल, बैठने की व्यवस्था तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। समिति ने पश्चिम बंगाल के दीघा के प्रसिद्ध मूर्तिकारों को प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रतिमा पारंपरिक बंगाली शैली में तैयार की जाएगी, जिसमें मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और भगवान कार्तिकेय की आकर्षक मूर्तियां स्थापित होंगी। प्रतिमा के रंग, अलंकरण और शिल्पकला को विशेष रूप से भव्य स्वरूप दिया जाएगा।
दुर्गा पूजा की पहचान उसकी मनमोहक रोशनी भी होती है। इस बार विद्युत सज्जा की जिम्मेदारी भी पश्चिम बंगाल के विशेषज्ञ कलाकारों को दी गई है।
पूरे पूजा परिसर में आधुनिक एलईडी लाइटिंग, थीम आधारित प्रकाश संयोजन और आकर्षक सजावटी रोशनी लगाई जाएगी। महालया के अगले दिन से ही श्रद्धालु पंडाल और विद्युत सज्जा का दर्शन कर सकेंगे।
रात्रि के समय इंडोनेशियाई आदिवासी महल की थीम पर आधारित प्रकाश प्रभाव दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण होगा।
समिति द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 12 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ दुर्गा पूजा का विधिवत शुभारंभ होगा। इसके बाद षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और विजयादशमी तक धार्मिक अनुष्ठान, पुष्पांजलि, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वहीं 23 अक्टूबर को भव्य झांकियों एवं शोभायात्रा के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
पूजा समिति ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा और सुविधा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मुख्य व्यवस्थाओं में शामिल हैं:
- सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
- स्वयंसेवकों की तैनाती
- महिला एवं वरिष्ठ नागरिक सहायता केंद्र
- प्राथमिक चिकित्सा सुविधा
- अग्निशमन एवं आपातकालीन व्यवस्था
- स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय सुविधा
समिति प्रशासन के सहयोग से यातायात और भीड़ प्रबंधन की भी विस्तृत योजना तैयार कर रही है।
समिति के महासचिव राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि झारखंड मैदान की दुर्गा पूजा पिछले 26 वर्षों से धनबाद की सांस्कृतिक पहचान रही है। इस वर्ष 27वें महोत्सव को और अधिक भव्य एवं यादगार बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इंडोनेशियाई आदिवासी महल की थीम, इको-फ्रेंडली निर्माण, पश्चिम बंगाल की भव्य प्रतिमा और आकर्षक विद्युत सज्जा मिलकर इस बार झारखंड मैदान को धनबाद के सबसे प्रमुख दुर्गा पूजा आकर्षणों में शामिल करेंगी।
हर वर्ष झारखंड मैदान का दुर्गा पूजा पंडाल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। इस बार अंतरराष्ट्रीय थीम, पर्यावरण अनुकूल निर्माण और कलात्मक प्रस्तुति के कारण लोगों में उत्साह पहले से अधिक दिखाई दे रहा है।
समिति को उम्मीद है कि महालया से लेकर विजयादशमी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचेंगे और मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ-साथ इस अनूठे पंडाल की भव्यता का भी आनंद लेंगे।