Dhanbad Cricket Association : कार्यकारिणी से सदस्य हटाने पर बवाल, मेयर संजीव सिंह बोले- परिवारवाद क्रिकेट के लिए ठीक नहीं
Dhanbad Cricket Association : डीसीए के कार्यकारिणी सदस्य संतोष सिंह ने बिना सूचना हटाए जाने को बताया नियमों के विरुद्ध, मेयर ने खिलाड़ियों के हित में पारदर्शी व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग।
Dhanbad Cricket Association : धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) की कार्यकारिणी से सदस्य हटाए जाने पर विवाद गहरा गया है। संतोष सिंह ने कार्रवाई को एकतरफा और असंवैधानिक बताया, जबकि मेयर संजीव सिंह ने डीसीए में परिवारवाद पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (डीसीए) की कार्यकारिणी समिति से एक सदस्य को हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल एसोसिएशन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संगठन में पारदर्शिता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और क्रिकेट प्रशासन को लेकर भी नई बहस शुरू कर दी है। कार्यकारिणी समिति के सदस्य संतोष सिंह ने अपने पद से हटाए जाने की प्रक्रिया को पूरी तरह एकतरफा, असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ बताया है। दूसरी ओर धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने डीसीए में परिवारवाद के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि यह क्रिकेट और खिलाड़ियों के भविष्य के लिए उचित नहीं है।

बिना सूचना हटाने का लगाया आरोप
कार्यकारिणी सदस्य संतोष सिंह का कहना है कि उन्हें डीसीए की कार्यकारिणी समिति से हटाने से पहले न तो कोई नोटिस दिया गया, न ही किसी प्रकार का स्पष्टीकरण मांगा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया और न ही ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके आधार पर उन्हें हटाया जाना उचित ठहराया जा सके।
संतोष सिंह के अनुसार उनका निर्वाचन वर्ष 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए विधिवत चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से हुआ था। चुनाव के बाद से वे लगातार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे और संगठन के विभिन्न कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी सदस्य के खिलाफ कोई शिकायत या आरोप था तो संगठन के संविधान और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहले उन्हें नोटिस जारी किया जाना चाहिए था तथा अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।
आरोपों को बताया निराधार
संतोष सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया। उन्होंने कहा कि संगठन के संविधान और नियमों का पालन प्रत्येक पदाधिकारी की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी होती है तो इससे संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
उन्होंने डीसीए अध्यक्ष से अपील की कि संस्था के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था का सम्मान किया जाए। उनका कहना है कि क्रिकेट जैसी खेल संस्था में निर्णय पारदर्शी तरीके से होने चाहिए, ताकि खिलाड़ियों और सदस्यों का संगठन पर विश्वास बना रहे।
मेयर संजीव सिंह ने परिवारवाद पर उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन में परिवारवाद हावी होता दिखाई दे रहा है, जो क्रिकेट के विकास के लिए किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।
मेयर ने कहा कि किसी भी खेल संस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और खेल को आगे बढ़ाना होना चाहिए। यदि संगठन में व्यक्तिगत हित या परिवारवाद हावी होगा तो इसका सीधा असर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के भविष्य पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण है। खेल संगठन का संचालन नियमों और संविधान के अनुरूप होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

जेसीए के समक्ष रखा जाएगा पक्ष
मेयर संजीव सिंह ने कहा कि जिन लोगों को कार्यकारिणी से हटाया गया है, वे झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (जेसीए) के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि संबंधित मंच पर सभी तथ्यों की समीक्षा की जाएगी और नियमों के अनुसार उचित निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक या प्रक्रियागत त्रुटि हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। इससे न केवल विवाद का समाधान होगा बल्कि संगठन की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
हस्ताक्षरों की जांच पर टिकी नजर
मेयर ने पूरे विवाद में हस्ताक्षरों की सत्यता की जांच को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
उनका कहना है कि किसी भी संस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की प्रमाणिकता अत्यंत आवश्यक होती है। यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता की जरूरत
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में प्रशासनिक विवाद खिलाड़ियों के मनोबल को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि सभी निर्णय संविधान, नियमों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिए जाएं।
यदि किसी पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता होती है तो उसे उचित नोटिस, स्पष्टीकरण और सुनवाई का अवसर देना संगठनात्मक पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इससे भविष्य में विवाद की संभावनाएं भी कम होती हैं।
खिलाड़ियों के हित को प्राथमिकता देने की मांग
स्थानीय खेल प्रेमियों का भी मानना है कि किसी भी खेल संगठन का सबसे बड़ा उद्देश्य खिलाड़ियों का विकास होना चाहिए। प्रशासनिक विवादों के कारण यदि संगठन की गतिविधियां प्रभावित होती हैं तो इसका नुकसान अंततः खिलाड़ियों को ही उठाना पड़ता है।
क्रिकेट से जुड़े लोगों का कहना है कि डीसीए को अपने आंतरिक मतभेदों का समाधान नियमों के अनुसार करना चाहिए ताकि जिला स्तर पर क्रिकेट गतिविधियां बिना किसी बाधा के जारी रह सकें।
अब इस पूरे मामले पर सभी की निगाहें झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन और संबंधित अधिकारियों की संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि मामले की औपचारिक जांच होती है तो दस्तावेजों, निर्णय प्रक्रिया और हस्ताक्षरों की प्रमाणिकता की जांच के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल डीसीए कार्यकारिणी से सदस्य हटाने का विवाद धनबाद के खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में संगठन की ओर से क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है और संबंधित पक्षों की शिकायतों पर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों और क्रिकेट प्रशासन से जुड़े लोगों की नजर बनी हुई है।