Dhanbad News : शिक्षक दो, शिक्षा बचाओ: 264 बच्चों के लिए सिर्फ एक शिक्षक, धनबाद में डीसी कार्यालय की सीढ़ियों पर धरने पर बैठे स्कूली छात्र
Dhanbad News : धनबाद के गोमो स्थित गुनघसा माध्यमिक विद्यालय में 264 छात्रों के लिए केवल एक शिक्षक होने से नाराज बच्चों ने डीसी कार्यालय की सीढ़ियों पर धरना दिया। डीएसई ने 15 अगस्त से पहले दो सहायक शिक्षकों की तैनाती का आश्वासन दिया।
Dhanbad News : धनबाद जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। गोमो के तोपचांची प्रखंड स्थित गुनघसा माध्यमिक विद्यालय में 264 विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रही है। लंबे समय से शिक्षकों की कमी झेल रहे विद्यार्थियों का सब्र आखिरकार टूट गया और उन्होंने “शिक्षक दो, शिक्षा बचाओ” का नारा लगाते हुए उपायुक्त (डीसी) कार्यालय की सीढ़ियों पर अनोखा धरना दिया।
सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल से सीधे समाहरणालय पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग प्रशासन के सामने रखी। बच्चों का कहना था कि यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार है तो स्कूल में पर्याप्त संख्या में शिक्षक भी उपलब्ध होने चाहिए। उनका आरोप था कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के समक्ष यह समस्या उठाई गई, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
धरने पर बैठे बच्चों ने बताया कि गुनघसा माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक कुल 264 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि पूरे विद्यालय में केवल एक शिक्षक मानस सर कार्यरत हैं। एक शिक्षक के लिए सभी कक्षाओं को पढ़ाना संभव नहीं है। ऐसे में कई कक्षाओं की नियमित पढ़ाई बाधित हो रही है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक भविष्य प्रभावित हो रहा है।
छात्रों ने बताया कि कई बार उन्हें बिना शिक्षक के स्वयं पढ़ाई करनी पड़ती है। सप्ताह में केवल एक बार ही कुछ कक्षाओं को पढ़ाने का अवसर मिल पाता है। इससे परीक्षा की तैयारी, पाठ्यक्रम पूरा करना और विषयों की समझ विकसित करना बेहद कठिन हो गया है। बच्चों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से पढ़ाई का माहौल भी मिलना चाहिए।
धरने के दौरान विद्यार्थियों ने उपायुक्त से मिलने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बावजूद बच्चों ने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन तक पहुंचाया और जल्द समाधान की अपील की।
स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य श्यामल मंडल ने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कई वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। इस संबंध में जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि एक शिक्षक के भरोसे पूरे विद्यालय का संचालन संभव नहीं है और इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
विद्यालय के एकमात्र शिक्षक मानस ने भी इस समस्या को गंभीर बताते हुए स्वीकार किया कि सभी कक्षाओं को अकेले संभालना बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के अलावा प्रशासनिक कार्य, अभिलेखों का रखरखाव, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में प्रत्येक कक्षा को पर्याप्त समय देना संभव नहीं हो पाता।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए। यदि सैकड़ों बच्चों के लिए केवल एक शिक्षक उपलब्ध रहेगा तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना लगभग असंभव हो जाएगा। इससे विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, परीक्षा परिणाम और भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मक तैयारी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) शालिनी डूंगडूंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें विद्यालय में शिक्षकों की कमी की जानकारी पहले से थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि 15 अगस्त से पहले विद्यालय में दो सहायक शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। यदि नियमित नियुक्ति तत्काल संभव नहीं हो पाती है तो डेपुटेशन के आधार पर दो शिक्षकों को वहां भेजा जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
डीएसई ने यह भी कहा कि समाहरणालय तक बच्चों को लेकर आने की परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी। उन्होंने संबंधित विद्यालय से इस मामले में जवाब तलब करने की बात कही, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों को धरने पर बैठाने की नौबत क्यों आई।
डीएसई के इस आश्वासन के बाद विद्यार्थियों और अभिभावकों में कुछ उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार ऐसे आश्वासन दिए गए हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 अगस्त से पहले वास्तव में दो शिक्षकों की तैनाती होती है या नहीं।
झारखंड सहित देश के कई हिस्सों में सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालयों में सुविधाएं बढ़ाने की बात करती है, लेकिन यदि पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाएगा।
गुनघसा माध्यमिक विद्यालय का यह मामला केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद एक गंभीर सवाल भी है। जब छोटे-छोटे बच्चों को अपनी पढ़ाई बचाने के लिए प्रशासनिक कार्यालयों की सीढ़ियों पर बैठकर धरना देना पड़े, तो यह व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अपने वादे के अनुरूप 15 अगस्त से पहले दो सहायक शिक्षकों की तैनाती कर पाएंगे, या फिर बच्चों को अपनी शिक्षा के अधिकार के लिए दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।