Dhanbad News : LIC में और विनिवेश के विरोध में बीमा कर्मचारियों का प्रदर्शन, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग
Dhanbad News : सरकार द्वारा LIC में हिस्सेदारी कम करने के लिए घोषित ऑफर फॉर सेल (OFS) के विरोध में धनबाद समेत हजारीबाग मंडल के सभी 37 LIC कार्यालयों में बीमा कर्मचारियों ने द्वार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने इसे जनहित और संस्थान के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से विनिवेश का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की।
Dhanbad News : भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में सरकार की हिस्सेदारी और कम करने के फैसले के विरोध में बुधवार को धनबाद समेत हजारीबाग मंडल के सभी कार्यालयों में बीमा कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ के आह्वान पर आयोजित इस विरोध कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों ने भोजनावकाश के दौरान अपने-अपने कार्यालयों के बाहर द्वार प्रदर्शन कर सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से LIC में सरकार की हिस्सेदारी कम करने के निर्णय को सार्वजनिक हित और संस्थान के भविष्य के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
बीमा कर्मचारी संघ हजारीबाग मंडल के बैनर तले आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में धनबाद सहित मंडल के अधिकार क्षेत्र के सभी 37 LIC कार्यालयों के कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के निर्णय का विरोध किया और कहा कि देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा संस्था में लगातार विनिवेश की नीति अपनाना करोड़ों पॉलिसीधारकों और कर्मचारियों की भावनाओं के साथ न्याय नहीं है। कर्मचारियों का कहना था कि LIC केवल एक व्यावसायिक संस्था नहीं, बल्कि देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक है।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार द्वारा 3 अगस्त 2026 को घोषित ऑफर फॉर सेल (OFS) के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सरकार अपनी हिस्सेदारी और कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण संस्था की स्वायत्तता और मजबूती पर असर पड़ सकता है। कर्मचारियों ने कहा कि इस तरह के फैसले केवल वित्तीय संसाधन जुटाने के उद्देश्य से नहीं लिए जाने चाहिए, बल्कि इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
बीमा कर्मचारी संघ के मंडलीय महासचिव जगदीश चंद मित्तल ने कहा कि सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 2.5 प्रतिशत इक्विटी बिक्री के साथ 4 प्रतिशत तक का ग्रीनशू विकल्प भी रखा गया है। यदि इस विकल्प का पूरा उपयोग किया गया तो कुल विनिवेश 6.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजकोषीय घाटे की भरपाई के लिए लगातार सार्वजनिक संपत्तियों की हिस्सेदारी बेचने का रास्ता अपना रही है, जो दीर्घकालिक दृष्टि से देशहित में उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि LIC जैसी संस्था वर्षों की मेहनत, करोड़ों ग्राहकों के विश्वास और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता से इस मुकाम तक पहुंची है। ऐसे में सरकार को अल्पकालिक आर्थिक जरूरतों के लिए इस संस्था की हिस्सेदारी कम करने के बजाय इसके विकास और विस्तार पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
संघ के अध्यक्ष हेमंत मिया ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में सरकार पहले ही कई सार्वजनिक उपक्रमों के शेयर बेचकर हजारों करोड़ रुपये जुटा चुकी है। उनका कहना था कि लगातार विनिवेश की नीति सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह LIC जैसी रणनीतिक और भरोसेमंद संस्था के संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले कर्मचारियों और हितधारकों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करे।
संगठन सचिव अमित कुमार ने भी प्रदर्शन के दौरान कहा कि LIC केवल लाभ अर्जित करने वाली कंपनी नहीं है, बल्कि यह करोड़ों पॉलिसीधारकों की मेहनत की कमाई और उनके भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी संस्था है। उन्होंने कहा कि देश के हर वर्ग के लोगों का LIC पर गहरा विश्वास है और यही विश्वास इस संस्था की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए सरकार को ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे इस भरोसे पर असर पड़े।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को मजबूत बनाना देश की आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि LIC ने वर्षों से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी निवेश कर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है। ऐसे में संस्था की हिस्सेदारी लगातार कम करना उचित नहीं होगा।
कर्मचारियों ने यह भी कहा कि उनका विरोध केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों पॉलिसीधारकों और देश की सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं और सरकार से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो भविष्य में संगठन द्वारा व्यापक आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।
धनबाद समेत हजारीबाग मंडल के सभी 37 कार्यालयों में हुए इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से कर्मचारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि LIC जैसी राष्ट्रीय संस्था में विनिवेश के मुद्दे पर उनकी चिंता केवल कर्मचारियों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्था की विश्वसनीयता, सार्वजनिक हित और देश की आर्थिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ विषय है। कर्मचारियों ने सरकार से ऑफर फॉर सेल का निर्णय वापस लेकर सार्वजनिक क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण संस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाने की मांग दोहराई।