Dhanbad News : पूर्वी टुंडी डायरिया कांड से स्वास्थ्य विभाग ने लिया सबक, 30 गांवों में जागरूकता अभियान तेज, स्वच्छ पानी और ORS पर विशेष जोर
Dhanbad News : धनबाद के पूर्वी टुंडी में अगस्त 2025 के डायरिया कांड से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है। 30 गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और ORS के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।
Dhanbad News : धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी में अगस्त 2025 में फैले डायरिया प्रकोप की भयावह तस्वीर आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस समय करीब 30 गांव इस बीमारी की चपेट में आ गए थे। लगभग 120 लोग संक्रमित हुए थे और दो महीने के भीतर 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने न केवल ग्रामीणों को झकझोर दिया था, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के लिए भी यह एक बड़ी चेतावनी साबित हुई। अब उसी घटना से सबक लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और डायरिया की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को डायरिया से बचाव के उपाय बता रही है। स्वास्थ्य कर्मी ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने, साफ-सफाई बनाए रखने, भोजन को सुरक्षित रखने और समय पर उपचार कराने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में पूर्वी टुंडी को दोबारा ऐसी गंभीर स्थिति का सामना न करना पड़े।
अगस्त 2025 में जब पूर्वी टुंडी के आदिवासी टोला सहित लगभग 30 गांवों में डायरिया फैलना शुरू हुआ था, तब शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर दिया। लेकिन कुछ ही दिनों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। कई परिवारों में एक साथ कई सदस्य बीमार पड़ गए। देखते ही देखते करीब 120 लोग डायरिया से प्रभावित हो गए। लगातार बढ़ते मामलों और दो महीने के भीतर 6 लोगों की मौत ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था।
स्थिति गंभीर होने पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल संयुक्त कार्रवाई शुरू की। मेडिकल टीमों को प्रभावित गांवों में भेजा गया। मरीजों का इलाज किया गया और आवश्यक दवाइयों के साथ ORS के पैकेट वितरित किए गए। इसके साथ ही दूषित जल स्रोतों की पहचान कर लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए गए। प्रशासन ने ग्रामीणों से उबला हुआ या साफ पानी पीने और बाहर खुले में रखे भोजन से बचने की अपील की थी।
करीब एक वर्ष बाद भी स्वास्थ्य विभाग उस घटना को भूलने के बजाय उसे सीख के रूप में देख रहा है। इसी कारण इस वर्ष मानसून के दौरान विशेष सतर्कता बरती जा रही है। रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम नियमित रूप से गांवों का दौरा कर रही है और लोगों को डायरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही है। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर ग्रामीणों को समझा रहे हैं कि स्वच्छता और सावधानी ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
जागरूकता अभियान के दौरान ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि हमेशा स्वच्छ और सुरक्षित पानी का सेवन करें। यदि पानी की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसे उबालकर या फिल्टर करके ही पीएं। भोजन को हमेशा ढककर रखें ताकि मक्खियां और अन्य कीट उसमें न बैठ सकें। खाना खाने से पहले तथा शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना आवश्यक है। इसके अलावा घर और आसपास के वातावरण को साफ रखने तथा गंदगी जमा नहीं होने देने की भी सलाह दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों पर ध्यान दे रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि डायरिया के दौरान शरीर से पानी और आवश्यक लवण तेजी से बाहर निकल जाते हैं। यदि समय पर इसकी पूर्ति नहीं की जाए तो मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए डायरिया के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत ORS का घोल देना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।
रघुनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विकास राणा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बीमारी को फैलने से पहले रोकना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि वे डायरिया के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों को समझ सकें। उनका कहना है कि यदि लोग स्वच्छ पानी का उपयोग करें, साफ-सफाई का ध्यान रखें और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें, तो डायरिया जैसी बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन डायरिया फैलने के सबसे बड़े कारण हैं। मानसून के दौरान जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसी कारण विभाग इस बार पहले से अधिक सतर्क है। स्वास्थ्य कर्मियों को गांवों में नियमित निगरानी करने, संदिग्ध मरीजों की पहचान करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्रामीणों को यह भी बताया जा रहा है कि डायरिया को सामान्य बीमारी मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआती लक्षणों में बार-बार दस्त, उल्टी, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी शामिल होती है। ऐसे मामलों में घरेलू उपचार के साथ-साथ चिकित्सकीय सलाह लेना भी बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों से ही बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सकता। इसके लिए ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। यदि प्रत्येक परिवार स्वच्छता के नियमों का पालन करे, सुरक्षित पानी का उपयोग करे और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तो डायरिया जैसी बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है।
अगस्त 2025 का डायरिया कांड पूर्वी टुंडी के लिए एक दर्दनाक अनुभव रहा, लेकिन उसी अनुभव ने स्वास्थ्य विभाग को भविष्य के लिए अधिक सतर्क और तैयार भी बनाया है। अब विभाग का पूरा जोर रोकथाम, जागरूकता और समय पर उपचार पर है। उम्मीद की जा रही है कि स्वच्छ पेयजल, बेहतर साफ-सफाई और ग्रामीणों की बढ़ती जागरूकता के जरिए भविष्य में पूर्वी टुंडी में डायरिया जैसी भयावह स्थिति दोबारा पैदा नहीं होगी।