Dhanbad News : झीलिया डायवर्सन धंसा, 50 हजार की आबादी प्यासी; निजी पैसे से जिप सदस्य ने शुरू कराया मरम्मत कार्य
Dhanbad News : कुमारधुबी-मैथन रोड पर डायवर्सन धंसने से टूटी जलापूर्ति पाइपलाइन, दो दिनों से हजारों घरों में पानी की सप्लाई बंद; विभागीय लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
Dhanbad News : निरसा के झीलिया डायवर्सन धंसने से करीब 50 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी ने निजी खर्च से जेसीबी और हाइड्रा लगवाकर मरम्मत कार्य शुरू कराया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
धनबाद जिले के निरसा प्रखंड अंतर्गत कुमारधुबी-मैथन रोड स्थित झीलिया इलाके में डायवर्सन धंसने से करीब 50 हजार की आबादी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। पुल निर्माण के दौरान बनाए गए अस्थायी डायवर्सन के धंसने से मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके कारण पिछले दो दिनों से हजारों घरों में पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद है।
इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। लोगों को पीने के पानी के लिए दूसरे मोहल्लों और हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, घरेलू कामकाज, स्कूल जाने वाले बच्चों और दुकानदारों की दिनचर्या भी इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुई है।
कैसे धंसा झीलिया डायवर्सन?
स्थानीय लोगों के अनुसार झीलिया पुल निर्माण कार्य के दौरान यातायात सुचारु रखने के लिए अस्थायी डायवर्सन बनाया गया था। इसी डायवर्सन के नीचे से पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन गुजर रही थी।
हाल के दिनों में लगातार दबाव और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण डायवर्सन का एक हिस्सा अचानक धंस गया। इसके साथ ही पाइपलाइन भी टूट गई और पूरे क्षेत्र की जलापूर्ति ठप हो गई। घटना के बाद सड़क पर भी आवागमन प्रभावित हुआ तथा मरम्मत कार्य शुरू होने तक स्थिति चिंताजनक बनी रही।
दो दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग
झीलिया, कुमारधुबी और आसपास के कई मोहल्लों में रहने वाले हजारों परिवार पिछले दो दिनों से पानी के लिए परेशान हैं। लोगों का कहना है कि सुबह-शाम नियमित मिलने वाला नल का पानी पूरी तरह बंद हो गया है।
ग्रामीण महिलाओं को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी भरना पड़ रहा है। बुजुर्गों और छोटे बच्चों वाले परिवारों के लिए स्थिति और भी कठिन हो गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि समय रहते विभाग ने कार्रवाई की होती तो संकट इतना बड़ा नहीं बनता।
एक ग्रामीण ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को इस तरह परेशान होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
PWD और PHED के बीच जिम्मेदारी का सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा विवाद लोक निर्माण विभाग (PWD) और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की जिम्मेदारी को लेकर सामने आया। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण और डायवर्सन की जिम्मेदारी एक विभाग के पास थी, जबकि जलापूर्ति पाइपलाइन दूसरे विभाग के अधीन आती है। ऐसे में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद तत्काल राहत कार्य शुरू नहीं हो सका।
यही कारण है कि दो दिनों तक लगभग 50 हजार लोगों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह बाधित रही।
डीडीसी के संज्ञान में पहुंचा मामला
पेयजल संकट की गंभीरता को देखते हुए मामला धनबाद के उप विकास आयुक्त (DDC) के संज्ञान में पहुंचा। अधिकारियों की ओर से तत्काल मरम्मत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्देश जारी होने के बावजूद मौके पर आवश्यक मशीनरी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे मरम्मत कार्य शुरू होने में अनावश्यक देरी हुई और लोगों की परेशानी बढ़ती गई।
निजी खर्च से गुलाम कुरैशी ने शुरू कराया मरम्मत कार्य
घटना की सूचना मिलने पर जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां की स्थिति का जायजा लिया और सरकारी व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
गुलाम कुरैशी का आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद मौके पर हाइड्रा, जेसीबी और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में उन्होंने इंतजार करने के बजाय अपने निजी पैसे से हाइड्रा और जेसीबी की व्यवस्था कर क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत का काम शुरू कराया।
उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग पानी के लिए परेशान हों, तब जनप्रतिनिधि होने के नाते चुप बैठना संभव नहीं है। प्राथमिकता लोगों तक जल्द से जल्द पानी पहुंचाना है।
ग्रामीणों में विभाग के खिलाफ भारी नाराजगी
मरम्मत कार्य के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों ने विभागीय लापरवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जलापूर्ति सरकारी जिम्मेदारी है, तो पाइपलाइन दुरुस्त कराने के लिए जनप्रतिनिधि को निजी संसाधन क्यों लगाने पड़े?
ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं बार-बार बाधित हो जाती हैं। लोगों ने मांग की कि पूरे मामले की जांच कर यह तय किया जाए कि डायवर्सन निर्माण और पाइपलाइन सुरक्षा में किस स्तर पर चूक हुई।
जलापूर्ति बहाल नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
जिला परिषद सदस्य गुलाम कुरैशी ने स्पष्ट कहा कि यदि जल्द जलापूर्ति सामान्य नहीं हुई तो संबंधित विभाग के अधिकारियों के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में डायवर्सन या पुल निर्माण के कारण पेयजल व्यवस्था प्रभावित न हो।
हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ उनकी तीखी टिप्पणी और उन्हें खंभे से बांधने संबंधी बयान को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा भी शुरू हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
फिलहाल जेसीबी और हाइड्रा की मदद से क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत जारी है। प्रशासन का प्रयास है कि जल्द से जल्द जलापूर्ति बहाल की जाए, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—
- डायवर्सन धंसने के लिए जिम्मेदार कौन है?
- पाइपलाइन की सुरक्षा सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?
- विभागों के बीच समन्वय की कमी का जवाबदेह कौन होगा?
- और आखिर 50 हजार लोगों को दो दिनों तक पानी के लिए क्यों तरसना पड़ा?
झीलिया का यह मामला अब केवल एक टूटी पाइपलाइन का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था, विभागीय जवाबदेही और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की विश्वसनीयता का बड़ा प्रश्न बन गया है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पानी की सप्लाई कब पूरी तरह बहाल होती है और प्रशासन जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाता है।