Dhanbad News : एनजीटी की रोक के बीच बालू का कथित खेल: डुमरकुंडा के स्टॉकिस्ट डिपो पर उठे गंभीर सवाल
Dhanbad News : वीडियो सामने आने के बाद निरसा में बालू के कथित अवैध उठाव, परिवहन और भंडारण पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
Dhanbad News : धनबाद के निरसा अनुमंडल स्थित डुमरकुंडा में मां कल्याणी एंटरप्राइज के बालू स्टॉकिस्ट डिपो से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद एनजीटी की रोक के बीच बालू के कथित अवैध कारोबार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चालान, स्टॉक और बालू के स्रोत की जांच की मांग उठ रही है।
धनबाद जिले के निरसा अनुमंडल में एक बार फिर बालू के कथित अवैध कारोबार को लेकर बहस तेज हो गई है। चिरकुंडा थाना क्षेत्र के डुमरकुंडा स्थित मां कल्याणी एंटरप्राइज के बालू स्टॉकिस्ट डिपो से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू घाट से बालू लाकर डिपो परिसर में डंप किए जाने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। इसलिए वीडियो में दिखाई गई गतिविधियों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। बावजूद इसके, वीडियो ने खनन व्यवस्था, परिवहन और भंडारण की वैधता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा विवाद इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि यदि डिपो में मौजूद बालू पहले से वैध स्टॉक का हिस्सा है, तो फिर ट्रैक्टरों के जरिए बालू घाट से नई बालू लाकर उसी डिपो में क्यों डंप की जा रही है?
स्थानीय लोगों का दावा है कि डुमरकुंडा और सुंदरनगर क्षेत्र के बालू घाटों से लगातार ट्रैक्टरों द्वारा बालू उठाई जा रही है। इसके बाद उसे सीधे स्टॉकिस्ट डिपो में जमा किया जाता है, जहां से आगे बड़े वाहनों के माध्यम से अन्य जिलों और राज्यों में भेजा जाता है।
यही कारण है कि अब केवल स्टॉक की वैधता नहीं, बल्कि बालू के स्रोत, चालान और उठाव की अनुमति भी जांच का विषय बन गए हैं।
सामने आए कथित वीडियो में कई ट्रैक्टर बालू लेकर डिपो परिसर में प्रवेश करते दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि ये ट्रैक्टर नजदीकी बालू घाटों से सीधे बालू लेकर पहुंचे थे।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि:
- ट्रैक्टर किस घाट से बालू लेकर आए?
- क्या उस घाट से उठाव की अनुमति थी?
- किस चालान के आधार पर बालू का परिवहन किया गया?
- डंप की गई मात्रा का रिकॉर्ड किस दस्तावेज में दर्ज है?
इन सभी सवालों का जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
महत्वपूर्ण: वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि संभव होगी।
डिपो संचालक की ओर से यह दावा किया जाता है कि मां कल्याणी एंटरप्राइज एक अधिकृत स्टॉकिस्ट है और उसके पास स्टॉक से संबंधित वैध चालान उपलब्ध हैं।
लेकिन कानूनी रूप से दो अलग-अलग बातें हैं—
- पहले से मौजूद वैध स्टॉक का रिकॉर्ड।
- किसी बालू घाट से नए सिरे से बालू उठाने की अनुमति।
यदि स्टॉक वैध है तो भी यह जांच जरूरी है कि क्या संबंधित अवधि में नए बालू उठाव की अनुमति थी या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टॉक चालान और परिवहन चालान दोनों का मिलान किए बिना स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती।
मौके पर मौजूद डिपो के मुंशी से भी यह जानने का प्रयास किया गया कि ट्रैक्टरों द्वारा लाई जा रही बालू किस चालान के आधार पर जमा की जा रही है।
पूछे गए प्रमुख सवाल थे—
- चालान किस स्थान का है?
- बालू किस घाट से लाई गई?
- किस तिथि का परिवहन दस्तावेज है?
- कितनी मात्रा में बालू जमा की गई?
बताया जा रहा है कि इन सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। यही वजह है कि पूरे मामले में पारदर्शी जांच की मांग और तेज हो गई है।
मामला अब केवल डुमरकुंडा के एक डिपो तक सीमित नहीं रह गया है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि निरसा अनुमंडल के कई क्षेत्रों—निरसा, पंचेत, चिरकुंडा और मैथन ओपी—में बालू के उठाव, परिवहन और भंडारण की निगरानी किस प्रकार की जा रही है।
यदि एनजीटी की रोक प्रभावी है, तो इतनी बड़ी मात्रा में बालू का परिवहन कैसे हो रहा है? क्या स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी है? क्या खनन विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा है? और यदि जानकारी है, तो अब तक क्या कार्रवाई की गई?
ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार डिपो से बालू बड़े हाइवा और ट्रकों के माध्यम से झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक भेजे जाने का भी दावा किया जा रहा है।
यदि यह दावा सही पाया जाता है, तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे मामलों में परिवहन से जुड़े दस्तावेज, ई-चालान, रॉयल्टी रसीद और स्टॉक रजिस्टर की जांच महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं।
हालांकि, इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रशासन और खनन विभाग के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं:
- क्या संबंधित घाटों से बालू उठाव की अनुमति जारी थी?
- ट्रैक्टरों के पास वैध परिवहन चालान थे या नहीं?
- स्टॉकिस्ट डिपो का भौतिक सत्यापन कब हुआ?
- स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भंडारण में समानता है या नहीं?
- एनजीटी के निर्देशों का पालन किस स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही मिल सकेगा।
फिलहाल स्थिति यह है कि एक वीडियो सामने आया है, आरोप लगाए जा रहे हैं और कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और डिपो संचालक की ओर से स्टॉकिस्ट होने का दावा किया जा रहा है।
ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक और तकनीकी जांच आवश्यक है। मां कल्याणी एंटरप्राइज के स्टॉक का सत्यापन, चालानों की जांच, बालू के स्रोत की पड़ताल और संबंधित घाटों से उठाव की अनुमति की जांच—ये सभी बिंदु इस मामले की सच्चाई सामने लाने में निर्णायक होंगे।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि धनबाद जिला प्रशासन और खनन विभाग इस पूरे प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं और क्या एनजीटी की रोक के बीच बालू के कथित अवैध उठाव के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है।