Dhanbad News : धनबाद पुलिस की ‘पुलिस पाठशाला’, स्कूली बच्चों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर
Dhanbad News : अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान, एसडीपीओ लिलेश्वर महतो ने फर्जी लिंक, फिशिंग और अनजान कॉल से सतर्क रहने की दी सलाह
Dhanbad News : धनबाद पुलिस ने चिरकुंडा के अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर में साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाकर छात्रों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, फिशिंग और साइबर अपराध से बचने के प्रभावी तरीके बताए। पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन पर तत्काल शिकायत करने की अपील भी की।
डिजिटल युग में इंटरनेट और स्मार्टफोन का उपयोग जितनी तेजी से बढ़ा है, उसी अनुपात में साइबर अपराध के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक, ओटीपी फ्रॉड, फिशिंग और डिजिटल धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से आम लोग ही नहीं, बल्कि बच्चे और छात्र भी प्रभावित हो रहे हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए धनबाद पुलिस ने साइबर जागरूकता अभियान को और अधिक व्यापक बनाने की पहल की है।
इसी क्रम में चिरकुंडा स्थित अग्रसेन सरस्वती विद्या मंदिर में धनबाद पुलिस द्वारा पुलिस पाठशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के व्यावहारिक उपाय सिखाना था।
जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
निरसा के एसडीपीओ लिलेश्वर महतो ने मुख्य वक्ता के रूप में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर बैंक खाते खाली कर रहे हैं। इसलिए तकनीक का उपयोग करते समय सतर्कता सबसे बड़ी सुरक्षा है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल स्वयं सुरक्षित रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि अपने माता-पिता, दादा-दादी और आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें अपनाकर साइबर अपराध से काफी हद तक बचा जा सकता है।
- किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें।
- फर्जी लिंक या संदिग्ध वेबसाइट पर कभी क्लिक न करें।
- ओटीपी, बैंक पासवर्ड और एटीएम विवरण किसी के साथ साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर मिलने वाले लुभावने ऑफर और इनाम के झांसे में न आएं।
- किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
- अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए फिशिंग मैसेज को तुरंत डिलीट करें।
एसडीपीओ लिलेश्वर महतो ने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर सरकारी अधिकारी, बैंक कर्मचारी या कूरियर एजेंट बनकर लोगों को फोन करते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय पहले जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण विषय सिम कार्ड सुरक्षा भी रहा। पुलिस अधिकारियों ने छात्रों और शिक्षकों को बताया कि कई साइबर अपराध दूसरों के दस्तावेजों पर जारी सिम कार्ड के माध्यम से किए जाते हैं।
पुलिस ने सलाह दी कि:
- अपने आधार या अन्य दस्तावेज किसी अजनबी को सिम लेने के लिए न दें।
- समय-समय पर यह जांच करें कि आपके नाम पर कितने सिम कार्ड सक्रिय हैं।
- जो सिम उपयोग में नहीं हैं, उन्हें तत्काल बंद करवा दें।
- खोए हुए मोबाइल या सिम की सूचना तुरंत संबंधित सेवा प्रदाता और पुलिस को दें।
इस जानकारी को छात्रों ने काफी रुचि के साथ सुना और कई प्रश्न भी पूछे।
कार्यक्रम में छात्राओं ऋतिक सिंह और प्रज्ञा मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा दी गई जानकारी उनके लिए बेहद उपयोगी रही और अब वे किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल पर भरोसा नहीं करेंगी।
छात्राओं ने यह भी कहा कि वे अपने परिवार के सदस्यों, विशेषकर बुजुर्गों को ऑनलाइन ठगी से बचने के उपाय जरूर बताएंगी ताकि वे साइबर अपराधियों का शिकार न बनें।
अपने संबोधन में एसडीपीओ लिलेश्वर महतो ने कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस नहीं जीत सकती। इसमें समाज, विद्यालय, अभिभावक और छात्रों की समान भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आज अधिकांश ठगी लोगों की जल्दबाजी, लालच या जानकारी के अभाव में होती है। यदि लोग किसी भी डिजिटल लेन-देन से पहले दो मिनट सोचें और जांच करें, तो अधिकांश साइबर अपराध रोके जा सकते हैं।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे डिजिटल नागरिक की जिम्मेदारी निभाते हुए इंटरनेट का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग करें।
धनबाद पुलिस ने कार्यक्रम के दौरान साइबर हेल्पलाइन 1930 की जानकारी भी दी। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन ठगी, यूपीआई फ्रॉड, बैंक धोखाधड़ी या किसी अन्य साइबर अपराध का शिकार होता है, तो बिना देर किए 1930 पर कॉल करना चाहिए।
साथ ही निकटतम थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में भी तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई। समय पर शिकायत करने से ठगी गई राशि को रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
इस जागरूकता अभियान में कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में चिरकुंडा नगर परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी, थाना प्रभारी आशुतोष कुमार, पुलिस निरीक्षक अर्जुन सिंह, विद्यालय निदेशक निलय गाड्यान, पार्षद मोहम्मद कलाम, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
सभी अतिथियों ने धनबाद पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विद्यालय स्तर पर ऐसे कार्यक्रम बच्चों को डिजिटल रूप से सशक्त और सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धनबाद पुलिस का यह साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि डिजिटल समाज को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है। आज जब बच्चे कम उम्र में ही इंटरनेट और स्मार्टफोन का उपयोग कर रहे हैं, तब उन्हें साइबर अपराध की पहचान और उससे बचाव की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।