Dhanbad News : मैथन डैम का घटता जलस्तर बना चिंता का विषय, पर्यटन कारोबार पर पड़ा असर
Dhanbad News : लगातार गिरते जलस्तर से सूखने लगे डैम के हिस्से, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और जलापूर्ति को लेकर बढ़ी चिंता
Dhanbad News : धनबाद से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित मैथन डैम इन दिनों घटते जलस्तर के कारण चर्चा में है। भीषण गर्मी, मरम्मत कार्य और हाइडल पावर प्लांट से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर 461 फीट तक पहुंच गया है। इसका असर पर्यटन, स्थानीय कारोबार और भविष्य की जलापूर्ति योजनाओं पर दिखाई देने लगा है।
धनबाद जिले से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित मैथन डैम, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जलाशय और पर्यटन गतिविधियों के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है, इन दिनों तेजी से घटते जलस्तर के कारण चिंता का विषय बन गया है। मानसून से पहले डैम का जलस्तर लगातार कम होकर करीब 461 फीट तक पहुंच गया है, जिससे डैम के कई हिस्से सूखते नजर आ रहे हैं और वर्षों से पानी में डूबे पत्थर और चट्टानें अब बाहर दिखाई देने लगी हैं।
मैथन डैम न केवल पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आसपास के कई क्षेत्रों के लिए जल संसाधन का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। ऐसे में जलस्तर में लगातार गिरावट लोगों के बीच चिंता बढ़ा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मरम्मत कार्य और गर्मी बनी बड़ी वजह
जानकारों के मुताबिक, डैम का जलस्तर घटने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। मानसून पूर्व डीवीसी द्वारा किए जा रहे मरम्मत कार्यों के चलते नियंत्रित तरीके से जलस्तर कम किया जा रहा है। इसके अलावा हाइडल पावर प्लांट के संचालन के लिए पानी छोड़ा जाना और लगातार पड़ रही भीषण गर्मी भी स्थिति को प्रभावित कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल गर्मियों में जलस्तर में कमी आती है, लेकिन इस बार कमी अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल रही है। तेज धूप और लगातार बढ़ते तापमान के कारण वाष्पीकरण की दर भी बढ़ गई है, जिससे पानी तेजी से कम हो रहा है।
पर्यटन कारोबार पर सबसे बड़ा असर
मैथन डैम क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन पर निर्भर करता है। यहां हर साल हजारों पर्यटक नौकायन, प्राकृतिक दृश्य और पिकनिक का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार जलस्तर घटने से पर्यटकों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है।
नाविकों का कहना है कि पानी कम होने के कारण नौकायन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई पर्यटक सुरक्षा कारणों से बोटिंग से बच रहे हैं। वहीं, डैम किनारे लगे खाने-पीने की दुकानों, छोटे व्यवसायियों और मनोरंजन गतिविधियों से जुड़े लोगों की आय पर भी सीधा असर पड़ा है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि पहले जहां सप्ताहांत में अच्छी भीड़ रहती थी, वहीं अब पर्यटकों की संख्या घटने से कारोबार कमजोर पड़ गया है। कई परिवारों की आय का मुख्य स्रोत पर्यटन ही है, इसलिए स्थिति उनके लिए आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
जलापूर्ति योजना को लेकर भी चिंता
पर्यटन के अलावा घटते जलस्तर का असर भविष्य की जलापूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। मैथन-धनबाद जलापूर्ति योजना के लिए यह डैम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में लोगों के बीच आशंका है कि अगर जलस्तर और नीचे गया, तो आने वाले समय में पेयजल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
हालांकि डीवीसी प्रबंधन ने फिलहाल किसी भी बड़े संकट से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य पूरा होने और मानसून आने के बाद जलस्तर सामान्य होने की उम्मीद है। साथ ही पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
मानसून से जुड़ी उम्मीदें
स्थानीय लोग और कारोबारी अब मानसून का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अच्छी बारिश होने पर डैम का जलस्तर बढ़ेगा और पर्यटन गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ेंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जल संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
फिलहाल मैथन डैम का घटता जलस्तर केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है।