Jharkhand Rajya Sabha Election : दावेदारों की बढ़ती कतार से महागठबंधन में बढ़ी हलचल, दो सीटों पर सस्पेंस बरकरार
Jharkhand Rajya Sabha Election : जयश्री सोरेन और अरूप चटर्जी की दावेदारी से तेज हुई सियासी सरगर्मी, उम्मीदवार चयन को लेकर महागठबंधन और भाजपा में मंथन जारी
Jharkhand Rajya Sabha Election : झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महागठबंधन और भाजपा दोनों ही अपने उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाए हैं। इस बीच जयश्री सोरेन और माले विधायक अरूप चटर्जी की दावेदारी ने राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक प्रमुख राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर नहीं लगा सके हैं। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद उम्मीदवारों को लेकर जारी असमंजस ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
महागठबंधन के भीतर इस बार कई नेताओं की दावेदारी सामने आने लगी है। खासकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) परिवार से जयश्री सोरेन की दावेदारी चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। स्वर्गीय शिबू सोरेन की पोती और सोरेन परिवार की नई पीढ़ी की प्रतिनिधि मानी जाने वाली जयश्री सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष राज्यसभा भेजे जाने की इच्छा जाहिर की है।
जयश्री सोरेन की दावेदारी को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाएं तेज हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने और दावेदारी पेश करने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और आलाकमान द्वारा लिया जाएगा और जो भी उम्मीदवार तय होगा, संगठन पूरी मजबूती के साथ उसके पक्ष में काम करेगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन और सामूहिक निर्णय की परंपरा रही है। इसलिए उम्मीदवार चयन के बाद सभी विधायक और कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनावी रणनीति को सफल बनाने में जुटेंगे।
दूसरी ओर, महागठबंधन को बाहर से समर्थन दे रही भाकपा (माले) लिबरेशन ने भी अपनी राजनीतिक दावेदारी को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है। निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने राज्यसभा सीट पर दावा ठोकते हुए कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से सरकार को समर्थन दे रही है, लेकिन सरकार और मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
अरूप चटर्जी ने कहा कि यदि गठबंधन सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने की बात करता है, तो राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार होना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से चर्चा की जाएगी। साथ ही अंतिम निर्णय पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व द्वारा लिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव केवल सीटों का चुनाव नहीं बल्कि गठबंधन की आंतरिक राजनीति और शक्ति संतुलन की परीक्षा भी साबित हो सकता है। महागठबंधन के भीतर अलग-अलग दलों और नेताओं की बढ़ती दावेदारी ने समीकरणों को जटिल बना दिया है।
भाजपा भी अभी तक अपने उम्मीदवारों के चयन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं ले पाई है। ऐसे में दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों में रणनीतिक बैठकों और मंथन का दौर जारी है। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद ही राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता रहा है, क्योंकि इसके जरिए न सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति में राज्य का प्रतिनिधित्व तय होता है, बल्कि दलों के भीतर शक्ति संतुलन और राजनीतिक संदेश भी निकलकर सामने आते हैं।
फिलहाल सभी की नजरें अब महागठबंधन और भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राज्य की राजनीति में और भी हलचल बढ़ने की संभावना है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि क्या महागठबंधन सभी सहयोगी दलों और नेताओं को संतुष्ट कर पाएगा या फिर दावेदारों की लंबी सूची नए राजनीतिक समीकरणों को जन्म देगी। आने वाले दिनों में इसका जवाब साफ हो जाएगा।