PF Fraud Dhanbad: रिटायर बीसीसीएल कर्मी के पीएफ से 35.5 लाख की ठगी का आरोप, राशि वापसी की मांग को लेकर परिवार अनिश्चितकालीन अनशन पर
PF Fraud Dhanbad : फर्जी हस्ताक्षर और चेक के जरिए निकासी का आरोप, बैंक कर्मियों और दलालों की मिलीभगत का दावा; रणधीर वर्मा चौक पर न्याय की लड़ाई जारी
PF Fraud Dhanbad : धनबाद में एक रिटायर बीसीसीएल कर्मी के पीएफ खाते से 35.50 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने बैंक कर्मियों और दलालों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए राशि वापसी, दोषियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है।
पीएफ राशि में कथित घोटाले से हिल गया परिवार, न्याय के लिए सड़क पर उतरे पीड़ित
धनबाद में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली जीवनभर की कमाई पर कथित ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। लोयाबाद थाना क्षेत्र के रहने वाले सेवानिवृत्त बीसीसीएल कर्मी वासदेव ठाकुर ने आरोप लगाया है कि उनके पीएफ खाते से फर्जी हस्ताक्षर और चेक के माध्यम से 35 लाख 50 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। इस मामले ने न सिर्फ पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित परिवार अब न्याय और अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने की मांग को लेकर धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गया है। परिवार का कहना है कि जब तक पूरी राशि वापस नहीं मिलती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
फर्जी हस्ताक्षर और चेक के जरिए निकासी का आरोप
परिवार के मुताबिक अक्टूबर 2025 में सेवानिवृत्ति के बाद वासदेव ठाकुर को पीएफ की पूरी राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि इसके कुछ समय बाद खाते से संदिग्ध तरीके से बड़ी रकम निकाली जाने लगी। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी हस्ताक्षर, नकली दस्तावेज और चेक का इस्तेमाल किया गया।
परिवार ने आरोप लगाया है कि बैंक कर्मियों और कुछ बिचौलियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी रकम की निकासी संभव नहीं हो सकती। उनका कहना है कि अगर बैंकिंग सिस्टम में निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जाता, तो इतनी बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी नहीं हो पाती।
जांच में अब तक सिर्फ 3.5 लाख रुपये बरामद
मामले की जांच के दौरान पुलिस अब तक लगभग 3.5 लाख रुपये बरामद कर चुकी है, लेकिन अभी भी करीब 32 लाख रुपये की रिकवरी बाकी है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि रकम को अलग-अलग राज्यों के कई खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे जांच और जटिल हो गई है।
परिवार का कहना है कि शुरुआती कार्रवाई के बावजूद जांच की रफ्तार धीमी है और अब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना है।
रणधीर वर्मा चौक पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू
राशि वापसी और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर परिवार ने धनबाद के प्रमुख स्थल रणधीर वर्मा चौक पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। अनशन में परिवार के सदस्यों के साथ स्थानीय लोग और कुछ सामाजिक कार्यकर्ता भी समर्थन दे रहे हैं।
अनशन पर बैठे परिवार का कहना है कि यह सिर्फ उनकी लड़ाई नहीं है, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की चिंता का विषय है, जिनकी रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा पीएफ पर निर्भर करती है।
परिवार की मुख्य मांगें क्या हैं?
पीड़ित परिवार ने प्रशासन और जांच एजेंसियों के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:
- पूरी 35.50 लाख रुपये की राशि वापस दिलाई जाए
- मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो
- बैंक कर्मियों और दलालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
- भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बैंकिंग सुरक्षा मजबूत की जाए
बढ़ते साइबर और बैंकिंग फ्रॉड के बीच बड़ा सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में बैंकिंग फ्रॉड, साइबर ठगी और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक खातों और रिटायरमेंट फंड से जुड़ी सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि आम लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सके।
फिलहाल पीड़ित परिवार अपनी राशि वापसी और न्याय की उम्मीद में आंदोलन कर रहा है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।