Dhanbad News : धनबाद में ‘वेस्ट मीट ईस्ट’ का संगम: संगीत और कथक की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
Dhanbad News : रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में वायलिन वादन और कथक नृत्य का अनूठा संगम देखने को मिला, युवा कलाकारों की प्रतिभा ने बटोरी खूब सराहना।
Dhanbad News : धनबाद के रेलवे ऑडिटोरियम में जिला चेंबर ऑर्केस्ट्रा द्वारा आयोजित ‘वेस्ट मीट ईस्ट’ कार्यक्रम में संगीत और नृत्य का शानदार संगम देखने को मिला। वायलिन सीख रहे बच्चों की प्रस्तुति और कथक नृत्यांगना श्रुति चंद्रा की विष्णु वंदना ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
झारखंड के धनबाद शहर में कला, संगीत और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिला। रेलवे ऑडिटोरियम में जिला चेंबर ऑर्केस्ट्रा की ओर से आयोजित ‘वेस्ट मीट ईस्ट’ थीम आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को भारतीय और पाश्चात्य कला के सुंदर मेल का अनुभव कराया। कार्यक्रम में संगीत और नृत्य की ऐसी प्रस्तुतियां देखने को मिलीं, जिन्होंने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वायलिन सीख रहे बच्चों का समूह रहा। कम उम्र के इन कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत का शानदार प्रदर्शन करते हुए वायलिन पर मधुर धुनें प्रस्तुत कीं। बच्चों की प्रस्तुति में आत्मविश्वास, लय और संगीत की समझ स्पष्ट रूप से दिखाई दी। जैसे-जैसे सुरों की मधुरता सभागार में गूंजती गई, दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे।
‘वेस्ट मीट ईस्ट’ की अवधारणा के अनुरूप कार्यक्रम में पश्चिमी संगीत और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम प्रस्तुत किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को संगीत और संस्कृति से जोड़ना तथा कला के विभिन्न स्वरूपों को एक मंच पर लाना था। कार्यक्रम में शामिल कलाकारों ने इस उद्देश्य को पूरी तरह सार्थक किया।
संगीत प्रस्तुति के बाद प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना श्रुति चंद्रा ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने भगवान विष्णु की वंदना ‘शांताकारम’ पर आधारित कथक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने बेहद सराहा। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु के दस अवतारों को नृत्य के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उनके भाव, मुद्राएं और तालमेल ने सभागार में मौजूद लोगों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया।
श्रुति चंद्रा की प्रस्तुति में कला और आध्यात्मिकता का अद्भुत समावेश देखने को मिला। कथक की बारीकियों, अभिव्यक्ति और मंच पर उनकी प्रभावशाली उपस्थिति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कई दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति को कार्यक्रम का सबसे यादगार हिस्सा बताया।
कार्यक्रम के दौरान संगीत शिक्षक बरतीन कालिहि ने कहा कि धनबाद में बच्चों और युवाओं के बीच संगीत के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि अब अभिभावक भी अपने बच्चों को संगीत शिक्षा दिलाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे शहर में कला और संस्कृति का माहौल मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को मंच प्रदान करते हैं और उनमें आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बरतीन कालिहि ने यह भी कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है। संगीत शिक्षा बच्चों में अनुशासन, एकाग्रता और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है। इसी कारण आज अधिक से अधिक परिवार अपने बच्चों को संगीत और अन्य कलाओं की शिक्षा दिलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
वहीं कथक नृत्यांगना श्रुति चंद्रा ने कार्यक्रम के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्हें धनबाद में प्रस्तुति देने का अवसर मिलना बेहद सुखद लगा। उन्होंने बताया कि वह देश के विभिन्न राज्यों में कई मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकी हैं, लेकिन धनबाद में भगवान विष्णु की वंदना प्रस्तुत करना उनके लिए एक विशेष अनुभव रहा। उन्होंने दर्शकों के प्रेम और उत्साह के लिए आभार भी व्यक्त किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला प्रेमी, अभिभावक, छात्र और शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रस्तुतियों की खुलकर सराहना की। आयोजन के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया।
धनबाद में आयोजित ‘वेस्ट मीट ईस्ट’ कार्यक्रम ने यह साबित किया कि कला और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती। जब भारतीय शास्त्रीय परंपराएं और पश्चिमी संगीत एक मंच पर मिलते हैं, तो एक नई रचनात्मक ऊर्जा का जन्म होता है। यह आयोजन न केवल कलाकारों के लिए एक मंच बना, बल्कि शहर के सांस्कृतिक जीवन को भी नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों को कला और संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धनबाद में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि यदि प्रतिभाओं को सही मंच और प्रोत्साहन मिले, तो वे अपनी कला से समाज को प्रेरित कर सकती हैं।