Dhanbad News : जर्मनी में धनबाद के युवक की संदिग्ध मौत: 21 दिनों से बेटे का शव भारत लाने के लिए पिता की गुहार, पीएम मोदी और सीएम हेमंत सोरेन से लगाई न्याय की अपील
Dhanbad News : बर्लिन में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई युवक की मौत के बाद धनबाद का परिवार गहरे सदमे में, शव स्वदेश लाने और निष्पक्ष जांच की मांग तेज।
Dhanbad News : धनबाद के सिंदरी निवासी तुफान मिश्रा की जर्मनी के बर्लिन में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 21 दिनों बाद भी शव भारत नहीं पहुंचने से परिवार परेशान है। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से हस्तक्षेप कर शव स्वदेश लाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
धनबाद जिले के सिंदरी क्षेत्र के एक परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिससे उबर पाना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। परिवार का इकलौता सहारा माने जाने वाले युवक तुफान मिश्रा की जर्मनी की राजधानी बर्लिन में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना को 21 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मृतक का शव भारत नहीं लाया जा सका है। इस कारण परिवार गहरे सदमे और मानसिक पीड़ा से गुजर रहा है।
परिजन लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और केंद्र व राज्य सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि बेटे का अंतिम दर्शन तक नहीं कर पाने का दर्द उन्हें अंदर से तोड़ रहा है। परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करने की अपील की है।
बर्लिन स्थित घर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत
जानकारी के अनुसार, धनबाद के सिंदरी के रंगामाटी निवासी 66 वर्षीय तपन मिश्रा के पुत्र तुफान मिश्रा जर्मनी के बर्लिन में नौकरी करते थे। बताया गया कि 5 जुलाई को बर्लिन स्थित उनके घर में संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई।
परिवार को इस घटना की जानकारी फोन के माध्यम से दी गई। मृतक के भाई ने बताया कि तुफान की पत्नी और उसके भाई ने फोन कर मौत की सूचना दी। अचानक मिली इस खबर से पूरा परिवार स्तब्ध रह गया और तभी से लगातार शव को भारत लाने की कोशिश में जुटा हुआ है।
सात साल पहले हुई थी शादी
परिजनों के अनुसार, तुफान मिश्रा की शादी लगभग सात वर्ष पहले ओडिशा की एक युवती से हुई थी। शादी के बाद दोनों जर्मनी में रहकर नौकरी कर रहे थे। परिवार का कहना है कि तुफान अपने माता-पिता के संपर्क में नियमित रूप से रहते थे और भविष्य में भारत लौटने की भी योजना बना रहे थे।
लेकिन अचानक उनकी संदिग्ध मौत की खबर ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। अब परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बेटे के शव को भारत लाना और उसकी मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाना है।
21 दिनों बाद भी नहीं पहुंचा शव
परिजनों का आरोप है कि घटना को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक शव भारत नहीं पहुंच सका है। उनका कहना है कि विदेश में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते मामला लंबा खिंच रहा है, लेकिन उन्हें कहीं से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा।
परिवार का कहना है कि हर गुजरते दिन के साथ उनकी पीड़ा और बढ़ती जा रही है। अंतिम संस्कार की सभी धार्मिक और पारिवारिक प्रक्रियाएं भी शव के भारत आने का इंतजार कर रही हैं।
सांसद और उपायुक्त से भी लगाई मदद की गुहार
शव को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए मृतक के परिवार ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क किया है। परिजनों ने धनबाद के सांसद तथा जिला उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर मदद की मांग की है।
परिवार का कहना है कि उन्होंने हर संभव प्रयास किया, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। इसी कारण उन्होंने मीडिया के माध्यम से अपनी पीड़ा सार्वजनिक करते हुए सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से लगाई भावुक अपील
तपन मिश्रा और उनके परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर उनके बेटे का शव भारत लाने में मदद की जाए।
परिवार का कहना है कि उन्हें केवल अपने बेटे का अंतिम दर्शन और सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करने का अवसर चाहिए। साथ ही वे चाहते हैं कि मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच भी कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
समाजसेवी ने भी उठाई न्याय की मांग
इस मामले में समाजसेवी धर्मेन्द्र खत्री ने भी परिवार की मांग का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यदि किसी भारतीय नागरिक की विदेश में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होती है, तो सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि विदेश में फंसे शव को जल्द स्वदेश लाने के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित किया जाए और यदि मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए।
विदेश में होने वाली ऐसी घटनाएं बढ़ाती हैं परिवारों की चिंता
विदेशों में काम करने वाले भारतीय नागरिकों की किसी भी अप्रत्याशित घटना में सबसे बड़ी चुनौती शव को भारत लाने की प्रक्रिया होती है। इसमें स्थानीय प्रशासन, अस्पताल, पुलिस, भारतीय दूतावास और विभिन्न कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करना पड़ता है, जिसके कारण कई बार प्रक्रिया लंबी हो जाती है।
ऐसी परिस्थितियों में पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता और समय पर समन्वय की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें अनावश्यक मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
परिवार को अब भी न्याय और बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार
तपन मिश्रा का परिवार पिछले 21 दिनों से हर दरवाजे पर मदद की गुहार लगा रहा है। माता-पिता अपने बेटे का अंतिम दर्शन करने के लिए व्याकुल हैं। परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि जल्द से जल्द शव भारत लाया जाए और मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।
अब सभी की नजर केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और विदेश मंत्रालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते हैं, तो शोकाकुल परिवार को अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने का अवसर मिल सकेगा और संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल हो सकती है।