Dhanbad News : फर्जी सिम और म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़, धनबाद पुलिस ने 6 आरोपियों को दबोचा
Dhanbad News : धनबाद पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए देशभर में साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल, फर्जी सिम और अन्य सामान जब्त किया है। जांच में ग्रामीणों के नाम पर 20 तक सिम कार्ड एक्टिवेट कर साइबर अपराधियों को बेचने का खुलासा हुआ है।
Dhanbad News : धनबाद पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी सिम कार्ड और म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए देशभर में साइबर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामान बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह के जरिए गरीब और सीधे-साधे ग्रामीणों के नाम पर बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी कर उन्हें साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था, जिनका इस्तेमाल देशभर में ऑनलाइन ठगी की वारदातों में किया जा रहा था।
शनिवार को आयोजित प्रेसवार्ता में ग्रामीण एसपी एस. मोहम्मद याकूब ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह कार्रवाई दूरसंचार विभाग से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर की गई। सूचना मिलने के बाद सिंदरी एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया। टीम ने बलियापुर और कालूबथान क्षेत्र में छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना शिवंजीत देव, उसके सहयोगी कृष्णा राज, तथा ग्रामीणों को झांसे में लेकर उनके दस्तावेज जुटाने वाले गोविंद बाउरी और मधुसूदन बाउरी समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार ये सभी मिलकर लंबे समय से फर्जी सिम और म्यूल बैंक अकाउंट का नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस पूरे मामले का खुलासा दूरसंचार विभाग के टीएएफसीओपी (TAFCOP) पोर्टल पर संदिग्ध गतिविधियों के विश्लेषण के दौरान हुआ। बलियापुर थाना क्षेत्र की एक मोबाइल दुकान की पीओएस मशीन के जरिए असामान्य संख्या में सिम कार्ड एक्टिवेट किए जा रहे थे। जब इसकी गहराई से जांच की गई तो पता चला कि शीतलपुर गांव के गरीब और अनपढ़ ग्रामीणों के नाम पर लगातार सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक ही व्यक्ति के नाम पर 11, 14, 15 और यहां तक कि 20 सिम कार्ड बेहद कम समय के अंतराल में एक्टिवेट किए गए थे। सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी संख्या में सिम कार्ड जारी होना संभव नहीं माना जाता। इससे पुलिस को बड़े साइबर नेटवर्क की आशंका हुई, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कई अहम खुलासे किए। उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य गांवों में जाकर गरीब लोगों को थोड़े पैसे और कमीशन का लालच देते थे। इसके बाद उन्हें मोबाइल दुकान पर ले जाकर उनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी कराए जाते थे। कई मामलों में ग्रामीणों को यह भी जानकारी नहीं होती थी कि उनके नाम पर कितने सिम कार्ड जारी किए जा रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि केवल सिम कार्ड ही नहीं, बल्कि उन्हीं ग्रामीणों के नाम पर बैंक ऑफ महाराष्ट्र, एयरटेल पेमेंट्स बैंक और पेटीएम पेमेंट्स बैंक में म्यूल बैंक अकाउंट भी खोले जाते थे। इन खातों के साथ जुड़े मोबाइल नंबर, पासबुक, एटीएम कार्ड और अन्य बैंकिंग सुविधाओं का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधियों को सौंप दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार इन म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और उसे छिपाने के लिए किया जाता था। साइबर अपराधी इन खातों के जरिए ठगी की रकम निकालते थे, जिससे जांच एजेंसियों को वास्तविक अपराधियों तक पहुंचने में कठिनाई होती थी। यही वजह है कि ऐसे बैंक खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) की जांच में इन सिम कार्ड और बैंक खातों से जुड़े देशभर के कई साइबर ठगी मामलों के एक्नॉलेजमेंट नंबर भी मिले हैं। इससे स्पष्ट हुआ कि धनबाद से संचालित यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
ग्रामीण एसपी ने बताया कि मुख्य आरोपी शिवंजीत देव का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। कई संदिग्धों को नामजद किया गया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से भी जुड़े हो सकते हैं। इसलिए मामले की जांच को और विस्तारित किया जा रहा है। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि साइबर नेटवर्क के पूरे तंत्र का खुलासा हो सके।
धनबाद पुलिस ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। ग्रामीण एसपी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को थोड़े से पैसे या कमीशन के लालच में अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य दस्तावेज किसी अजनबी को नहीं देने चाहिए। अपने नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति के लिए सिम कार्ड जारी करवाना या बैंक खाता खुलवाना गंभीर अपराध साबित हो सकता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति के नाम पर जारी सिम कार्ड या बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में होता है तो संबंधित व्यक्ति को भी कानूनी जांच और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए नागरिकों को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को देनी चाहिए।
धनबाद पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों के बीच इस तरह के संगठित गिरोहों पर कार्रवाई से न केवल साइबर अपराधियों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी, बल्कि आम लोगों को भी जागरूक होकर अपने दस्तावेजों और बैंक खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है।