IIT-ISM Dhanbad में 20वीं नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग संगोष्ठी का आगाज, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने युवाओं से कहा- देश की जरूरतों के अनुरूप विकसित करें नई तकनीक
IIT-ISM Dhanbad में 20वीं नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग संगोष्ठी और इनोवेशन इन मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने युवाओं से देश की जरूरतों के अनुरूप नई तकनीक विकसित करने का आह्वान किया और धनबाद में MSME डिफेंस कॉन्क्लेव आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
IT-ISM Dhanbad स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-ISM) में शुक्रवार से तीन दिवसीय 20वीं नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग (NFoE) संगोष्ठी एवं इनोवेशन इन मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ। देशभर से आए इंजीनियरों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों, शोधार्थियों और छात्रों की मौजूदगी में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए देश की आवश्यकताओं के अनुरूप नई तकनीक और नवाचार विकसित करने का आह्वान किया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा शक्ति देश को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रही है। उन्होंने कहा कि केवल नई तकनीक विकसित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करने की आवश्यकता है जो भारत की वास्तविक जरूरतों को पूरा करे और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दे। उन्होंने छात्रों और शोधार्थियों से अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी समाधान को समाज और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने की अपील की।
संजय सेठ ने अपने संबोधन में भारत के तेजी से विकसित होते स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि लगभग 12 वर्ष पहले देश में स्टार्टअप की संख्या करीब 600 थी, जबकि आज यह बढ़कर लगभग 2.36 लाख तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव देश में नवाचार की बढ़ती संस्कृति और युवाओं की रचनात्मक क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और अब देश का लक्ष्य तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के शैक्षणिक संस्थान, उद्योग और शोध संस्थान एक साथ मिलकर काम करेंगे। IIT-ISM जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जहां देशभर के प्रतिभाशाली छात्र नई तकनीकों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहें, बल्कि ऐसे समाधान तैयार करें जो देश की रक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण और विनिर्माण क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान बन सकें।
कार्यक्रम के दौरान संजय सेठ ने झारखंड के औद्योगिक विकास पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में खनिज संपदा, औद्योगिक आधार और तकनीकी संस्थानों की उपलब्धता झारखंड को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं प्रदान करती है। उन्होंने स्थानीय उद्योगों और MSME सेक्टर को रक्षा उत्पादन से जोड़ने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग देश की रक्षा निर्माण प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इसी क्रम में उन्होंने धनबाद में MSME डिफेंस कॉन्क्लेव आयोजित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार का आयोजन धनबाद में होता है तो स्थानीय उद्योगों, स्टार्टअप, उद्यमियों और युवाओं को रक्षा क्षेत्र से जुड़ने का बेहतर अवसर मिलेगा। साथ ही उद्योगों को नई तकनीक, निवेश और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी प्राप्त होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस दिशा में वह हरसंभव प्रयास करेंगे ताकि धनबाद को रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
IIT-ISM में आयोजित यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आधुनिक इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, स्मार्ट मटेरियल, रोबोटिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग, इंडस्ट्री 4.0 और आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी नई तकनीकों पर केंद्रित है। इस आयोजन में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग जगत के विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे तथा भविष्य की तकनीकी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे।
संगोष्ठी का उद्देश्य केवल तकनीकी विषयों पर चर्चा करना ही नहीं बल्कि शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अकादमिक संस्थान और उद्योग मिलकर कार्य करें तो नई तकनीकों का विकास तेजी से होगा और उनका व्यावसायिक उपयोग भी बढ़ेगा। इससे भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी नेतृत्व की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकेगा।
कार्यक्रम में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अशोक कुमार पांडा, इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग (INAE) के अध्यक्ष जे. डी. पाटिल सहित कई प्रमुख वैज्ञानिक, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ और गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने इंजीनियरिंग शिक्षा को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने तथा अनुसंधान आधारित नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, उद्योग प्रतिनिधि, स्टार्टअप, MSME उद्यमी और बड़ी संख्या में छात्र भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न तकनीकी सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान, पैनल चर्चा और शोध प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। प्रतिभागी आधुनिक विनिर्माण तकनीकों, भविष्य की इंजीनियरिंग चुनौतियों और आत्मनिर्भर भारत के लिए आवश्यक तकनीकी नवाचारों पर अपने विचार साझा करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन न केवल छात्रों और शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान करते हैं, बल्कि उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को भी मजबूत बनाते हैं। इससे नई तकनीकों के विकास के साथ-साथ उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया भी तेज होती है।
IIT-ISM धनबाद में आयोजित 20वीं नेशनल फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग संगोष्ठी से यह उम्मीद की जा रही है कि यहां होने वाले विचार-विमर्श और तकनीकी समाधान भारत के औद्योगिक विकास, उन्नत विनिर्माण, रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देंगे। साथ ही यह आयोजन देश के युवाओं को अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा तथा भारत को वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।