Dhanbad News : रेलवे अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम का जोरदार विरोध, जेसीबी के आगे लेटा पीड़ित
Dhanbad News : बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप, मुआवजे और पुनर्वास की मांग पर भड़के लोग
Dhanbad News : धनबाद के विनोद नगर में रेलवे प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने जोरदार विरोध किया। जेसीबी मशीन के आगे लेटकर एक पीड़ित ने कार्रवाई रोकने की मांग की। लोगों ने बिना नोटिस और बिना मुआवजे कार्रवाई का आरोप लगाते हुए रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बढ़ते हंगामे के बाद अधिकारियों को फिलहाल अभियान रोकना पड़ा।
धनबाद के विनोद नगर इलाके में गुरुवार को रेलवे प्रशासन की ओर से चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान भारी हंगामा देखने को मिला। रेलवे अधिकारियों की टीम धनबाद अंचल कार्यालय के अधिकारियों और जेसीबी मशीनों के साथ इलाके में पहुंची थी, जहां कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जानी थी। लेकिन जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, स्थानीय लोग विरोध में उतर आए और पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि रेलवे प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना और बिना उचित नोटिस दिए अचानक कार्रवाई शुरू कर दी। लोगों का कहना है कि वर्षों से वे इसी इलाके में रह रहे हैं और कई परिवारों की रोजी-रोटी वहीं स्थित दुकानों और मकानों पर निर्भर है। ऐसे में बिना पुनर्वास और बिना मुआवजे के घर-दुकान तोड़ने की कार्रवाई पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवक सड़क पर उतर आए। लोगों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग की। इसी दौरान एक पीड़ित व्यक्ति जेसीबी मशीन के सामने जाकर लेट गया और प्रशासन से गुहार लगाने लगा कि पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही कोई कार्रवाई की जाए। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों की भावनाएं और भी उग्र हो गईं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि यदि प्रशासन को अतिक्रमण हटाना ही है तो पहले सभी प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ समय तक प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई। लोगों का आरोप था कि प्रशासन गरीब परिवारों को उजाड़ने पर तुला हुआ है, जबकि दूसरी ओर अधिकारियों का कहना था कि रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि बढ़ते विरोध और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए प्रशासन को फिलहाल कार्रवाई रोकनी पड़ी।
काफी देर तक चले हंगामे के बाद रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम बिना कार्रवाई किए वापस लौट गई। इलाके में स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को तैनात रखा गया ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो सके। फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बना हुआ है।
वहीं सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी अतिक्रमण हटाओ अभियान से पहले मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। अचानक कार्रवाई से गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि बिना समाधान और पुनर्वास के दोबारा कार्रवाई की गई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। विनोद नगर में हुई इस घटना ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाओ अभियानों के दौरान पुनर्वास और मानवीय दृष्टिकोण को लेकर बहस छेड़ दी है।