Dhanbad News : धनबाद के जागृत मंदिर में राम-सीता विवाह महोत्सव, मंगल गीतों और भव्य झांकियों से भक्तिमय हुआ माहौल
Dhanbad News : चिरागोड़ा स्थित जागृत मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन राम-सीता विवाह महोत्सव का भव्य आयोजन, उज्ज्वल शांडिल्य जी महाराज ने राम और सीता के आदर्शों को जीवन में अपनाने का दिया संदेश।
Dhanbad News : धनबाद के चिरागोड़ा स्थित जागृत मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान राम-सीता विवाह महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। भव्य झांकियों, मंगल गीतों और प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति का संदेश दिया गया।
धनबाद: चिरागोड़ा स्थित जागृत मंदिर में आयोजित तृतीय प्राण प्रतिष्ठा वार्षिकोत्सव के अवसर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह महोत्सव के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। मंगल गीतों, शंखनाद, पुष्पवर्षा और जयघोषों के बीच प्रस्तुत किए गए विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पूरे परिसर में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बना कि उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्वयं को त्रेतायुग का साक्षी महसूस किया।
इस अवसर पर प्रसिद्ध कथावाचक उज्ज्वल शांडिल्य जी महाराज ने अपने प्रेरणादायक प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि धर्म और शक्ति, मर्यादा और करुणा, आदर्श और समर्पण का दिव्य संगम है। उन्होंने कहा कि यह विवाह सनातन संस्कृति के उन मूल्यों का प्रतीक है, जो आज भी समाज और परिवार को दिशा देने का कार्य करते हैं।
राम का चरित्र मानव जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा
अपने प्रवचन में महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन को मानवता के लिए आदर्श बताते हुए कहा कि चरित्र ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण होता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अपने जीवन में पुत्र, भाई, पति और राजा के रूप में प्रत्येक जिम्मेदारी को मर्यादा और कर्तव्य के साथ निभाया। यही कारण है कि उन्हें “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, सेवा, त्याग और कर्तव्य का पालन करे तो उसका जीवन भी राममय बन सकता है। परिवार और समाज की मजबूती का आधार अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य ही होते हैं।
माता सीता त्याग, धैर्य और नारी सम्मान की प्रतिमूर्ति
उज्ज्वल शांडिल्य जी महाराज ने माता सीता के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे त्याग, धैर्य, पवित्रता और नारी गरिमा की अनुपम प्रतिमूर्ति हैं। उन्होंने कहा कि माता सीता का जीवन आज भी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्श बताते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, आत्मसम्मान और संस्कारों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में परिवारों में सुख, शांति और प्रेम तभी संभव है, जब राम जैसा आदर्श पुत्र, भाई और पति बनने का प्रयास किया जाए तथा माता सीता जैसी मर्यादा, सहनशीलता और संस्कारों का सम्मान किया जाए।
‘भव्यता नहीं, दिव्यता का उत्सव बने विवाह’
प्रवचन के दौरान महाराज ने आधुनिक समाज में विवाह समारोहों की बदलती परंपराओं पर भी विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दिखावे और भव्य आयोजन का माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि यह दो परिवारों, संस्कारों और विश्वास का पवित्र मिलन है।
उन्होंने कहा कि जहां विश्वास होता है, वहां परिवार बसते हैं। जहां संस्कार होते हैं, वहां पीढ़ियां संवरती हैं और जहां भगवान श्रीराम के आदर्शों का पालन होता है, वहां जीवन स्वतः मंगलमय बन जाता है। उन्होंने युवाओं से विवाह को सामाजिक जिम्मेदारी और आध्यात्मिक बंधन के रूप में स्वीकार करने की अपील की।
भव्य झांकियों ने जीवंत कर दिया जनकपुर का दृश्य
कथा के उपरांत भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह महोत्सव की आकर्षक एवं मनोहारी झांकियों का मंचन किया गया। जनकपुर की राजसभा, स्वयंवर, भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग, विवाह मंडप और विवाह संस्कारों की सजीव प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इन झांकियों में धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। पुष्पवर्षा, मंगल गीत, शहनाई की मधुर धुन और “जय श्रीराम” तथा “सीताराम” के जयघोष से पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
श्रद्धालुओं ने विवाह महोत्सव में उत्साहपूर्वक भाग लिया और भगवान श्रीराम एवं माता सीता के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कार्यक्रम के दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति से सराबोर रहा।
सनातन संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का दिया संदेश
कथा के समापन अवसर पर उज्ज्वल शांडिल्य जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मर्यादा से महानता, सेवा से सम्मान और प्रेम से परमात्मा की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार श्रीराम और माता सीता के आदर्शों का अनुसरण करे तो समाज में प्रेम, सौहार्द, नैतिकता और संस्कारों की नई चेतना का संचार होगा। आज के समय में समाज को सबसे अधिक आवश्यकता ऐसे ही आदर्शों और मूल्यों की है, जो परिवारों को जोड़ने और नई पीढ़ी को सही दिशा देने का कार्य करें।
श्रद्धा और भक्ति का बना अविस्मरणीय पर्व
राम-सीता विवाह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सनातन परंपरा का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही और सभी ने भक्ति, उल्लास तथा आध्यात्मिक आनंद के साथ आयोजन में सहभागिता की।
जागृत मंदिर में आयोजित यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर याद रहने वाला आध्यात्मिक अनुभव बन गया। मंगल गीतों, भव्य झांकियों, प्रेरणादायक प्रवचनों और भगवान श्रीराम-माता सीता के दिव्य विवाह प्रसंग ने सभी भक्तों के हृदय में भक्ति और संस्कारों की नई ऊर्जा का संचार किया।