Jamadoba Land Subsidence : बड़कीटांड़-जीतपुर रोड पर सड़क किनारे बना बड़ा गोफ, तीन साल बाद फिर दोहराई घटना
Jamadoba Land Subsidence : धनबाद के जामाडोबा में सड़क किनारे अचानक धंसी जमीन, ग्रामीणों ने कोलियरी प्रबंधन पर लगाया लापरवाही का आरोप; हजारों लोगों की आवाजाही वाले मार्ग पर मंडरा रहा हादसे का खतरा
Jamadoba Land Subsidence : धनबाद जिले के जामाडोबा क्षेत्र में एक बार फिर भू-धंसान की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जामाडोबा के बड़कीटांड़-जीतपुर रोड पर रविवार देर शाम अचानक जमीन धंस जाने से सड़क किनारे बड़ा गोफ बन गया। यह घटना ऐसे समय हुई जब इलाके में सामान्य आवाजाही जारी थी। हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
सोमवार तक भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया। प्रशासन की ओर से केवल प्रभावित स्थान पर बैरिकेडिंग कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक संबंधित विभाग या कोलियरी प्रबंधन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचा है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

तेज आवाज के साथ धंसी जमीन, सड़क किनारे बना विशाल गोफ
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रविवार देर शाम अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। जब लोग मौके पर पहुंचे तो देखा कि सड़क किनारे की जमीन धंस चुकी थी और वहां बड़ा गोफ बन गया था। देखते ही देखते आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। सुरक्षा के मद्देनजर क्षेत्र को अस्थायी रूप से बैरिकेडिंग कर घेर दिया गया, ताकि कोई व्यक्ति गलती से उस हिस्से के करीब न पहुंचे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोफ का आकार धीरे-धीरे बढ़ता नजर आ रहा है। यदि समय रहते आवश्यक तकनीकी उपाय नहीं किए गए तो सड़क का बड़ा हिस्सा भी धंस सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है यह सड़क
बड़कीटांड़-जीतपुर रोड क्षेत्र की प्रमुख संपर्क सड़क है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं। स्थानीय निवासी, स्कूली छात्र, नौकरीपेशा लोग और छोटे-बड़े वाहन इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।
ऐसे में सड़क के किनारे भू-धंसान होने से लोगों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गोफ का विस्तार जारी रहा तो सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिससे यातायात प्रभावित होगा और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।
तीन साल पहले भी हुई थी ऐसी ही घटना
स्थानीय निवासी मोहम्मद निजाम अंसारी के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब इस स्थान पर भू-धंसान हुआ हो। उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष पहले भी इसी जगह जमीन धंसी थी। उस समय भी प्रशासन और संबंधित प्रबंधन को जानकारी दी गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय केवल अस्थायी मरम्मत कर मामले को शांत कर दिया गया, लेकिन भू-धंसान के मूल कारणों को दूर करने की दिशा में कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया। परिणामस्वरूप अब फिर उसी स्थान पर जमीन धंस गई है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
कोलियरी प्रबंधन पर ग्रामीणों का गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने इस घटना के लिए संबंधित कोलियरी प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि भूमिगत कोयला खनन के बाद जिन स्थानों पर नियमानुसार बालू भराव (Sand Stowing) किया जाना चाहिए था, वहां पर्याप्त भराव नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि इसके कारण जमीन के नीचे बड़े पैमाने पर खाली स्थान बन गए हैं। समय के साथ ऊपर की सतह कमजोर होती गई और अब लगातार भू-धंसान की घटनाएं सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमिगत खदानों का वैज्ञानिक तरीके से भराव किया गया होता तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
अब तक नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी
ग्रामीणों के अनुसार घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद मौके पर किसी वरिष्ठ अधिकारी ने पहुंचकर स्थिति का जायजा नहीं लिया। केवल बैरिकेडिंग कर औपचारिकता पूरी कर दी गई है।
लोगों का कहना है कि जब तक विशेषज्ञों की टीम मौके का निरीक्षण कर भू-धंसान के वास्तविक कारणों का पता नहीं लगाएगी, तब तक खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि संभावित बड़े हादसे को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
तकनीकी जांच और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और संबंधित कोलियरी प्रबंधन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही भू-धंसान वाले हिस्से की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत कर भूमिगत खाली स्थानों का सुरक्षित भराव कराया जाए।
लोगों ने यह भी मांग की है कि पूरे क्षेत्र का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसे अन्य संभावित स्थानों की पहचान कर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जा सकें।
बड़े हादसे की आशंका से सहमे लोग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो यह भू-धंसान सड़क के बड़े हिस्से तक फैल सकता है। इससे न केवल यातायात पूरी तरह बाधित हो सकता है बल्कि आसपास बसे लोगों के घरों और जान-माल पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि खनन क्षेत्रों में भू-धंसान जैसी घटनाओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। प्रारंभिक स्तर पर ही वैज्ञानिक जांच और प्रभावी मरम्मत से बड़े हादसों को रोका जा सकता है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद
फिलहाल स्थानीय लोग प्रशासन और संबंधित कोलियरी प्रबंधन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि केवल बैरिकेडिंग से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि प्रभावित क्षेत्र की तत्काल जांच कराकर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जामाडोबा के बड़कीटांड़-जीतपुर रोड पर बना यह गोफ भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ऐसे में प्रशासन, खनन विभाग और कोलियरी प्रबंधन के बीच समन्वय बनाकर जल्द से जल्द प्रभावी कार्रवाई करना आवश्यक माना जा रहा है।