Dhanbad News : धनबाद सांसद ढुल्लू महतो पर जमीन कब्जाने का आरोप, रवानी परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
Dhanbad News : भुली ओपी क्षेत्र में 96 डिसमिल रैयती जमीन को लेकर बढ़ा विवाद, प्रेसवार्ता में सांसद सहित तीन लोगों पर गंभीर आरोप, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
Dhanbad News : धनबाद सांसद ढुल्लू महतो पर भुली ओपी क्षेत्र में 96 डिसमिल रैयती जमीन पर जबरन कब्जा करने का आरोप लगा है। रवानी परिवार ने प्रेसवार्ता कर निष्पक्ष जांच, रैयतों के अधिकारों की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
धनबाद में एक बार फिर राजनीतिक और जमीन विवाद ने तूल पकड़ लिया है। धनबाद के सांसद ढुल्लू महतो इस बार भुली ओपी क्षेत्र स्थित 96 डिसमिल रैयती जमीन को लेकर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। पहले से ही निरसा विधायक के साथ चल रहे विवाद के बीच अब रवानी परिवार ने सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी पुश्तैनी रैयती जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
गांधी सेवा सदन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान रवानी परिवार ने सांसद ढुल्लू महतो के साथ-साथ भोला साव और सुभाष यादव पर भी जमीन कब्जाने, धमकी देने और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। परिवार का कहना है कि यह मामला केवल जमीन का नहीं बल्कि उनके जीवन-यापन और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
तीन महीने से प्रताड़ना का आरोप
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए लक्ष्मण रवानी ने कहा कि पिछले लगभग तीन महीनों से उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रैयती जमीन पर बिना किसी पूर्व सूचना के 19 खंभे लगाने के लिए गड्ढे खोद दिए गए।
लक्ष्मण रवानी के अनुसार, जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने जेसीबी मशीन से उन गड्ढों को भरवा दिया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई उनकी अनुमति के बिना की गई थी, जिससे परिवार में चिंता और असुरक्षा का माहौल बन गया।
ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट कराने के बाद शुरू हुआ घेराबंदी का काम
रवानी परिवार का कहना है कि जमीन से संबंधित कुछ दस्तावेज पहले ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। हाल ही में उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेजों को ऑनलाइन अपडेट कराया, जिसके बाद उन्होंने अपनी जमीन की घेराबंदी शुरू की।
परिवार का आरोप है कि घेराबंदी का कार्य शुरू होने के कुछ ही समय बाद शाम के वक्त कुछ लोग मौके पर पहुंचे और प्रशासन के सहयोग से काम रुकवा दिया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया।
एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव देने का भी आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान लक्ष्मण रवानी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सांसद ढुल्लू महतो ने उन्हें अपने आवास पर बुलाया था। उनका दावा है कि वहां उन्हें कथित रूप से एक करोड़ रुपये लेकर जमीन छोड़ देने का प्रस्ताव दिया गया।
लक्ष्मण रवानी ने कहा कि उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार यही 96 डिसमिल रैयती जमीन है। इसलिए किसी भी आर्थिक प्रस्ताव के बदले वे अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार कानूनी रूप से अपनी जमीन की रक्षा करेगा और न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेगा।
रैयतों के अधिकारों की रक्षा की मांग
रवानी परिवार ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि उनकी जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश हुई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
परिवार ने यह भी मांग की कि रैयतों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को अपनी वैध जमीन के लिए संघर्ष न करना पड़े।
चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज ने भी दिया समर्थन
प्रेसवार्ता में अखिल भारतीय चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज के प्रतिनिधि विनोद रवानी भी मौजूद रहे। उन्होंने रवानी परिवार के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी रैयत की जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
धनबाद में यह मामला सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। सांसद ढुल्लू महतो पहले भी विभिन्न मुद्दों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में इस नए आरोप ने जिले की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
हालांकि, इस मामले में रवानी परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि भविष्य में सांसद या अन्य आरोपित पक्ष की ओर से कोई बयान जारी किया जाता है, तो उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा ताकि सभी पक्षों की बात पाठकों तक पहुंच सके।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद
फिलहाल पूरा मामला आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। रवानी परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर भरोसा है तथा वे निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं। दूसरी ओर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस विवाद की जांच किस प्रकार करता है और तथ्यों के आधार पर क्या कार्रवाई होती है।