Dhanbad News : धनबाद में उद्यमिता पर सेमिनार, प्रो. देबज्योति ने युवाओं को किया प्रेरित
Dhanbad News : “रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा” — प्रो. देबज्योति मुखर्जी
Dhanbad News : धनबाद में आयोजित उद्यमिता सेमिनार में अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रो. देबज्योति मुखर्जी ने युवाओं और छात्राओं को स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और उद्यमिता के महत्व से अवगत कराया। मानव विकास कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में युवाओं को नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
Dhanbad News : धनबाद में गुरुवार को युवाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमिता के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक सेमिनार का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक और प्रसिद्ध वक्ता प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेकर छात्र-छात्राओं को उद्यमिता और स्वरोजगार के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
यह सेमिनार मानव विकास कल्याण समिति द्वारा आशा किरण और ब्राइटर स्टेप संस्थान के सहयोग से “उद्यमिता ही क्यों?” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम अभय सुंदरी गर्ल्स मध्य विद्यालय, ईस्ट एंड स्कूल और बड्स गार्डन में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने कहा कि वर्तमान समय में केवल सरकारी या निजी नौकरी पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बदलते आर्थिक परिवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि उद्यमिता केवल व्यवसाय शुरू करना नहीं है, बल्कि यह समाज और देश के विकास में योगदान देने का माध्यम भी है।
अभय सुंदरी गर्ल्स मध्य विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं को विशेष रूप से प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो युवा छात्राएं भी सफल उद्यमी बन सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को अपने कौशल को पहचानने और छोटे स्तर से ही व्यवसायिक सोच विकसित करने की सलाह दी।
सेमिनार की मुख्य आयोजिका प्रियदर्शिनी यादव ने कहा कि आज के समय में लाखों युवा नौकरी की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में उद्यमिता एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि संस्था का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रेरित करना ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षण, पूंजी और हैंड होल्डिंग सपोर्ट उपलब्ध कराकर सफल उद्यमी बनाना भी है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं में कई प्रतिभाएं छिपी हुई हैं, लेकिन सही दिशा और अवसर की कमी के कारण वे आगे नहीं बढ़ पाते। संस्था ऐसे युवाओं को पहचान कर उन्हें व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने अपने संबोधन में वैश्विक महामारी और बढ़ती महंगाई का उल्लेख करते हुए कहा कि कोरोना काल के बाद पूरी दुनिया में रोजगार की स्थिति बदली है। ऐसे समय में स्वरोजगार और स्टार्टअप संस्कृति युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे व्यवसाय भी बड़े स्तर पर रोजगार सृजन कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे युवा देश के लिए उद्यमिता बेहद जरूरी है। यदि देश का युवा आत्मनिर्भर बनता है तो इससे न केवल उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने युवाओं से अपने अंदर छिपी क्षमता को पहचानने और जोखिम उठाने का साहस विकसित करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने भी कई सवाल पूछे और उद्यमिता से जुड़ी जानकारियां हासिल कीं। सेमिनार में उपस्थित शिक्षकों और अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवाओं के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सेमिनार के अंत में आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में धनबाद सहित झारखंड के अन्य जिलों में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित किया जा सके।