BCCL Land Encroachment News: बाघमारा में बीसीसीएल पर 28 एकड़ सरकारी-रैयती जमीन अतिक्रमण का आरोप, जांच के बाद निर्माण कार्य पर रोक
BCCL Land Encroachment News : बाघमारा अंचल प्रशासन की जांच में बिना लीज और अनुमति के निर्माण का दावा, बीसीसीएल ने आरोपों से किया इनकार
BCCL Land Encroachment News : धनबाद के बाघमारा अंचल क्षेत्र में बीसीसीएल पर करीब 28 एकड़ सरकारी और रैयती भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य कराने का गंभीर आरोप लगा है। अंचल प्रशासन की प्रारंभिक जांच में कई स्थायी संरचनाओं के निर्माण का मामला सामने आने के बाद मापी और विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
धनबाद जिले के बाघमारा अंचल क्षेत्र में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) पर सरकारी और रैयती भूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। प्रशासनिक जांच में दावा किया गया है कि तेतुलमारी टाउनशिप क्षेत्र के नगरीकला मौजा में लगभग 28 एकड़ भूमि पर बिना वैध लीज या सरकारी अनुमति के कई निर्माण कार्य किए गए हैं। इस खुलासे के बाद अंचल प्रशासन ने विस्तृत जांच शुरू कर दी है और संबंधित क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगरीकला मौजा में बीसीसीएल द्वारा कथित रूप से जीएम बंगले, सैकड़ों आवासीय क्वार्टर, सड़क, पार्क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण कराया गया। बताया जा रहा है कि इन निर्माण कार्यों की शुरुआत वर्ष 2015 के आसपास हुई थी और वर्षों से यह कार्य चलता रहा। हालांकि अब अंचल प्रशासन की जांच में इस भूमि के स्वामित्व और उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले के सामने आने के बाद भूमि की मापी, रिकॉर्ड सत्यापन और दस्तावेजों की जांच का काम तेज कर दिया गया है।
बाघमारा के अंचल अधिकारी गिरजानंद किस्कू ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अतिक्रमण का प्रतीत हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में भूमि उपयोग और स्वामित्व से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं, जिनकी गहन पड़ताल की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद यदि अतिक्रमण की पुष्टि होती है, तो लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1956 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन फिलहाल पूरे मामले में राजस्व अभिलेखों और जमीन के दस्तावेजों की समीक्षा कर रहा है।
दूसरी ओर, बीसीसीएल प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज किया है। बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि कंपनी किसी भी भूमि पर अवैध कब्जा नहीं करती है और यदि किसी प्रकार का विवाद सामने आता है, तो प्रशासन के साथ समन्वय कर समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी सभी कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों के अनुरूप करने का प्रयास करती है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकारी और निजी यानी रैयती भूमि दोनों के उपयोग पर सवाल उठे हैं। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह क्षेत्र में भूमि प्रबंधन, औद्योगिक विस्तार और प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर स्थानीय लोगों, प्रशासन और उद्योग जगत की नजर बनी हुई है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।