Chapapur Colliery Accident : हाईवा की चपेट में आने से 70 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, मुआवजे और नौकरी की मांग पर ग्रामीणों का धरना
Chapapur Colliery Accident : धनबाद जिले के निरसा स्थित ईसीएल (ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के मुगमा क्षेत्र अंतर्गत चापापुर कोलियरी में रविवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कोयला परिवहन में लगे एक हाईवा की चपेट में आने से 70 वर्षीय बुजुर्ग चांदु हेमब्रम की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और ग्रामीणों ने आउटसोर्सिंग कंपनी का कार्य बंद कराते हुए शव के साथ धरना शुरू कर दिया।
Chapapur Colliery Accident : ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी तथा दोषी वाहन चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। घटना के बाद कोलियरी क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों को मौके पर तैनात करना पड़ा।
रविवार दोपहर हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, हादसा रविवार दोपहर लगभग 12 बजे हुआ। मृतक की पहचान जामताड़ा निवासी 70 वर्षीय चांदु हेमब्रम के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि वह पैदल चापापुर कोलियरी की ओर जा रहे थे। उसी दौरान कोयला लादकर तेज गति से गुजर रही एक हाईवा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना इतनी भयावह थी कि हाईवा का पिछला चक्का बुजुर्ग के सिर के ऊपर से गुजर गया। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश में था, लेकिन घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, आउटसोर्सिंग कंपनी का काम कराया बंद
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग घटनास्थल पर एकत्र हो गए। आक्रोशित लोगों ने हादसे के विरोध में आउटसोर्सिंग कंपनी का कार्य तत्काल बंद करा दिया। इसके बाद मृतक के शव को सड़क पर रखकर धरना शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना था कि कोयला परिवहन में लगे भारी वाहन अत्यधिक तेज गति से चलते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। उनका आरोप है कि कई बार कंपनी प्रबंधन और प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाया गया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
मुआवजा और नौकरी की मांग पर अड़े ग्रामीण
धरने पर बैठे ग्रामीणों ने मृतक के परिवार के लिए आर्थिक सहायता की मांग करते हुए कहा कि हादसे में परिवार ने अपना मुखिया खो दिया है। इसलिए कंपनी को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल सांत्वना देने से पीड़ित परिवार की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रोजगार और पर्याप्त मुआवजा आवश्यक है। जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस और सीआईएसएफ ने संभाला मोर्चा
घटना के बाद स्थिति तनावपूर्ण होती देख निरसा थाना पुलिस और सीआईएसएफ की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। सुरक्षा बलों ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांतिपूर्ण समाधान का भरोसा दिलाया। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और नियमानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रबंधन और परिजनों के बीच जारी रही वार्ता
हादसे के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, कंपनी प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों और मृतक के परिजनों के बीच वार्ता शुरू हुई। प्रशासन का प्रयास रहा कि बातचीत के माध्यम से विवाद का समाधान निकाला जाए और क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
हालांकि खबर लिखे जाने तक किसी अंतिम समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रबंधन से लिखित आश्वासन की मांग करते रहे।
कोलियरी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर कोलियरी क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कोयला परिवहन में लगे ट्रकों और हाईवा वाहनों की रफ्तार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार, कई स्थानों पर सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। चेतावनी संकेत, स्पीड कंट्रोल व्यवस्था और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित मार्ग जैसी सुविधाओं का अभाव दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा देता है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल
चांदु हेमब्रम की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने मृतक के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि एक बुजुर्ग की इस तरह दर्दनाक मौत बेहद दुखद है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों में कंपनी प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी भी देखने को मिली।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जाता तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था। अब सभी की निगाहें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे पीड़ित परिवार को क्या राहत प्रदान करते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।