Dhanbad News : सिजुआ मोड़ के तीन पटिया टोला में जोरदार भू-धंसान, एक की मौत, ग्रामीणों ने किया सड़क जाम
Dhanbad News : कतरास के तीन पटिया टोला में अचानक जमीन धंसने से मचा हड़कंप, बिजली का तार और विशाल पीपल का पेड़ करीब 10 फीट नीचे समाया; आक्रोशित ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग किया जाम
Dhanbad News : धनबाद के कतरास स्थित सिजुआ मोड़ के तीन पटिया टोला में मंगलवार को जोरदार भू-धंसान की घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि जमीन धंसने से बिजली का तार और बड़ा पीपल का पेड़ भी करीब 10 फीट नीचे चला गया। घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर सुरक्षित पुनर्वास की मांग की और भू-धंसान के लिए बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया।
Dhanbad News : कतरास के जोगता थाना क्षेत्र अंतर्गत सिजुआ मोड़ स्थित तीन पटिया टोला में मंगलवार को अचानक जोरदार भू-धंसान होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिस समय जमीन धंसी, उस दौरान आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। देखते ही देखते जमीन का एक बड़ा हिस्सा नीचे की ओर धंस गया और क्षेत्र की स्थिति बेहद खतरनाक हो गई।
भू-धंसान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घटना के दौरान बिजली का तार और एक विशाल पीपल का पेड़ भी करीब 10 फीट नीचे धंस गया। जमीन के इस तरह अचानक धंसने से स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल पैदा हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले समय में बड़ा हादसा हो सकता है।
इस हादसे में गुड्डू भुइयां के पुत्र की मौत होने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जुटने लगे। हादसे में हुई मौत के बाद इलाके में मातम के साथ-साथ आक्रोश का माहौल भी देखने को मिला।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भू-धंसान की घटनाएं क्षेत्र के लोगों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावित इलाके में रहने वाले परिवार लंबे समय से असुरक्षित परिस्थितियों में जीवन गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए।
हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने कतरास-धनबाद मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। सड़क जाम होने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ और मार्ग पर वाहनों की कतार लगने की स्थिति बन गई।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन उनकी सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास की मांग रखी है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि केवल हादसे के बाद मौके पर पहुंचना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि क्षेत्र का स्थायी समाधान निकाला जाए और जिन परिवारों के घर भू-धंसान की जद में हैं, उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए।
भू-धंसान की घटना के बाद ग्रामीणों ने इसके लिए बीसीसीएल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कोयला खनन से जुड़ी गतिविधियों के कारण जमीन के धंसने का खतरा बना हुआ है। उनका कहना है कि इलाके में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जिन स्थानों पर जमीन के नीचे असुरक्षित स्थिति है, वहां लोगों की आवाजाही और रहना पूरी तरह सुरक्षित हो।
ग्रामीणों की मांग है कि केवल अस्थायी व्यवस्था करने के बजाय प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान नहीं दिया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।
भू-धंसान के कारण बिजली का तार भी करीब 10 फीट नीचे धंस गया। इससे इलाके की बिजली व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। बिजली के तार का जमीन के साथ इस तरह नीचे चले जाना किसी भी समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि प्रभावित बिजली लाइन को तत्काल सुरक्षित किया जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-धंसान के बाद मौके पर स्थिति सामान्य नहीं है और वहां अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
घटना के दौरान एक बड़ा पीपल का पेड़ भी करीब 10 फीट नीचे धंस गया। पेड़ का इस तरह जमीन में समा जाना भू-धंसान की गंभीरता को स्पष्ट करता है। स्थानीय लोगों के लिए यह दृश्य बेहद भयावह था।
ग्रामीणों का कहना है कि जब एक बड़ा और पुराना पेड़ इतनी गहराई तक जमीन में धंस सकता है, तो आसपास बने घरों और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। इसी वजह से ग्रामीण प्रभावित क्षेत्र को खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग कर रहे हैं।
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से कई मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित करने की है। इसके अलावा भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र की जांच, खतरनाक स्थानों की पहचान और बिजली व्यवस्था को सुरक्षित करने की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि किसी अन्य व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े। लोगों ने यह भी मांग की है कि भू-धंसान के कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सिजुआ मोड़ के तीन पटिया टोला में हुई यह घटना एक बार फिर खनन प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ अचानक जमीन धंसने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, वहीं दूसरी तरफ बिजली का तार और विशाल पेड़ भी जमीन में समा गया।
ग्रामीणों का सड़क जाम कर विरोध करना इस बात का संकेत है कि लोगों में सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता और नाराजगी है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रभावित परिवारों को सिर्फ आश्वासन न मिले, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर स्थायी रूप से बसाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाए।
फिलहाल इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और संबंधित प्रबंधन समय रहते प्रभावित क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएगा? या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा?