Dhanbad News : धनबाद में चुनाव आयोग के खिलाफ भाकपा माले का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
Dhanbad News : रणधीर वर्मा चौक पर पुतला दहन कर जताया विरोध, कथित वोटों की लूट की जांच और विवादित चुनाव प्रक्रिया रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग
Dhanbad News : धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर भाकपा माले ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं और आइसा के छात्र-छात्राओं ने पुतला दहन कर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और विवादित चुनाव दोबारा कराने की मांग उठाई।
Dhanbad News : चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों को लेकर धनबाद में भाकपा माले ने प्रदर्शन किया। शहर के रणधीर वर्मा चौक पर आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) से जुड़े छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। साथ ही चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोटों की कथित लूट के आरोपों की जांच कराने की मांग भी उठाई गई। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव की निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
झारखंड में इससे पहले भी आइसा और भाकपा माले से जुड़े संगठनों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। रांची में भी सितंबर 2026 में इसी तरह का प्रदर्शन दर्ज किया गया था।
प्रदर्शनकारियों ने अपने संबोधन में इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए देश में मतों की कथित लूट का मुद्दा उठाया। भाकपा माले नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों ने मतदान की पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, इन आरोपों को प्रदर्शनकारी संगठन की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी चुनाव में अनियमितता या मतों से जुड़ी गड़बड़ी के आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित चुनावी संस्थाओं और सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत में मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के नागरिकों को मिले मतदान के अधिकार की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है।
भाकपा माले नेताओं ने धनबाद में अपने संबोधन के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी जिक्र किया। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि चुनाव प्रक्रिया और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पार्टी महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, किसान नेता पुरुषोत्तम शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, बुद्धिजीवी जोगेंद्र यादव तथा छात्र नेताओं समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
झारखंड में आइसा की ओर से आयोजित हालिया प्रदर्शन की रिपोर्टों में भी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारियों का उल्लेख किया गया है।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने का अधिकार नागरिकों और राजनीतिक संगठनों के पास होना चाहिए।
धनबाद में प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले नेताओं ने बिहार और पश्चिम बंगाल समेत उन राज्यों में चुनाव प्रक्रिया की जांच की मांग की, जहां पार्टी के अनुसार चुनाव से जुड़ी विवादित परिस्थितियां सामने आई हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी कि यदि जांच में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं साबित होती हैं तो संबंधित चुनावों को रद्द कर दोबारा चुनाव कराया जाए। इसके साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चुनाव रद्द करने या दोबारा चुनाव कराने जैसे फैसले संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत सक्षम प्राधिकार द्वारा लिए जाते हैं। प्रदर्शन में उठाई गई मांगें फिलहाल भाकपा माले और प्रदर्शनकारियों की राजनीतिक मांगों के रूप में सामने आई हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर झारखंड में भी राजनीतिक दलों और संगठनों के बीच बहस जारी है। सितंबर 2026 में धनबाद, जामताड़ा और पाकुड़ में SIR के दौरान मतदाताओं द्वारा जमा किए गए फॉर्म और दस्तावेजों में मिली विसंगतियों की जांच से जुड़ी खबरें भी सामने आई थीं।
इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। भाकपा माले और आइसा का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी बदलाव में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।