Dhanabd News : धनबाद में शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 14.04 लाख की ठगी, बैंक ऑफ इंडिया के फर्जी चालान थमाने का आरोप
Dhanabd News : धनबाद में शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 14.04 लाख की ठगी का आरोप
Dhanabd News : धनबाद में अंग्रेजी शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर रवि कुमार यादव से 14.04 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। बैंक ऑफ इंडिया के आठ कथित फर्जी चालानों का मामला बरवाअड्डा थाना पहुंचा।
Dhanabd News : झारखंड के धनबाद जिले में अंग्रेजी शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। कृष्णा नगर, ढोखरा निवासी रवि कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि उन्हें महुदा बाजार और छत्रुटांड़ क्षेत्र में शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने का झांसा देकर कुल 14 लाख 4 हजार 300 रुपये की ठगी की गई। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने बैंक ऑफ इंडिया के आठ कथित फर्जी चालान थमाकर उन्हें विश्वास में लिया और लंबे समय तक लाइसेंस मिलने का भरोसा देते रहे। जब काफी समय बीतने के बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हुआ तो पूरे मामले का खुलासा हुआ।
पीड़ित रवि कुमार यादव के अनुसार, प्रेम कुमार नाम का एक व्यक्ति खुद को उत्पाद विभाग का अधिकारी रंजन सिंह बताकर उनसे संपर्क में आया। बातचीत के दौरान उसने शराब दुकान का लाइसेंस आसानी से दिलाने का दावा किया। आरोप है कि इस पूरे मामले में बलराम साव और उसके पिता की भी भूमिका रही। पीड़ित का कहना है कि बलराम साव ने दो सोशल मीडिया रिपोर्टरों के नाम का भी इस्तेमाल किया, जिससे उसे भरोसा हो गया कि प्रक्रिया पूरी तरह वैध है।
रवि कुमार यादव का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें कई बार उत्पाद विभाग के कार्यालय भी ले जाया गया। वहां पांडे नाम के एक व्यक्ति को 10 हजार रुपये देने की बात कही गई, ताकि लाइसेंस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। इन घटनाओं के बाद पीड़ित को पूरा विश्वास हो गया कि उसका काम जल्द पूरा हो जाएगा।
पीड़ित का कहना है कि उसे महुदा बाजार और छत्रुटांड़ जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में अंग्रेजी शराब दुकान का लाइसेंस दिलाने का आश्वासन दिया गया था। आरोपियों ने यह भरोसा दिलाया कि सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही लाइसेंस जारी हो जाएगा। इसी भरोसे में आकर उसने अलग-अलग समय पर लाखों रुपये का भुगतान किया।
शिकायत के अनुसार, लाइसेंस दिलाने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे लिए गए। इनमें 5 लाख 50 हजार रुपये, 2 लाख 40 हजार रुपये, 23 हजार 500 रुपये की दो अलग-अलग रकम, 1 लाख 30 हजार रुपये, 35 हजार रुपये, 25 हजार रुपये और 12 हजार 300 रुपये शामिल हैं। इन आठ भुगतानों की कुल राशि 10 लाख 39 हजार 300 रुपये बनती है।
हालांकि, पीड़ित ने अपनी शिकायत में कुल 14 लाख 4 हजार 300 रुपये की ठगी होने का दावा किया है। शेष राशि के भुगतान का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। पुलिस जांच के दौरान इस पहलू की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।
रवि कुमार यादव ने बताया कि भुगतान के बाद आरोपियों ने उन्हें बैंक ऑफ इंडिया के आठ चालान दिए और दावा किया कि राशि सरकारी खाते में जमा करा दी गई है। काफी समय तक लाइसेंस जारी नहीं होने पर उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर चालानों की जांच कराई।
पीड़ित का आरोप है कि जांच के दौरान सभी चालान कथित रूप से फर्जी पाए गए। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। इसी आधार पर उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की।
घटना सामने आने के बाद रवि कुमार यादव ने धनबाद के बरवाअड्डा थाना में बलराम साव और उसके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
फिलहाल पुलिस आरोपों की सत्यता की जांच कर रही है। जांच के दौरान बैंक चालानों की वैधता, भुगतान के दस्तावेज, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए नामों की भी जांच की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोहों की सक्रियता की ओर इशारा करता है। कई बार आरोपी खुद को सरकारी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर लोगों का विश्वास जीत लेते हैं और बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी लाइसेंस, टेंडर या अनुमति से संबंधित प्रक्रिया में केवल आधिकारिक पोर्टल, विभागीय कार्यालय और अधिकृत बैंकिंग माध्यमों पर ही भरोसा करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के कहने पर नकद भुगतान या निजी खातों में रकम जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।