Dhanbad News : 5-डे बैंकिंग की मांग पर बैंककर्मियों की हड़ताल, धनबाद में 300 करोड़ तक का कारोबार प्रभावित
Dhanbad News : यूएफबीयू के आह्वान पर धनबाद समेत पूरे झारखंड में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित, हीरापुर, बैंक मोड़, पुलिस लाइन, सरायढेला और मटकुरिया में कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
Dhanbad News : 5-डे बैंकिंग समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को धनबाद में बैंक कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल की। यूएफबीयू के आह्वान पर जिले की 200 से अधिक बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा। बैंक संगठनों के अनुसार हड़ताल से करीब 250 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। हालांकि एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं जारी रहीं। कर्मचारियों ने मांगें पूरी नहीं होने पर आगे बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
धनबाद। 5-डे बैंकिंग लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को धनबाद सहित पूरे झारखंड में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी यूएफबीयू (UFBU) के आह्वान पर बैंककर्मी एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। हड़ताल के कारण जिले की 200 से अधिक बैंक शाखाओं में नियमित बैंकिंग कामकाज ठप रहा। इससे ग्राहकों को शाखाओं में होने वाले कई जरूरी कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
बैंक कर्मचारियों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांग 5-डे बैंकिंग व्यवस्था को लागू करना है। इसके अलावा कर्मचारियों ने पीएलआई यानी परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव में मौजूद विसंगतियों को दूर करने और अन्य लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है।
बैंक संगठनों के अनुसार केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन के साथ मांगों को लेकर दो दिवसीय वार्ता हुई थी। हालांकि, वार्ता में अपेक्षित समाधान नहीं निकलने के बाद बैंक कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल का फैसला लिया। कर्मचारियों का कहना है कि कई मांगों को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
शुक्रवार को हड़ताल का असर धनबाद के अलग-अलग इलाकों में साफ दिखाई दिया। हीरापुर, बैंक मोड़, पुलिस लाइन, सरायढेला और मटकुरिया सहित कई क्षेत्रों में बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन से लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की। कर्मचारियों का कहना है कि केवल आश्वासन देने के बजाय अब मांगों को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
हीरापुर स्थित इंडियन बैंक के अधिकारी विवेक कुमार ने बताया कि 5-डे बैंकिंग को लेकर करीब दो साल पहले सरकार के साथ समझौता हुआ था। इसके बावजूद अभी तक इसे बैंकों में लागू नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लगातार यह बताया जाता रहा है कि मामला विचाराधीन है। लेकिन लंबे समय से इंतजार के बाद भी जब व्यवस्था लागू नहीं हुई तो कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती गई।
बैंक कर्मचारियों का तर्क है कि देश में कई क्षेत्रों में पांच दिन कार्य और दो दिन अवकाश की व्यवस्था लागू है। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में भी 5-डे बैंकिंग लागू करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
हड़ताल के कारण धनबाद जिले में बैंकिंग कारोबार पर भी बड़ा असर पड़ा। बैंक संगठनों के मुताबिक, 200 से अधिक बैंक शाखाओं के बंद रहने से करीब 250 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
बैंक शाखाओं में नकद जमा, निकासी, चेक से जुड़े काम, डिमांड ड्राफ्ट, बैंक ट्रांसफर और अन्य शाखा आधारित सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि, डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाओं के जरिए ग्राहकों को कुछ राहत मिली।
बैंक संगठनों का कहना है कि हड़ताल का उद्देश्य ग्राहकों को परेशान करना नहीं, बल्कि लंबे समय से लंबित कर्मचारियों की मांगों को सरकार और बैंक प्रबंधन तक मजबूती से पहुंचाना है।
बैंक संगठन सचिव राजीव कुमार रंजन ने कहा कि बैंकों में भी एलआईसी की तर्ज पर तत्काल 5-डे बैंकिंग व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से उन्हें बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सकता है और कामकाजी दक्षता में भी सुधार किया जा सकता है।
इसके साथ ही कर्मचारियों ने पीएलआई यानी Performance Linked Incentive में मौजूद विसंगतियों को दूर करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने वाली व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता जरूरी है।
बैंक यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए। यदि बातचीत के बावजूद मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
बैंक कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक किया जा सकता है। कर्मचारियों के मुताबिक, आने वाले समय में तीन दिवसीय हड़ताल का रास्ता अपनाया जा सकता है।
इसके बाद भी यदि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि, कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार और बैंक प्रबंधन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेंगे और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा।
हड़ताल में यूएफबीयू से संबद्ध सात प्रमुख बैंक यूनियनों के कर्मचारी शामिल रहे। इसके चलते भारतीय स्टेट बैंक (SBI), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), केनरा बैंक, यूनियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकांश बैंकों की शाखाओं में कामकाज प्रभावित रहा।
शाखाओं के बाहर कई जगह ग्राहकों को हड़ताल की जानकारी देने वाले नोटिस भी देखने को मिले। जिन ग्राहकों को बैंक शाखा में जाकर काम कराना था, उन्हें दूसरे दिन बैंक खुलने का इंतजार करना पड़ा।
हालांकि बैंक शाखाओं में कामकाज बंद रहा, लेकिन ग्राहकों को पूरी तरह असुविधा से बचाने के लिए एटीएम और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं जारी रहीं। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं के जरिए ग्राहक कई जरूरी लेन-देन कर सके।
बैंकिंग व्यवस्था तेजी से डिजिटल होने के कारण हड़ताल के दौरान ऑनलाइन सेवाओं ने ग्राहकों को कुछ राहत जरूर दी। हालांकि, जिन कामों के लिए शाखा में जाकर बैंक कर्मचारियों की सहायता जरूरी थी, वे सेवाएं प्रभावित रहीं।
कुल मिलाकर धनबाद में बैंक कर्मचारियों की एक दिवसीय हड़ताल का असर बैंकिंग कामकाज के साथ-साथ कारोबार पर भी देखने को मिला। कर्मचारियों ने 5-डे बैंकिंग लागू करने, पीएलआई की विसंगतियां दूर करने और अन्य लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
अब सभी की नजर सरकार और बैंक प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है। यदि जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता है, तो बैंक यूनियनों की ओर से आंदोलन को और व्यापक किए जाने की संभावना है।